Saturday, 3 October 2026

आनलाइन संसार -- नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

आनलाइन संसार -- नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

आनलाइन जैसा शब्द ठीक वैसा ही व्यवहार आन लाइन आज कल समाज कि जरूरत बन गई है!

जीवन कि छोटी से छोटी बड़ी से बड़ी जरूरतों के लिए आन लाइन  समाज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा किस्सा बन गया है!

सुई से लेकर सम्भवत हवाई जहाज तक आन लाइन मगाया जा सकता है भुगतान आन लाइन ही किया जा सकता है स्पष्ट है कि

जीवन समाज आन लाइन होकर एक कमरे बंद होकर ऱह गया है!

संचार एवं मिडिया क्रांति के युग में समाचार से लेकर मनोरंजन तथा अध्ययन को भी आन लाइन कर दिया है!

पुस्तक कोई खरीदता नहीं सब कुछ सुलभ है एक मोबाइल के

मध्यम से आन लाइन गोष्ठी सम्मेलन, वर्क फ्रॉम होम आदि कि नव संस्कृति को जन्म दिया है!

आन लाइन से कोई भी व्यवहारिक कार्य करने के लिए दो आवश्यक श्रोत का होना आवश्यक है एक बैंक मे खाता हो दूसरा मोबाइल, कंप्यूटर, या टेबलेट्स,मोबाईल का होना आन लाइन संस्कृति के उद्भव विकास से सुविधाएं बढ़ी है जैसा कि हर नए वैज्ञानिक अविष्कार कि लाभ हानियाँ होती है ठीक उसी प्रकार आन लाइन का प्रयोग भी हानि लाभ के सैद्धांतिक दोष से मुक्त नहीं है!

सोसल मिडिया के प्रयोग मे आन लाइन गेम, आन लाइन रिश्ते का निर्माण बिना कि ठोस आधार के सिर्फ आन लाइन से वैवाहिक सम्बन्ध समाज को अक्सर पीड़ा और दर्द ही देते है!

आन लाइन सुविधाएं भागम भाग के जीवन मे समय कि बचत करता है तो आपके पसंद को सीमित करता है, आन लाइन अपराध को भी जन्म देता है साईबर ठगी इसका ज्वलंत उदाहरण है!

आन लाइन अनाप सनाप सूचनाओं एवं संदेशो से समाज को भ्रमित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है!

आनलाइन से समाज और संसार को लाभ भी बहुत है किसी के अंदर यदि कोई प्रतिभा है तो आनलाइन युग पूर्व उसे अपनी प्रतिभा समय समाज मे स्थापित करने मे संघर्ष करते करते कभी कभी जिंदगी बीत जाती थी आन लाइन युग मे अपनी प्रतिभा को विडिओ द्वारा, इंस्टाग्राम द्वारा, फेसबुक द्वारा सोसल मिडिया पर प्रस्तुत कर अल्प समय मे ही लोक प्रिय बनने का असीमित अवसर उपलब्ध है स्थिति यहां तक है कि बच्चे बूढ़े जवान युवा किशोर महिलाए बेटियां सभी अपनी प्रतिभा हुनर को सोसल मिडिया पर आन लाइन प्रेषित कर लोकप्रिय तो हो रहे रही है आय भी अर्जित कर रहे!

आनलाइन संस्कृति का नकारात्मक पक्ष यह है कि समाज कि बौद्धिक क्षमता शारीरिक क्षमता का ह्रास हो रहा है जिसके कारण भावी पीढ़ियों के मनसिक एवं शारीरिक स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ने कि सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है!

आनलाइन जैसा शब्द ठीक वैसा ही व्यवहार आन लाइन आज कल समाज कि जरूरत बन गई है!

जीवन कि छोटी से छोटी बड़ी से बड़ी जरूरतों के लिए आन लाइन  समाज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा किस्सा बन गया है!

