मानव और पर्यावरण संरक्षण " - नाम - एम. एल. नत्थानी
" अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच "
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( मेरी कलम मेरी पहचान )
सत्र :- 353
प्रतियोगिता का विषय -
( पर्यावरण, भविष्य, सिंगलयूज प्लास्टिक, प्रतिबंध, भागीदारी, संरक्षण, जिम्मेदारी, सुरक्षा )
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विधा - पद्य ( कविता )
कविता का शीर्षक -
" मानव और पर्यावरण संरक्षण " - नाम - एम. एल. नत्थानी
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आधुनिक जीवनशैली में
मानव ने सुख चैन खोया
प्रकृति से खिलवाड़ कर
पर्यावरण संरक्षण खोया
जिंदगी के हिसाबों जैसी
ऋतुएं हिसाब करती है
पर्यावरण असुंतलन से ही
प्रकृति खराब करती है
भूगर्भ की कोख में लावा
सदा ही प्रवाहित होता है
पर्यावरण का असंतुलन
जैसा ही कदाचित होता है
भूस्खलन और हिमपात से
प्राकृतिक आपदा होती है
संसाधनों के दोहन से ही
मानव पर विपदा होती है
कभी मैदानी भूभागों पर
प्रचंड गर्मी तो बरसती है
लेकिन बर्फीले पहाड़ों पर
सर्द हवाएं तो मचलती है
ऋतुओं का लेखा-जोखा
मनुष्य का बही - खाता है
कर्म बीज की खाद जैसी
पर्यावरण का फल पाता है
धरती मां की अश्रु धारा को
मानव समझ नहीं पाया है
शायद खुद दुख सहकर भी
प्रकृति संरक्षण को निभाया है
पद्य ( कविता ) के रचनाकार का विवरण -
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नाम - एम. एल. नत्थानी


उपशीर्षक :
प्रकृति की पुकार — भविष्य की ज़िम्मेदारी
न प्लास्टिक का अत्याचार हो, न प्रकृति पर वार हो,

