Wednesday, 26 August 2026

सफलता की पहली सीढ़ी / Uzmataranum


संघर्ष : सफलता की पहली सीढ़ी

संघर्ष जीवन का वह सत्य है, जिससे कोई भी व्यक्ति पूरी तरह बच नहीं सकता। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिस्थितियों, असफलताओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। संघर्ष हमें केवल कठिनाइयों से लड़ना नहीं सिखाता, बल्कि हमारे व्यक्तित्व को मजबूत और आत्मनिर्भर भी बनाता है।
मनुष्य के जीवन में संघर्ष का आरंभ बचपन से ही हो जाता है। एक विद्यार्थी अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए मेहनत करता है, एक किसान अच्छी फसल के लिए दिन-रात परिश्रम करता है और एक कर्मचारी अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करता है। इन सभी के पीछे संघर्ष और धैर्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बिना मेहनत के प्राप्त सफलता लंबे समय तक टिक नहीं सकती।
संघर्ष के समय व्यक्ति को अनेक बार असफलताओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में निराश होना स्वाभाविक है, लेकिन असफलता को अंत मान लेना उचित नहीं है। वास्तव में असफलता हमें अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें सुधारने का अवसर देती है। जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होता, वही आगे चलकर सफलता प्राप्त करता है।
संघर्ष हमें धैर्य, साहस, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। यह हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, निरंतर प्रयास से उन्हें बदला जा सकता है। इतिहास में ऐसे अनेक महान व्यक्तियों के उदाहरण मिलते हैं जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य को प्राप्त किया।
अतः संघर्ष को जीवन का बोझ नहीं, बल्कि सफलता की पहली सीढ़ी समझना चाहिए। कठिन रास्ते ही हमें मंजिल की वास्तविक कीमत समझाते हैं। यदि हमारे भीतर दृढ़ इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास करने का साहस है, तो कोई भी संघर्ष हमें हमारी मंजिल तक पहुँचने से रोक नहीं सकता।

Uzmataranum
Karnataka

स्वाभिमान / डॉ० उषा पाण्डेय

 स्वाभिमान / डॉ० उषा पाण्डेय

स्वाभिमान, आत्मसम्मान, खुद की नजरों में अपना मान बनाए रखना। 
अपना मूल्य पहचानना, अपनी गरिमा बनाए रखना।
समय कितना भी प्रतिकूल हो, स्वाभिमान से समझौता कभी न करना।
अपनी बात को शालीनता से रखना, अपनी आत्मा पर चोट कभी न सहना।
'आवत हिय हरषै नहीं,
नैनन नहीं सनेह। 
तुलसी तहाँ न जाइए,
कंचन बरसे मेह।।'
तुलसी दास जी के विचार।
जहाँ लोग आपको  देखकर खुश न हो वहाँ जाना नहीं, भले वहाँ हो धन का भंडार।
स्वाभिमान, आत्मसम्मान है जरूरी, निज के विकास के लिए।
आत्म निर्भर बनने के लिए, खुद में आत्मविश्वास जगाने के लिए।
"तुलसी पर घर जाइ के, दुख न कहिए रोई।
मान गुमावे आपनो, बाट न लेवे कोई।"
किसी के सामने अपना दुखड़ा  न रोइए, गिरेगा आपका 
मान- सम्मान।
आपकी गरिमा कम होगी, 
रखना है यह ध्यान।
स्वाभिमान की कीमत पर,
कोई धन नहीं चाहिए।
स्वाभिमान बना रहे, हमेशा प्रयत्न करना चाहिए।
'स्वाभिमान: सर्वोपरि अस्ति',
स्वाभिमान सबसे ऊपर है।
स्वाभिमान पर आघात, 
सहना हमें क्यों कर है?
स्वाभिमान खुद में विकसित करना पड़ता है, यह बाजार में बिकता नहीं है।
स्वाभिमानी पुरुष का  लाभ, कोई कभी उठा सकता नहीं है।
"स्वाभिमान शरीर के लिए ऑक्सीजन जैसा है। ऑक्सीजन के बिना शरीर मर जाता है और स्वाभिमान के बिना इंसान की आत्मा मर जाती है।" थॉमस साज ने हमें बताया।
"स्वाभिमान अनुशासन का फल है; खुद को ना कहने की क्षमता के साथ ही गरिमा का अहसास बढ़ाता है।"
अब्राहम जोशुआ हेशेल ने समझाया।
अपने सिद्धांतों से समझौता कभी  न करना, चाहे हो कोई मजबूरी।
नैतिकता का दामन न छोड़ना, 
मेहनत के बल पर करना, अपनी इच्छाएँ पूरी।
जिस काम को करने की तुम्हारी जमीर इजाजत न दे,
कभी मत करना।
किसी गरीब की आह न लेना,
अन्याय कभी मत करना।
सकारात्मक सोच सदा रखना, खुद पर भरोसा रखना।
स्वाभिमान के साथ जीना,
सच कहने की हिम्मत रखना।
स्वाभिमानी बनना अहंकारी नहीं, स्वाभिमान उन्नति की ओर ले जाता है। 
अहंकारी मानव का विवेक काम नहीं करता, बहुत दुख पाता है।
स्वाभिमानी पुरुष शांत चित्त रहता है, अहंकारी रहता विकल।
स्वाभिमान के साथ जीना, कमजोरों का बनना संबल।
बच्चों में हमें स्वाभिमान का भाव जगाना होगा। 
खुद पर विश्वास रखें, यह बच्चों को समझाना होगा।
स्वाभिमान से जीती हूँ, किसी का अपमान करना नहीं मेरी फितरत।
सबसे प्यार से मिलजुल कर रहती हूँ, नहीं करती किसी से कभी नफरत।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 
वैस्ट बंगाल 