सुई से लेकर सम्भवत हवाई जहाज तक आन लाइन मगाया जा सकता है भुगतान आन लाइन ही किया जा सकता है स्पष्ट है कि

जीवन समाज आन लाइन होकर एक कमरे बंद होकर ऱह गया है!

संचार एवं मिडिया क्रांति के युग में समाचार से लेकर मनोरंजन तथा अध्ययन को भी आन लाइन कर दिया है!

पुस्तक कोई खरीदता नहीं सब कुछ सुलभ है एक मोबाइल के

मध्यम से आन लाइन गोष्ठी सम्मेलन, वर्क फ्रॉम होम आदि कि नव संस्कृति को जन्म दिया है!

आन लाइन से कोई भी व्यवहारिक कार्य करने के लिए दो आवश्यक श्रोत का होना आवश्यक है एक बैंक मे खाता हो दूसरा मोबाइल, कंप्यूटर, या टेबलेट्स,मोबाईल का होना आन लाइन संस्कृति के उद्भव विकास से सुविधाएं बढ़ी है जैसा कि हर नए वैज्ञानिक अविष्कार कि लाभ हानियाँ होती है ठीक उसी प्रकार आन लाइन का प्रयोग भी हानि लाभ के सैद्धांतिक दोष से मुक्त नहीं है!


सोसल मिडिया के प्रयोग मे आन लाइन गेम, आन लाइन रिश्ते का निर्माण बिना कि ठोस आधार के सिर्फ आन लाइन से वैवाहिक सम्बन्ध समाज को अक्सर पीड़ा और दर्द ही देते है!

आन लाइन सुविधाएं भागम भाग के जीवन मे समय कि बचत करता है तो आपके पसंद को सीमित करता है, आन लाइन अपराध को भी जन्म देता है साईबर ठगी इसका ज्वलंत उदाहरण है!

आन लाइन अनाप सनाप सूचनाओं एवं संदेशो से समाज को भ्रमित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है!

आनलाइन से समाज और संसार को लाभ भी बहुत है किसी के अंदर यदि कोई प्रतिभा है तो आनलाइन युग पूर्व उसे अपनी प्रतिभा समय समाज मे स्थापित करने मे संघर्ष करते करते कभी कभी जिंदगी बीत जाती थी आन लाइन युग मे अपनी प्रतिभा को विडिओ द्वारा, इंस्टाग्राम द्वारा, फेसबुक द्वारा सोसल मिडिया पर प्रस्तुत कर अल्प समय मे ही लोक प्रिय बनने का असीमित अवसर उपलब्ध है स्थिति यहां तक है कि बच्चे बूढ़े जवान युवा किशोर महिलाए बेटियां सभी अपनी प्रतिभा हुनर को सोसल मिडिया पर आन लाइन प्रेषित कर लोकप्रिय तो हो रहे रही है आय भी अर्जित कर रहे!

आनलाइन संस्कृति का नकारात्मक पक्ष यह है कि समाज कि बौद्धिक क्षमता शारीरिक क्षमता का ह्रास हो रहा है जिसके कारण भावी पीढ़ियों के मनसिक एवं शारीरिक स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ने कि सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है!

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!! 

Monday, 28 September 2026

ऑनलाइन - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

ऑनलाइन - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
 
आज ऑनलाइन का बोलबाला है।
ऑनलाइन बड़ा निराला है।
जब कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या व्यक्ति किसी कंप्यूटर नेटवर्क या इंटरनेट से जुड़ा होता है, वह ऑनलाइन कहलाता है। 
दुनिया के कोने-कोने की जानकारी, ऑनलाइन से पाया जाता है।

