Monday, 21 September 2026

आशीर्वाद : जीवन की अमूल्य पूँजी - उज़मा तरन्नुम

आशीर्वाद : जीवन की अमूल्य पूँजी - उज़मा तरन्नुम

भारतीय संस्कृति में आशीर्वाद का विशेष महत्व है। यह केवल कुछ शुभ शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति के प्रति प्रेम, स्नेह, शुभकामना और मंगलभावना की अभिव्यक्ति है। हमारे संस्कारों में बड़ों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेना सम्मान और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है। माता-पिता, गुरुजनों और बुजुर्गों का आशीर्वाद व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

आशीर्वाद का सबसे सुंदर रूप हमें माता-पिता के स्नेह में देखने को मिलता है। माता-पिता अपने बच्चों की सफलता, सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। उनके मुख से निकले हुए शुभ शब्द बच्चे के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। जीवन में जब कठिन परिस्थितियाँ आती हैं, तब यही आशीर्वाद व्यक्ति को आगे बढ़ने का साहस देता है। इसलिए कहा जाता है कि माता-पिता का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है।

भारतीय परंपरा में गुरु का आशीर्वाद भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा भी प्रदान करते हैं। विद्यार्थी जब गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करता है, तो उसमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का विश्वास मजबूत होता है। गुरु का आशीर्वाद ज्ञान, अनुशासन और संस्कारों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

आशीर्वाद का संबंध केवल बड़ों से ही नहीं है। जब हम किसी छोटे या अपने प्रिय व्यक्ति को सफलता, सुख और अच्छे भविष्य की शुभकामना देते हैं, तब वह भी आशीर्वाद का ही एक रूप है। सच्चे आशीर्वाद में किसी स्वार्थ की भावना नहीं होती। इसमें केवल दूसरे के कल्याण की कामना निहित रहती है।

आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन में पारिवारिक संबंधों में दूरी बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में आशीर्वाद जैसी परंपराएँ हमें अपनी संस्कृति और मूल्यों से जोड़ती हैं। यह हमें सिखाता है कि जीवन में ज्ञान, सफलता और धन के साथ-साथ प्रेम, सम्मान और संस्कार भी आवश्यक हैं।

अंततः कहा जा सकता है कि आशीर्वाद जीवन की वह अमूल्य पूँजी है, जो दिखाई नहीं देती, लेकिन व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है। बड़ों का आशीर्वाद हमें कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति देता है और हमारे जीवन-पथ को आशा तथा विश्वास से भर देता है। इसलिए हमें सदैव अपने माता-पिता, गुरुजनों और बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

Uzma taranum
Karnataka

फ़र्ज़ राखी का - बलवान सिंह मानव

फ़र्ज़ राखी का - बलवान सिंह मानव


बहना ने बांधा है प्यार, भाई की कलाई में, 
करेगा रक्षा ये वादा, मांग है भाई से, 
क्यों, क्या करेगा रक्षा ?, अपनी इस बहन की,
दिलाएगा मुक्ति उस पीड़ा से, जो हमने है सहन की?
निभा दे अपना फ़र्ज़ भाई, अब ना किसी से डर, 
कर सामना इस दरिन्दों का, तू भी तो अब कुछ कर,
आखिर नोचते रहेंगे कब तक, हमें यूं ही ये भेड़िये, 
भाई पिता, चाचा, मामा, मौसा, सबकी खाल में छुपे भेड़िये,
ना औकात रही अब कुछ , हमें बार -2 ये नोचते हैं,
दिखाकर हैवानियत अपनी, खून से हाथ पोंछते हैं,
क्या होगा अब इस देश का, क्या होगी सुरक्षित हमारी जाति?
क्या होंगे अत्याचार बंद?,  जो हो रहे हम पर काफी,
सुनकर खून खौल उठा भाई का, मैं यह नहीं होने दूंगा, 
इस दरिन्दों को अब मैं , खून से हाथ धोने नहीं दूंगा, 
मैं लगा दूंगा पूरा जीवन, तुम बहनों की देखभाल में, 
नहीं चैन से बैठने दूंगा, जो भेड़िए छिपे हमारी खाल में, 
पर तुम बहनें भी अब, कम करो पाश्चात्य का दिखावा, 
शील - मर्यादा पर करो मनन, छोड़ दो नया पहनावा, 
सुनकर भाई की बात, बहना ने भी मन में बांधी,
"मानव " ने स्वीकारा फ़र्ज़, बहना ने भी राखी बांधी।।

