Thursday, 12 February 2026

भक्त - राजवाला पुंडीर


भक्त - राजवाला पुंडीर
 
भक्त आंसू सदा ही बहाता है क्यों?
माँ चरणों में तेरे वो रोता है क्यों?
 
बनाती है तू सबको हीरा ही हीरा
तपाती है तू सबको दे दे के पीड़ा
फिर भी आँचल में तेरे ही रोता क्यों?
 
हर भक्त है तुझे माँ प्राणों से प्यारा
है तेरा प्यार अद्भुत है जग से न्यारा
देख भक्त दर्द दिल तेरा रोता है क्यों?
 
धर्म के पथ पै चलके भी गिर जाते हैं
फिर भी उठ कर आगे ही बढ़ जाते हैं
धर्म मार्ग में अग्नि ताप होता है क्यों?
 
सत मार्ग पर चलके बिखरता है रोज
कभी टूटी सी स्वांस ले खोता है होश
अपनी माटी को खुद ही ढोता है क्यों?
 
तू तो लेती परीक्षा कठिन भक्त की माँ
 तेरी आँखों से धारा बहे रक्त की माँ
तेरे इतना दर्द माँ फिर होता है क्यों?
 
उनको मिलती है मंजिल सच्ची भक्ति में
उनकी खिलती है कुड़मल सजी पंक्ति में
फिर भी मूर्ख दुखी मन ये होता है क्यों ?
 
तेरी शक्ति का आभास है माँ आज भी
जो भी लगता असंभव बने वो  काज भी
फिरभी शक इनके मनमें होता है क्यों?
 
अपनी आवाज को माँ पहुंचा भक्तों तक
अपना आभास भी मां पहुंचा भक्तों तक
 देरी से तेरा विश्वास होता है क्यों?
 
भक्त सच्चा हो तो हो दिल में तेरा मठ
वक्त अच्छा हो तो पल में मिलता है तट
तेरी चाहत में दर-दर भटकता है क्यों?
 
सब कहते हैं मैया तो दिल में रहती है
कूड़ा करकट बुहारो दिल में कहती है
बुहारी लगा दिल को न धोता है क्यों?
 
बन जाती है भक्तों की तू माँ हमसफर
तू माँ देती सहारा हर पल हर डगर
फिर भी दर पर तेरे, भक्त रोता है क्यों?
 
करती पुंढीर भक्त की भक्ति को नमन
खिलता रहता सदा है भक्ति का चमन
पेन लिखते हुए ये मुस्कराता है क्यों?
 
राजवाला पुंडीर
उत्तर प्रदेश

सात सुरों - दिशा सिंह

सात सुरों की तान लगाकर 
प्रेम प्रणय का रस बरसाकर 
सुख को अपने पास बुलाकर 
दुख को गहरी नींद सुलाकर 
सांसों में सरगम अधरों पर मिश्री घोल रही 
कान्हा की बांसुरिया राधे राधे बोल रही 
   जब जब बजती पागल करती 
   छम छम मेरी पायल बजती 
    नाच रहे खग मृग नभ धरती 
    पवन उमड़ती बदरी झरती 
मन के लाज शर्म वाले घूंघट पट खोल रही 
कान्हा की बांसुरिया राधे राधे बोल रही 
    मथुरा निधिवन वृंदावन में 
    बरसाने की कुंज ग़लिन में 
    गोवर्धन के हर तृण तृण में 
    जा ब्रज मंडल के कण कण में 
  प्रेम तराजू स्वास स्वास कस्तूरी तोल रही 
   कान्हा की बांसुरिया राधे राधे बोल रही
 
   दिशा सिंह ,
उत्तर प्रदेश ✍️

धर्म - पदमा तिवारी

सारा सच प्रतियोगिता 
सनातन/धर्म 
 
सनातन ही ऐसा धर्म है, 
जिसका ना आदि न अंत है। 
वसुधैव कुटुंबकम भाव ,
सनातन ही संपूर्ण धर्म है।।
 
वेद उपनिषद रामायण गीता,
सब में कर्म प्रधान बताया है। 
रची रामायण वाल्मीकि ने,
व्यास ने वेदों को गाया है।।
 
प्रेम की वश में राम ने,
शबरी के झूठे बेरों को खाया।
मिला सभी को मान कर्म से, 
वर्ण भेद से कुछ ना पाया।।
 