आँख खुलती नहीं, हमारा हाथ जाता है मोबाइल पर।
अपनी फोटो पर लाइक और कमेंट देख, मुस्कान आता है चेहरे पर।
हम आज ऑनलाइन की दुनिया में जी रहे हैं।
ऑनलाइन खरीदारी, ऑनलाइन व्यापार, ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
अब दफ्तर जाने की जरूरत नहीं, घर से काम हो जाता है।
मनुष्य अपनी 
सुविधानुसार कार्य करता, समय भी बच जाता है।
बीमार व्यक्ति, ऑनलाइन परामर्श पा जाता है।
कई चिकित्सकों की सलाह, वह ले पाता है।
हर सुविधा मनुष्य, घर बैठे पा रहा।
ऑनलाइन से मानव उन्नति कर रहा, सफलता की सीढ़ी चढ़ रहा।
ऑनलाइन छात्र पढ़ाई करते, होते हैं सफल।
छात्र प्रगति करते, बढ़ता उनका मनोबल। 
किसी भी चीज की अति, बड़ी बुरी होती है।
ऑनलाइन के प्रयोग में, कुछ सावधानियां रखनी जरूरी है।
तुरंत विश्वास न करें, पूरी छानबीन करें‌।
विज्ञापनों पर न जाए, 
खरीदने के पहले जांच-पड़ताल करें।
ज्यादा ऑनलाइन रहना, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। 
आँख पर असर पड़ता, सर दर्द, गर्दन, पीठ के दर्द का कारण है।
ऑनलाइन ठगी और धोखा घड़ी के शिकार हम होते हैं। 
हम ऑनलाइन की दुनिया में इतना खो जाते हैं, व्यक्तिगत रिश्ते कमजोर होते हैं।
बार-बार हम मोबाइल देखते, एकाग्रता हमारी कम होती।
गाड़ी चलाते समय मोबाइल का उपयोग करने से दुर्घटना होती।
ऑनलाइन पर ज्यादा निर्भर न रहे, आमने-सामने होकर बातें करें। 
कभी-कभी चिट्ठी लिखे, केवल मोबाइल पर मैसेज न करें।
मोबाइल के दोस्त काम कम आते हैं, अपने रिश्तेदार ज्यादा।
व्हाट्सएप, फेसबुक से ज्यादा अपना रिश्ता हमें संभालना है, खुद से करो यह वादा।
कभी-कभी विज्ञापन में जो दिखता है, वह सही नहीं होता।
जब सामान घर आता कभी-कभी वह विज्ञापन जैसा नहीं होता।
ऑनलाइन से पढ़ाई करो, अपना ज्ञान बढ़ाओ।
अच्छी बातें सीखो, 
समाज में नाम कमाओ।
ऑनलाइन रहें, मगर आँख मूँद कर विश्वास न करें।
अपना विवेक का उपयोग करें, तभी पांव आगे धरें।
 
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
West Bangal 

आनलाइन - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 

आनलाइन - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर 

आनलाइन सुविधाओं से
हर सुविधाएं मिल जाती है ।
पैसों की बैंकिंग सेवाओं का
लेन देन आनलाइन होता है ।

आनलाइन शापिंग होती है
पीज़ा वरगर भी आ जाता है ।
खाना जो भी खाना हो सब
आनलाइन ही आ जाता है ।

फेसबुक वाट्सएप गूगल हो
फायदा नुकसान तो होता है ।
चलाने वाले के ऊपर है
क्या उससे हासिल करता है ।

सोशल मीडिया की तकनीक से
घर बैठे ही बहुत हासिल होता है ।
वाट्सएप के माध्यम से सभी को
आनलाइन सब मिल जाता है ।

सारा सच है मोबाइल के माध्यम
फेसबुक वाट्सएप गूगल से जुड़ते हैं।
यूट्यूब इंटरनेट से भी जुड़कर
मोबाइल से हासिल कर सकते हैं ।

साहित्य के क्षेत्र में साहित्यकार
आनलाइन कवि सम्मेलन करते हैं ।
आडियो वीडियो टाइप कविता
फेसबुक वाट्सएप में भेजते हैं ।

3000 आनलाइन कवि सम्मेलनों में 
10000 सम्मान पत्र पाये है ।
मैंने तो आनलाइन सम्मेलनों में 
समय के साथ सम्मान पाते हैं।