       मौलिक एवं स्वलिखित रचना
       बलवान सिंह मानव

‌मीडिया - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

‌मीडिया - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 

'मीडिया' शब्द अंग्रेजी शब्द मीडियम का बहुवचन है, जिसका अर्थ है माध्यम।
खबरों के आदान-प्रदान का है मीडिया एक माध्यम।
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है।
मीडिया हमारी जानकारी बढ़ाता, हमारे  व्यक्तित्व में निखार लाता है।
तीन प्रकार की मीडिया होती है प्रिंट, 
इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल।
मीडिया हमारी जिज्ञासा शांत करता है, खबरों की जानकारी देता पल-पल।
प्रिंट मीडिया में कागज पर छपी सामग्री हमें मिलती है।
किताबें और पत्रिकाएं बहुत लाभदायक होतीं, हमारा सही मार्गदर्शन करती हैं।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेडियो, टेलीविजन, विश्व की
खबरें हमें बताता है।
विश्व में घट रही घटनाओं को, हमें घर बैठे दिखलाता है।
डिजिटल मीडिया की बात अलग है, फेसबुक, व्हाट्सएप इंस्टाग्राम, वेबसाइट, पॉडकास्ट हमें दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंचाता है।
मीडिया हमें आसपास की और दूर की खबरों से अवगत कराता है।
मीडिया मानो दूरियाँ खत्म कर देता, परिवार के सदस्यों,  दोस्तों को यह जोड़ पाता है।
हमारा दिल उदास हो, मीडिया करता है हमारा मनोरंजन।
तनाव कम करने का, मीडिया एक है बहुत अच्छा साधन।
मीडिया के लिए जो खबरें लाते हैं,
वे हैं पत्रकार।
जान जोखिम में डालकर, लाते समाचार। 
ताजा खबर हम तक पहुँचाते, विश्व का हमको मिलता ज्ञान। 
लोगों को जागृत करते, करते खतरों से सावधान।
खबर इकट्ठा करते, निष्पक्ष होकर करते काम। 
समाचार जन-जन तक पहुँचाते, करते नहीं आराम। 
निर्भीक होकर करते काम।
कमज़ोर की आवाज बनते, मेहनत कर देते काम को अंजाम।
कितनी तकलीफ सहकर  खबरें लाते, फिर भी चेहरे पर मुस्कान रहती है।
सच्चाई सामने लाकर, इनको खुशी मिलती है।
ये पत्रकार ही हैं जो हम सबको जोड़े रखते हैं‌।
समाज के हित के लिए वे सदा समर्पित
रहते हैं।
चुनौतियों का सामना करते, देते हर पहलू पर ध्यान।
समाज की उन्नति में, होता इनका बहुत योगदान।
मीडिया पर हमें भरोसा करना चाहिए, उसका साथ देना चाहिए।
सही खबर पहुंचाने में, हमें मीडिया की मदद करनी चाहिए।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 
वैस्ट बंगाल 

पत्रकार - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
विषय... पत्रकार - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त 

कविता... पत्रकार 

पत्रकार पत्रकारिता करता
सच्ची खबर को सामने लाता ।
सारा सच अन्याय जहां भी होता है 
उसके खिलाफ आवाज उठाता ।

सरकार चलाने स्तंभ तीन है
चौथा स्तंभ पत्रकारिता भी है।
मीडिया सरकार का हिस्सा नहीं है
फिर भी पत्रकार की भूमिका है ।