आजादी / सुरेश कंठ

 शीर्षक -       “ आजादी “ 

                     *****
हिंदी हमारी सुलभ भाषा है 
                हिंदी  राष्ट्रभाषा  घोषित हो 
हम सब की  है यही पुकार
                इसमें तनिक नहीं विलंब हो 

हिंदी में ही करते हैं भजन
                 भजन के बिना   चैन नहीं 
 सात समुंदर पार भी जाएं
              हिंदी के बिना सुख-चैन नहीं 

बैंक ने भी घोषणा की 
                   हिंदी में भी पत्राचार करें 
हिंदी में लिखा सारा चेक 
                 खुशी से सब स्वीकार करें 

बड़े प्यार से करते राही
               हिंदी है जन जन की पुकार
बच्चे बूढ़े सब में चलन है 
            यही है पढ़ने लिखने में शुमार 

हौसला मत टूटने देना प्यारे
           हिंदी ही देश की सर्वोत्तम प्यारे 
वरना आने वाली पीढ़ी 
              कभी क्षमा नहीं करेंगी प्यारे 

देश की सुंदर भाषा है हिंदी
          बोलने में अच्छी लगती है हिंदी
मन में प्रीत बनाए हिंदी 
                  जग में प्रीत बनाए हिंदी 

हिंदी है हम वतन की भाषा 
       हिंदी में बोलने की आजादी मिले
यही है सब जन जन की पुकार
      हिंदी में लिखने की आजादी मिले

       बोलो ओम नमः शिवाय 
       बोलो ओम नमः शिवाय 
                  *****
           ***  जय हिंद  ***
 रचयिता- वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
             बथनाहा, अररिया
                   बिहार