सारा सच है आनलाइन सभी
आज कल काम आसान होते हैं ।
आनलाइन सम्मान आ जाते
ऐसे कवियों को फायदा होते हैं ।

आनलाइन मेरे सम्मान आते थे 
साहित्य साथी मजाक उड़ाते थे।
मुक्त होगी जब खुद बने  तब 
बात समझ लो पाये था।

इंटरनेट के माध्यम से लेन देन
काम सभी मोबाइल से होते हैं।
बैंकों में पैसे जमा हो जाते हैं
बिजली के बिल भी भरे जाते हैं।

आनलाइन शापिंग भी होती है
कहीं से भी कोई सामान आ जाता है।
सारा सच आने जाने की जरूरी नही 
आनलाइन पैसा भी चला जाता है ।

गलत काम जो करते हैं
वो लोगों को झूठा फसाते हैं ।
दो नंबर का काम भी करते हैं
नुक़सान सभी को पहुंचाते हैं ।

  महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
   जबलपुर म प्र

आनलाइन - काव्य शिरोमणि वरिष्ठ कवि

आनलाइन - काव्य शिरोमणि वरिष्ठ कवि
  *****
ऑनलाइन की दुनिया निराली, 
दूरियां लगती छोटी सी प्याली ।

घर बैठे संसार से जुड़ जाते, 
पल में संदेश कहीं पहुंचाते ।

ज्ञान का सागर  सामने आता, 
हर प्रश्न का तुरंत मिल जाता। 

पढ़ना हो  या  कुछ भी सिखलाना, 
ऑनलाइन ने सरल किया जमाना। 

 देश - विदेश से खबरें है मिलती, 
 नई-नई जानकारियाँ से खिलती। 

 व्यापार  हो  या हो सुंदर पढ़ाई, 
 ऑनलाइन ने तुरंत राह दिखाई।

 पर  इतना  भी  ध्यान  रहे भाई, 
 आभासी दुनिया सच नहीं भाई। 

 रिश्तों  की  गर्माहट  मत  खोना, 
 अपनों से संवाद कभी मत रोना। 

 मोबाइल को मालिक मत बनाना, 
 समय को यूँ  ही व्यर्थ न गँवाना।

तकनीक बने हैं जीवन की साथी, 
तभी बनेगी राह सुखद की साथी। 

 ऑनलाइन से ज्ञान को बढ़ाएं,
 पर  जीवन  में मानवता लाएं। 

 विज्ञान  तभी  सुंदर कहलाए,
 जब इंसान को  इंसान बनाए।

 ऑनलाइन जग से जुड़े जरूर,
 पर  अपनेपन  से नहीं  हो दूर।

 पर   उपकार   कुशल   है  मेरे, 
 कितना समझाऊं औरों को तेरे।

 ना  जाने  संवाद  कहां  से आ जाए, 
 हो सकता है,सुखद संवाद आ जाए।

 कवी “सुरेश कंठ “ का  यही  है कहना, 
 हर समय मोबाइल  को पास  ही रखना।
                जयहिंद 
                 *****
 रचयिता :- काव्य शिरोमणि वरिष्ठ कवि
 “सुरेश कंठ “ अररिया बिहार। 
        मो० 99312 30828


नाम - काव्य शिरोमणि 
     वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ,
    बथनाहा,अररिया बिहार

युद्ध नहीं बस अब विश्व शांति चाहिए - ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

 युद्ध नहीं बस अब विश्व शांति चाहिए - ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

(अंतर्राष्ट्रीय विश्व शांति दिवस-विशेष)

युद्ध नहीं दुनिया-भारत को,ये विश्व शांति चाहिए।
काफी हो चुका बड़ देशों में,आगे रुकना चाहिए।।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर,सब को शांति चाहिए।
किसी भी कीमत पर देशों,में अशांति ना चाहिए।।