आम जनता को न्याय मिले न
तब मीडिया ही न्याय दिलाती है।
न्यायपालिका हो विधायिका हो
कार्यपालिका की पोल खोलती है ।

सच्चाई पर से जब पर्दा उठता है
दूध का दूध पानी का पानी होता है ।
भ्रष्टाचार हुआ हो चाहे या फिर
जिससे जो भी काम गलत होता है ।

सारा सच सच्चाई , भ्रष्टाचार से पर्दा
उठाने में पत्रकारिता का रोल होता है।
सच्चाई जब सबके सामने आती है
सच और झूठ का भेद खुलता है ।

ऐसे ही काले कार नामों को
मीडिया के माध्यम से खुलते हैं ।
कितना भी ताकतवर हो व्यक्ति
या सत्ता की कुर्सी पर रहते हैं ।

झूठ छुपाकर बच नहीं पाते
सच्चाई को हरा नहीं पाते हैं।
मीडिया ने जब पोल खोल दी
उसको कोई छुपा नहीं पाते हैं ।


प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रानिक मीडिया
अब सोसल मीडिया भी आया है ।
यही मीडिया के ही स्तंभ तीन है
पत्रकारिता से हर कोई घबराया है।

हर गली मोहल्ला गांव शहर देश
में भी मीडिया ने जाल फैलाया है ।
मीडिया के जाल में फसा जो भी है
पत्रकारिता ने न्याय दिलवाया है।

मीडिया की भूमिका से बचा न कोई
सभी जगह में जाल फैला रहता है ।
पेपर , टी वी या सोसल मीडिया हो
इनसे ब्रेकिंग न्यूज मिलता रहता है ।

आरक्षण एस सी एस टी एक्ट 
यूजीसी कानून यूजीसी शुरू हुआ है।
तभी से सवर्णों  की नाराज़गी है
और आन्दोलन  भी शुरू हुआ है ।

सोशल मीडिया के पत्रकारों की 
पूरे देश में ही खबर चल रही है ।
दिल्ली के जंतर मंतर की खबरें 
फेसबुक वाट्सएप में चल रही हैं।

सरकार और सुप्रीम कोर्ट तक 
सोशल मीडिया की खबरें पहुंची है ।
थानों में जो एफ आई आर हो रही है
सोशल मीडिया से पुष्टि हो रही है ।

सारा सच न्यूज़ चैनलों पर रोक लगी है
आन्दोलन की खबर नहीं दिखाते ।
सरकार से सभी भयभीत हैं और 
सभी चुप्पी साधे ही रहते हैं। ।

आरक्षण एस सी एस टी एक्ट 
यूजीसी कानून नहीं हटता है ।
तो अगले चुनाव में जनता ही 
सारा सच सत्ता से इनको हटा देगी ।

   महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
        जबलपुर म प्र

खुश रहना सीखो - जय जिनेंद्र

खुश रहना सीखो - जय जिनेंद्र
विधा : कविता

तेरा मेरा जो साथ है। 
नई सुबह का इंतजार है। 
खुशियाँ भी अपरंपार है। 
इसलिए हमें तुमसे प्यार है।। 

चिंता से चिंतन का सफर है। 
इसलिए शरीर शिथिल है। 
देखकर सोचकर समझो। 
दुख में खुश रहना सीखो।। 

आज कल के चक्कर में। 
कल से प्रेम करते हो। 
अरे कल को छोड़ो। 
आज में जीना सीखो।। 

भरोसा नही है खुद पर। 
तो औरों का इंतजार क्यों। 
परिश्रम खुद करके देखो। 
फल की चिंता को छोड़ो ।। 

जीने की कला को सीखो। 
उदासी में खुशियाँ खोजो। 
सफलता मिलेगी तुम्हें निश्चित। 
पर पहले खुश रहना सीखो।। 

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई