अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी साहित्य साप्ताहिक प्रतियोगिता - "हमारी वाणी"
लेख - पर्यावरण संरक्षण - किरन पंत वर्तिका
पर्यावरण हमारे जीवन की अनमोल धरोहर है। चारों ओर की हरियाली, निर्मल जल, नीला आकाश और उपजाऊ मृदा—ये सभी जीवधारियों के लिए जीवनदायिनी हैं। लेकिन आज मानव की अतिचाहत और सुविधाओं की दौड़ ने प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है। वन कट रहे हैं, नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं, वायु में विषैले धुएँ और अपशिष्ट फैल रहे हैं, और जैव विविधता धीरे-धीरे संकटग्रस्त हो रही है।
पर्यावरण संरक्षण अब केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और नैतिक जिम्मेदारी का अंग बन गया है। हमें जल और ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए, प्लास्टिक और रासायनिक अपशिष्टों से बचना चाहिए और पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास—जैसे एक पेड़ लगाना, जल की एक बूँद बचाना, अपशिष्ट का सही निपटान करना—समाज और पृथ्वी के लिए बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
यदि हम आज जागरूक नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियाँ स्वच्छ हवा, निर्मल जल और हरी-भरी धरती की सुविधा से वंचित रह जाएँगी। इसलिए हमें अपने स्तर पर ही सही, लेकिन निष्ठापूर्ण प्रयास प्रारंभ करना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण केवल एक शब्द नहीं, यह हमारी जिम्मेदारी, जीवन का आदर्श और पृथ्वी के प्रति प्रेम का सजीव प्रतीक है।
किरन पंत वर्तिका
स्वतंत्र लेखिका एवं कवयित्री
हल्द्वानी नैनीताल उत्तराखंड

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