चार छः देशों में अहं आगे,कैसी ये मची तबाही है।
शहरों की सुंदरता बिगड़ी,ये खंडहर ही गवाही है।।

जहाँ भी देखें वहीं मची है,चारों तरफ ये तबाही है।
अहं और दादागिरी से हो,रही यह भारी तबाही है।।

युद्ध नहीं दुनिया-भारत को,ये विश्व शांति चाहिए।
काफी हो चुका बड़ देशों में,आगे रुकना चाहिए।।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर,सब को शांति चाहिए।
किसी भी कीमत पर देशों,में अशांति ना चाहिए।।

जानमाल व्यवसाय गृहस्थी,परिवारों की बर्बादी है।
स्त्री पुरुष बूढ़े बच्चे जवाँ,से खाली ये आबादी है।।

अच्छे खासे मकां इमारत,की रोज होती बर्बादी है।
बस केवल खूनी एक तमाशा,शहनाई न शादी है।।

युद्ध नहीं दुनिया-भारत को,ये विश्व शांति चाहिए।
काफी हो चुका बड़ देशों में,आगे रुकना चाहिए।।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर,सब को शांति चाहिए।
किसी भी कीमत पर देशों,में अशांति ना चाहिए।।

मानवता भी कराह रही है,ऐसा ये अहं है टकराया।
बड़े-बड़े शहरों को इसी,युद्ध ने खंडहर है बनाया।।

चाहे हो ईरान-अमेरिका-इजराइल,खौफ है छाया।
या फिर हो रूस-यूक्रेन,चार वर्षों से थम न पाया।।

युद्ध नहीं दुनिया-भारत को,ये विश्व शांति चाहिए।
काफी हो चुका बड़ देशों में,आगे रुकना चाहिए।।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर,सब को शांति चाहिए।
किसी भी कीमत पर देशों,में अशांति ना चाहिए।।

सेना सैनिक एवं नागरिक,जंग लड़ रहे हैं यूक्रेन में।
रूसी फौजें कहीं ना कहीं,कहर बरपाते यूक्रेन में।।

इजराइल-अमेरिका मिल,लड़ रहा अकेले ईरान में।
कोई नहीं जंग में पीछे है,सभी डटे युद्ध मैदान में।।

युद्ध नहीं दुनिया-भारत को,ये विश्व शांति चाहिए।
काफी हो चुका बड़ देशों में,आगे रुकना चाहिए।।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर,सब को शांति चाहिए।
किसी भी कीमत पर देशों,में अशांति ना चाहिए।।

तोप टैंक मिसाइल चापर,फाइटर प्लेन गिराते बम।
रूस-यूक्रेन दोनों अड़े-खड़े,एक दूजे से न हैं कम।।

न ही अमेरिका-इजराइल,और ना ही ईरान है कम।
एक दूजे पर बरस रहा है,रुक-रुक कर गोला बम।।

युद्ध नहीं दुनिया-भारत को,ये विश्व शांति चाहिए।
काफी हो चुका बड़ देशों में,आगे रुकना चाहिए।।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर,सब को शांति चाहिए।
किसी भी कीमत पर देशों,में अशांति ना चाहिए।।

हर रूसी एक्शन का देता,यूक्रेनी लड़ाकू हैं जवाब।
आज तक टीवी न्यूज़ के,युद्ध कवरेज का जनाब।।

देख रहा या जो देखा था,वही पंक्तिबद्ध सब साब।
कुछ गलत लिखा है यदि,तो करना मुझको माफ।।

युद्ध नहीं दुनिया-भारत को,ये विश्व शांति चाहिए।
काफी हो चुका बड़ देशों में,आगे रुकना चाहिए।।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर,सब को शांति चाहिए।
किसी भी कीमत पर देशों,में अशांति ना चाहिए।।


सर्वाधिकार सुरक्षित ©®

रचयिता :
*ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.
(शिक्षक कवि लेखक साहित्यकार समीक्षक समाजसेवी)