Thursday, 17 September 2026

जीवन - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

जीवन - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 

चौरासी लाख योनि में, मानव जीवन हमको मिला।
कभी अपने जीवन से हम खुश रहते, कभी होती हमें अपने जीवन से गिला।
जीवन की राह केवल फूलों से सजी नहीं होती, काँटें भी सामने आते हैं।
विवेकशील मनुष्य काँटों से बचते हुए, आगे बढ़ते जाते हैं।
जीवन एक अमूल्य यात्रा है, इस यात्रा को अच्छा या बुरा बनाना है हमारे हाथ।
सत्कर्म करने वालों के साथ, सदा रहतें प्रभु श्री नाथ।
जीवन में 
उतार- चढ़ाव आते रहते हैं, 
राहें समतल नहीं मिलतीं।
कभी छोटी-छोटी समस्याएँ आतीं, कभी स्थितियाँ विकट दिखतीं।
जन्म से लेकर मृत्यु तक हम अपनी, जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश करते हैं।
जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश में, कभी कष्ट सहते, कभी खुश रहते हैं।
चलते-चलते पांँव में छाले पड़े तो क्या हुआ, सोचो मंजिल 
अब पास ही है।
अपने से कम सुविधा वालों को देखो, लगेगा सबसे सुखी तो हम ही हैं।
कुंदन बनने के लिए, सोना को भी तपना पड़ता है।
कठिन परिस्थितियों में धैर्य जो रखता, जीवन में वही निरंतर आगे बढ़ता है।
"उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए,"  विवेकानंद जी के वचन। 
"जीवन साइकिल चलाने जैसा है। अपना संतुलन बनाए रखने के लिए आपको आगे बढ़ते रहना चाहिए" अल्बर्ट आइंस्टीन जी के कथन।
इरादा यदि नेक हो, 
कभी भी झुकना नहीं। 
दूसरों के जीवन को खुशियों से भरो, वही रास्ता चुनो जो हो सही।
औरों की बात सुनो ज्यादा, खुद बोलो कम।
परोपकार में अपना जीवन लगाओ, बाँटो सबके गम।
अपनी शिक्षा, अपनी प्रतिभा, इसे अपने जीवन की पूंजी  बनाओ।
सकारात्मक सोच रखो, वर्तमान को सुखमय बनाओ।
"अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति।
नेकु जो होती राम से, तो काहे भव - भीत?" पत्नी रत्नावली जी के इस वाक्य ने तुलसीदास जी का जीवन बदल दिया।
वृद्धावस्था, बीमारी, मृत्यु और संन्यासी का दृश्य,
राजकुमार सिद्धार्थ को भगवान बुद्ध बना दिया।
एक घटना ही काफी होता, जीवन बदलने के लिए। 
खुद के लिए जिए तो क्या जिए, अपना जीवन अर्पण कर दो औरों के हित के लिए। 
अपने अनुभव से सीखो, अपनी अच्छाइयों को पूंजी बनाओ।
निरंतर आगे बढ़ते रहो, अपने जीवन की बगिया महकाओ।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 
स्वरचित
वैस्ट बंगाल 

मृत्यु - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 

मृत्यु - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त 
जबलपुर मध्यप्रदेश 
कविता... मृत्यु

जीवन मृत्यु अटल सत्य है
एक दिन सबकी होनी है ।
जिसका जन्म यहां हुआ है
एक दिन मृत्यु भी होनी है ।

जीवन में संघर्ष यहां है
सुख दुख आते जाते है ।
जीवन और मृत्यु के बीच मेंं
संघर्ष मय जीवन जीते है ।

कोई यहां कुछ नही लाया है
न कुछ लेकर ही, जायेगा ।
खाली हाथ ही सब आये हैंं
सारा सच खाली हाथ जायेगा ।

कोई गरीब न कोई अमीर है
कर्म का फल सबको मिलता है ।
सारा सच है जैसा जो करेगा
फल भी वैसा ही मिलता है  ।

जीवन की इस मोह माया में
यहां सभी ,भटकते रहते है ।
ये तेरा है वो मेरा है यही तो
इन्सान  बस सोचते रहते हैं ।

बचपन और युवापन मेंं
खेले कूंदे और जवान हुये ।
बीती जवानी मौज मस्ती में
 बुढ़ापे को देख घबड़ा गये ।

संघर्ष भरे इस जीवन में
सारा सच ईश्वर को भूल गये ।
जिसने उसको याद किया
जीवन से मोक्ष, भी पा गये ।

जीवन मिला है कुछ कर लो
मोक्ष उसी से मिल पायेगा ।
सच्चाई के मार्ग पर चलकर
मंजिल अपनी भी पायेगा ।

