संरक्षण - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
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प्रकृति हमारी अनमोल धरोहर
इसकी रक्षा करना है मनोहर
पेड़ - पौधा का सम्मान करें
हरियाली का काफी गुणगान करें
जल संरक्षण है बहुत जरूरी
इसके बिन हर खुशी अधूरी
नदियों को निर्मल रहने दें
जलधारा को अविरल बहने दें
वायु प्रदूषण को दूर भगाएं
स्वच्छ हवा का सुख अपनाएं
पशु - पक्षियों की रक्षा हो
सबके जीवन में सुरक्षा हो
वन कटने से उसे रोक लगाएं
नए - नए पौधे जरूर लगाएं
मिट्टी का भी मान को बढ़ाएं
उर्वर धरती को निश्चित बचाएं
संस्कृति का संरक्षण करें
सरकारों का संवर्धन करें
भाषा, साहित्य का हो सम्मान
इनसे बढ़ता है देश का मान
ऐतिहासिक धरोहर बचाएं
अपनी पहचान अमर बनाएं
संविधान के मूल्यों का ज्ञान
लोकतंत्र की यही है शान
मानवता का करें संरक्षण
प्रेम बने जीवन का आभूषण
बालक,वृद्धि सभी सुरक्षित हों
नारी के अधिकार संरक्षित हों
पर्यावरण का रखें विचार
स्वच्छ बने अपना संसार
प्लास्टिक का उपयोग घटाएं
कचरे का सही प्रबंधन बनाएं
ऊर्जा की बर्बादी को पहले रोकें
बिजली की हर किरण को संजोएं
धरती मां का कर्ज चुकाएं
आने वाली पीढ़ी बचाएं
संरक्षण केवल बात नहीं है
जीवन की बड़ी सौगात है
मिलकर अपना फर्ज निभाएं
सुंदर भविष्य सभी बनाएं
बूंद - बूंद से सागर बनता
छोटा प्रयास बड़ा फल देता
जीव- जगत का रखें ख्याल
तभी बनेगा जीवन खुशहाल
प्रकृति से है अपना नाता
इसके बिन अस्तित्व न भाता
संरक्षण का दीप यहीं जलाएं
जन - जन में चेतना फैलाएं
आज बचाएं वन और पानी
कल होगी खुशियों की कहानी
स्वार्थ छोड़कर आगे आएं
धरती का वैभव लौटाएं
कर्तव्य का संकल्प उठाएं
संरक्षण का धर्म निभाएं
यही प्रगति का सच्चा दर्शन
जीवन का आधार संरक्षण
आओ मिलकर करें प्रणाम
प्रकृति बचाना अपना काम
वरिष्ठ “कवि कंठ“ का कहना
सही बात सभी का सुनना
—--- जय हिंद —---
रचयिता- वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ,
बथनाहा, अररिया, बिहार।




