*सीख : डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
"ऐसे जियो जैसे कल ही मरना हो।
ऐसे सीखो जैसे हमेशा जीना हो।"
गाँधी जी के ये वचन, हमें अमल में लाना चाहिए।
सीखने की उम्र नहीं होती,
याद रखना चाहिए।
सीखना एक सतत प्रक्रिया है,
मृत्यु पर्यंत चलता है।
नित-नित जो नए सीख लेता,
उसका व्यक्तित्व निखरता है।
एक बच्चे से भी हम कभी कुछ सीख लेते, कभी परिस्थितियाँ हमें सिखाती हैं।
सीखने से मानव की,
याद्दाश्त बढ़ती जाती है।
"सीखना कभी मन को थकाता नहीं है।" लिओनार्डो द विंची ने बताया।
"अज्ञानी होना इतनी शर्म की बात नहीं है, जितना सीखने की इच्छा न रखना।" बेंजामिन फ्रैंकलिन ने समझाया।
"सीखने की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे आपसे कोई छीन नहीं सकता।" बी.बी. किंग के वचन।
अच्छी बातें सदा सीखो, लगाकर तन और मन।
प्रभु श्री राम से,
मर्यादा और धीरज सीखो,
रामानुज भरत से सीखो भ्रातृत्व प्रेम और त्याग।
हनुमान जी ने अशोक वाटिका उजाड़ा, सोने की लंका में लगा दी आग।
प्रभु हनुमान सिखाए हमें,
निश्छल भक्ति और पूर्ण समर्पण।
माता सीता ने हर हाल पति का साथ निभाया, हम सबके लिए बनीं उदाहरण।
रावण की कहानी सिखलाती,
अहंकार से किसी का भला नहीं होता।
दुर्योधन यह सीख दे गया,
गलत कर्म का परिणाम सदा गलत ही होता।
सीखना है तो राजा हरिश्चंद्र से सीखो, सत्य का राह कभी मत छोड़ो।
परिवार में फूट न होने दो,
प्रेम का रिश्ता सबसे जोड़ो।
सच्चा प्रेम किया मीरा जी ने, समाज के तानों का परवाह नहीं किया।
सच्चा प्रेम निस्वार्थ होता है,
मीरा जी ने यह सीख दिया।
सीखने से मस्तिष्क
स्वस्थ रहता, आनंद की अनुभूति होती।
सीखने से मन सक्रिय रहता है, उदासी महसूस नहीं होती।
हर स्थिति में अडिग रहना, कर्तव्य से न विचलित होना,
पर्वत हमें सिखलाता।
पतंग को खुद के कटने का डर रहता है, फिर भी आसमान में उड़ता जाता।
चाँद और चकोर की लोक कथा, सच्चा प्यार दर्शाती है।
प्रेम में कोई छल न करना,
हमें सीख दे जाती है।
धरती से धीरज सीखो, और सीखो क्षमाशीलता।
नित नित जो नए हूनर सिखता, उसका व्यक्तित्व निखरता।
फूल को कोई तोड़े, उसे परवाह नहीं रहता।
भेदभाव कभी मत करना,
यहीं सीख हमें फूल से मिलता।
कछुआ और खरगोश की कहानी
सिखलाती, बच्चों, अहंकार कभी मत करना।
कितनी भी बाधाएं आयें, कदम सदा आगे ही रखना।
सीखने के लिए अनेकों उदाहरण है, बस हमें अच्छी बातें सीखना होगा।
अपने भीतर की बुराइयों को त्याग, अच्छे कर्म करना होगा।