धर्म कर्म कुछ अच्छे कर लो
ईश्वर से कुछ नाता जोड़ लो ।
नैया पार वो सभी की लगाते
पूजा भजन ईश्वर की कर लो ।

बड़े भाग्य से मानुष तन पाया है
जीवन में कुछ पुण्य भी कर लो
पाप पुण्य का मतलब समझकर 
जीवन की नैया को पार लगा लो।

माता पिता की सेवा करना
मान सम्मान उनका भी करना ।
सारा सच मृत्यु सभी की होना है
वो दिन सभी एक दिन आना है ।

पल बढ़े तिल घंटे मृत्यु 
अपने समय पर ही होना है।
डाक्टर कितनी भी कोशिश करें 
मृत्यु समय पर होना है ।
माता पिता जन्म दाता है
तिरस्कार उनका न करना ।
माता पिता ने सेवा जो की है
उस सेवा को भूल न जाना ।

मृत्यु अपने समय पर आती है
कोई भी बचा नही पाता है।
सारा सच है मिट्टी के शरीर को
शमशान में जला दिया जाता है।

महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
   जबलपुर म प्र 

लापरवाही - सुरेश कंठ

लापरवाही - सुरेश कंठ

 रचयिता :- काव्य शिरोमणि 
      वरिष्ठ कवि  “ सुरेश कंठ “
                       *****
 लापरवाही छोटी लगे पर,
 बड़ा नुकसान कर जाती है,
 एक भूल कभी-कभी जीवन, 
 भर की सजा दे जाती है ।
                  (1)
 समय रहते जो काम करें,
 जीवन सुंदर हो जाता है,
 काम टालने वाले अक्सर ,
 पीछे ही रह जाता हैं ।
                  (2 )
सावधानी से कदम बढ़ाए,
 राह सरल हो जाती है, 
जरा सी और असावधानी भी,
 मुश्किल खड़ी कर जाती है।
                  ( 3)
 स्वास्थ्य हो या घर परिवार ,
 ध्यान सभी पर देना है,
 अपने कर्तव्य से कभी नहीं ,
 हमको पीछे हटना है ।
                    (4)
 बूंद बूंद से सागर भरता,
 यह बात सदा याद रखना है ,
 छोटी-छोटी बातों में भी,
 पूरी सावधानी बरतनी है।
                     (5)
 लापरवाही आग समान है ,
 सब कुछ राख बना देती है,
 मेहनत से अर्जित खुशियों,
  पल भर में दूर कर देती है।
                    ( 6 )
 जो जागरूक रहे  जीवन में ,
 वह हर संकट हरता है ,
 सच्चा कर्मठ  इंसान ही ,
 जीवन में आगे बढ़ता है ।
                    (7)
आज संभाल कर काम करें हम,
 कल पछताना क्यों होगा ,
 सावधानी को साथ रखेंगे ,
 जीवन खुशियों से भरेगा ।
                    (8)
 कवि “ सुरेश कंठ “ का कहना,
 हर समय  सावधानी से रहें सतर्क 
 यही जीवन की  मूल मंत्र है,
 कारण हम रहेंगे हर समय सतर्क।
                     (9)
                  जयहिंद 
 रचयिता :---  काव्य शिरोमणि वरिष्ठ कवि 
                      “ सुरेश कंठ”
    कोशी शिविर बथनाहा अररिया बिहार।

गवां बैठे - आशी प्रतिभा

गवां बैठे - आशी प्रतिभा

वो ज़माने हम गंवा बैठे,
वो ख़ज़ाने हम गंवा बैठे
आज कुछ नहीं जोड़ने को,
सलीक़े पुराने हम गंवा बैठे।।

महफ़िलें तो सजी हैं आज बहुत,
पर वो हँसने के बहाने हम गंवा बैठे
ईंट-पत्थर के मकां तो बना लिए,
मिट्टी के वो घराने हम गंवा बैठे।।

जिसे ढूँढती है आज ये दुनिया,
वो सुकून-ए-दिल हम गंवा बैठे
रफ़्तार तो मिल गई है ज़िंदगी को,
ठहरने के वो ज़माने हम गंवा बैठे।।