कर्म ही धर्म बड़ा, 
निष्काम भाव से कर्म करो,
जात-पात को भूलकर,
अंतस सनातन धर्म भरो।।
 
अतिथि देवो भव धर्म सनातन,
होता पुरुखों का अर्चन मान,
शील विनय और भक्ति जहां 
बसते हैं वहां भगवान।।
 
सच है सनातन धर्म, 
इंसान मिटता है सिद्धांत नहीं। 
यह नींव है सनातन की,
झूठ इसमें वृतांत नहीं।।
 
सत्य का दर्शन है जहां, 
 
श्रुतियों के धर्म का मंत्र है, 
यह वही सनातन है,
जिसका आदि है न अंत है।।
 
@पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश
 

पूजा - डा अनन्तराम चौबे अनन्त

राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी की 

साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
विषय... पूजा - डा अनन्तराम चौबे अनन्त
       पूजा 
 
कण-कण में भगवान है
रोम रोम में भगवान है ।
मंदिर तो पूजा घर होता है
वहां पर रहते भगवान हैं ।
 
भगवान के मंदिर में सभी 
श्रद्धा विश्वास से जाते हैं
छोटा बड़ा जो भी मंदिर हो
भगवान वहां पर रहते हैं ।
 
प्रसाद के लड्डू में मिलावट 
कोई अधर्मी ही करता है ।
जाति धर्म बदनाम करने को
साजिश ऐसी कोई करता है ।
 
धर्म में श्रद्धा आस्था जो रखता है 
 मंदिर से भी वो जुड़ा रहता है ।
गृहस्थ जीवन को जीकर भी
जीवन अपना सफल बनाता है ।
 
मंदिर में ईश्वर की पूजा करना
समय मिले ध्यान लगाना ।
मनुष्य का तन मिला है तो
पूजा भक्ति भी करते रहना।
 
सुखमय जीवन जीना है
तो परोपकार भी करना है ।
सारा सच है जैसी सामर्थ हो
परोपकार भी, वैसा करना है ।
 
मंदिर में पूजा पुण्य का काम है
पुण्य का फल मीठा मिलता है ।
आज नहीं तो कल मिलता है
जीवन भी सुख मय रहता है ।
 
धर्म पूजा में श्रद्धा जो रखता है
फल भी उसको  मिलता है ।
परोपकार करने वाला ही
सबकी दुआएं पाता रहता है ।
 
तुलसी, आंवला, पीपल के
वृक्षों की पूजा भी करते हैं ।
हिन्दू धर्म में मान्यता है कि 
इन वृक्षों में ईश्वर वास करते हैं।
 
माता पिता की सेवा करना
कभी दुखी न उनको रखना ।
माता पिता की सच्ची सेवा ही
ईश्वर की जैसे पूजा करना है ।
 
सच्ची राह किसी को दिखाना
सारा सच पुण्य का काम होता है। 
छोटा छोटा श्रम दान करो तो
वो भी परोपकार ही होता है ।
 
प्यासे को पानी पिला दो
भूखे को दो रोटी खिला दो ।
पक्षियों को दाना खिला दो
मंदिर में पूजा जैसा होता है ।
 
महिलाएं अक्सर ही मंदिर में 
भजन कीर्तन करती रहती है ।
घर परिवार में खुशियां रहें
मंदिर में यही कामना करती है
 
पूजा, भक्ति ,धर्म कर्म भी
श्रद्धा से जीवन में करना है ।
सारा सच है मोक्ष मिलेगा 
जीवन जो सार्थक करना है ।
 
  महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
  जबलपुर म प्र

पूजा - अनीता चमोली

अनीता चमोली
उत्तराखंड देहरादून
 
पूजा.....
.......
पूजते हैं सब  ईश्वर
श्रद्धा भाव भरा हृदय मे
मन मे लगन अनुराग
पूजा भाव सब एक सा
पद्धति हैं भिन्न भिन्न
कोई पढता नमाज अल्लाह की
कोई करता इष्टदेव की आरती
कोई गिरजे मे करता प्रेयर
 एक ही शक्ति नाम भिन्न
प्रार्थना मे मांगते खुशहाली
पूजते चांद सूरज हवा जल मिट्टी
जीवनदायिनी प्रकृति
पूर्ण मनोकामना लाती खुशियाँ
पूजा जगाता समर्पण मनोभाव
आशीर्वाद विश्वास से भरता जीवन