कविता - आज़ादी के दीवाने / बलवान सिंह मानव

कविता - आज़ादी के दीवाने / बलवान सिंह मानव 

आओ करें सब नमन, हम उन जवानों को, 
जो हैं श्रद्धा के पात्र, आज़ादी के दीवानों को 
      आओ करें सब नमन ........ 
यारों! जिन्होंने तोड़ी थी ग़ुलामी की दीवारें, 
वे कोई गैर नहीं, थे भारत माता के प्यारे, 
खेली अपने खून से, आज़ादी की होली, 
गवां दी अपनी जान, बन शहीदों की टोली, 
कैसे भूला सकते हैं, हम उनके बलिदानों को?
       आओ करें सब नमन ........... 
शिवाजी ने दिखाए, गुर छापामार के,
राणा प्रताप ने डराया, भाले के वार से,
लक्ष्मी, तात्यां, दादा फड़न ने, रचा 57 का इतिहास,
 चौहान, टीपू ने किया, था गोरों का विनाश,
दिखाकर हिम्मत जलाया, आज़ादी की मसालों को,
     आओ करे सब नमन........
हमारे संतों ने दिया, सदमार्ग का रास्ता, 
सदा रहें तन - मन में, रहे उनमें ही आस्था, 
सुखाया बुद्ध और फुले ने, मानव समानता को, 
भीमराव ने भगाया था, जातिवाद की दासता को, 
याद करते रहें यूँ ही, हम उन महानों को, 
       आओ करें सब नमन......
सुभाष ओर आज़ाद ने, छुड़ा दिए थे छक्के, 
भगत - सुखदेव - राजगुरु ने, हँस कर पहने फंदे, 
लाल - बाल - पाल ने, नींव हिला दी गोरों की,
बिस्मिल्ल, और उधम ने, नींद छीनी गोरों की,
धूल चटाई,चने चबवाए,उन गौरे कमीनों को,
     आओ करें सब नमन.....
सावरकर - विनोवा भी, हुए संघर्ष में शामिल 
 पीछे नहीं हटे थे, नेहरू जैसे क़ाबिल, 
गाँधी ने दिलायी आज़ादी, कार्य किया महान, 
राजेंद्र प्रसाद ने पकड़ी, भविष्य की कमान, 
याद रखें हम और भी, बाकी बचे नामों को, 
   आओ करें सब नमन...... 
जो हैं श्रद्धा के पात्र, आज़ादी के दीवानों को।
 आओ करें सब नमन..... 
       कवि - बलवान सिंह मानव 
  (स्वरचित एवम् मौलिक रचना)
Haryana 

हमारा संविधान / कादरभाई एन. मनसुरी

हमारा संविधान / कादरभाई एन. मनसुरी   

 
'विभिन्नता में एकता' की खुशनुमा खुशबू से महकता खुशहाल हिन्दुस्तान है। 

विश्व में सबसे लम्बा हस्तलिखित संविधान भारत देश की अनूठी शान है।

संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकरजी को कोटि-कोटि नमन है।

'भारत के हम लोग' प्रस्तावना से प्रारंभ संविधान देश का सर्वोच्च कानून है।

हिन्दी-अंग्रेजी भाषा में लिखित संविधान उन्नत राष्ट्र की अनोखी पहचान है।

शांतिनिकेतन के चित्रकारों का संविधान कलाकृति में विशिष्ट योगदान है।
 
भारतीय सर्वेक्षण विभाग-देहरादून में ऐतिहासिक प्रकाशन का निर्वहन है। 
 
26 नवम्बर 1949 को अपनाया गया भव्यतम भारत का अनुशासन है।
 
26 जनवरी 1950 को लागू किया गया भारत का मनोहर संविधान है।

2 वर्ष 11 माह 18 दिन की अवधि में परिपूर्णता की खुशी मनभावन है।

समान अवसर-समान अधिकार-कल्याणकारी सद्भावना का परिपालन है।

संप्रभु-समाजवादी-धर्मनिरपेक्ष स्वतंत्रता में घोषित गणराज्य का जीवनदर्शन है।

सार्वजनिक वयस्क मताधिकार में अतुलनीय आनंद से भरा अपनापन है।

नारी सम्मान-शिक्षा-संस्कृति-बंधुत्व-समरसता में  जगमगाता जीवन है।

'सर्व धर्म समभाव' की स्वतंत्रता में सुखद-सुहावना सौहार्दपूर्ण संवेदन है। 

मौलिक अधिकार-संवैधानिक उपचारों में पूर्णतया सुनिश्चित प्रावधान है।

भारतीय संविधान में लोकतांत्रिक गणराज्य का प्रतिबद्ध आश्वासन है।

सुरम्यता-सौम्यता से सुशोभित संविधान भारत की आन-बान-शान है।