आशी प्रतिभा 
Madhya Pradesh 

पर्दे में रहने दो - जौली अंकल

पर्दे में रहने दो - जौली अंकल


जिंदगी की दौड़ में अक्सर हम अपनी खुशियां और सपने उन लोगों के सामने खोलकर रख देते हैं, जो हमारे संघर्ष को समझे बिना ही हमारी भावनाओं का मोल लगाने लगते हैं। जब कोई सपना दिल के करीब हो, तो उसे दुनिया के शोर से बचाकर रखना ही उसकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। हमारी हिंदी फिल्म का प्रसिद्ध गाना 'पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ' हमें यही सिखाता है। फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि जिंदगी के बड़े सबक भी हंसते-हंसते दे जाती हैं। जब तक काम पूरा न हो जाए, तब तक सिर्फ शुरुआत का ढिंढोरा पीटने से कोई फायदा नहीं होता।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो जब आप किसी बड़े इम्तिहान, नौकरी के इंटरव्यू, नए बिजनेस या शादी की बात फाइनल होने से पहले ही ढोल बजाने लगते हैं, तो आपका दिमाग उस काम को पूरा मानकर आलसी होने लगता है। पश्चिमी देशों में लोग अनुबंध फाइनल होने तक अपनी गोपनीयता बनाए रखते हैं। इसके विपरीत, भारत में नया विचार आते ही या रिश्ता पक्का होने की हल्की सी आहट मिलते ही युवा सोशल मीडिया पर स्टेटस लगा देते हैं। इससे काम बनने से पहले ही नजर लग जाती है या लोगों के फालतू सवाल आपका मानसिक तनाव बढ़ा देते हैं।

मनोविज्ञान कहता है कि जब आप अपने लक्ष्यों को पहले ही दूसरों से शेयर कर देते हैं, तो दिमाग में डोपामाइन निकलना शुरू होता है। इससे बिना काम किए ही दिमाग को सफलता की झूठी खुशी मिल जाती है और हमारा मेहनत करने का जुनून खत्म हो जाता है। आचार्य चाणक्य ने भी कहा था कि अपने आर्थिक नुकसान, घर के क्लेश और अपमान की बातें कभी किसी तीसरे इंसान को नहीं बतानी चाहिए। अगर आप अपने रिश्तों के झगड़े दोस्तों के साथ साझा करेंगे, तो लोग मदद करने के बजाय पीठ पीछे आपका मजाक बनाएंगे। इसलिए अपनी आय, अगले प्लान, परिवार की बातें और कमजोरियां हर किसी के सामने मत परोसिए, क्योंकि हर मुस्कुराता चेहरा आपका शुभचिंतक नहीं होता।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हम अपनी हर बात अंदर ही घोटते रहें। बात सिर्फ इतनी है कि क्या, कब और किससे शेयर करना है, इसका चुनाव समझदारी से होना चाहिए। जब मन भारी हो या करियर, कानूनी या चिकित्सीय सलाह की जरूरत हो, तब जरूर बात करें। लेकिन यह बातें सिर्फ माता-पिता, सच्चे दोस्तों, जीवनसाथी या विशेषज्ञों से ही शेयर करें, जो बात को गुप्त रख सकें। साझा करने का मजा तब है जब सामने वाला सही राह दिखाए, न कि आपकी बात का इस्तेमाल करके समाज में आपकी छवि खराब करे। हर राह चलते इंसान को अपना हमदर्द समझना बेवकूफी है।
 
आजकल के युवाओं को अपनी हर छोटी-बड़ी बात तुरंत इंस्टाग्राम, फेसबुक या व्हाट्सएप पर पोस्ट करना 'कूल' लगता है। लेकिन शोध बताते हैं कि अपनी निजी जिंदगी को सोशल मीडिया पर नीलाम करना आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए नुकसानदेह है। जब आप अपनी निजी जिंदगी सार्वजनिक कर देते हैं, तो आप दूसरों के आकलन, लाइक और कमेंट्स के दबाव में जीने लगते हैं। इससे नींद उड़ जाती है, घबराहट बढ़ती है और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। अपनी प्राइवेसी को संभालकर रखना पुरानी सोच नहीं, बल्कि मानसिक शांति का कवच है।

एक बात हमेशा याद रखो कि आपकी जिंदगी कोई रियलिटी शो नहीं है जिसके लिए दर्शकों की तालियों की जरूरत पड़े। अपने सपनों और रिश्तों की गरिमा को पर्दे के पीछे ही पकने दीजिए। सफलता का मजा तभी आता है जब मेहनत खामोशी से हो और परिणाम का शोर पूरी दुनिया सुने। अपनी खुशियों को दुनिया की नजर से बचाइए, दुखों को समझदार लोगों के साथ सुलझाइए और सोशल मीडिया की झूठी चमक-धमक से बाहर निकलकर अपनी असली जिंदगी का आनंद लीजिए। जब तक मंजिल हाथ न आ जाए, 'पर्दे में रहने दो' के नियम को याद रखिए, क्योंकि पर्दे में ही आपकी भलाई, सुरक्षा और असली ताकत छिपी है।

*जौली अंकल*