Monday, 5 October 2026

चुनाव - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर मध्यप्रदेश

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी 
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
विषय.. चुनाव - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर मध्यप्रदेश 
कविता...

चुनाव


देश के इतने बड़े लोकतंत्र में 
अक्सर चुनाव होते रहते हैं ।
आचार संहिता लगने से ही 
 जनता के काम रूक जाते है ।

सरकारी आफिसों के अफसर
बाबूओं को बहाना मिल जाता है ।
काम भले नही करना चाहते हैं
आचार संहिता का बहाना होता है ।

चुनाव लोकतंत्र की प्रक्रिया है
नेता जनता के प्रति निधि होते हैं।
चुनाव में जीतकर,पंच सरपंच, 
  पार्षद विधायक सांसद बनते हैं।

लोकतंत्र के नाम से सबको
बोट डालने की स्वतंत्रता होती है
जो नाम की ही बस रहती है
सच जनता की मजबूरी रहती है।

चुनाव लड़ने में नेता का
कुछ माप दंड जरूरी है ।
शिक्षा, साफ सुधरी छवि
नेता की होना जरूरी है ।

सांसद या विधायक हो
जनता ही इनको चुनती है ।
चुनाव जीतने के बाद में
फिर मनमानी इनकी होती है ।

राजनैतिक पार्टियां हमेशा
अपना उल्लू सीधा करती हैं ।
सत्ता की कुर्सी पाने चुनाव में
हर हथकंडे इसमें अपनाती है ।

देश के चुनाव में सभी पार्टियां
सत्ता की कुर्सी पाने लड़ती हैं ।
सारा सच है पूरा जोर लगाकर
चुनाव प्रचार पर जोर देती हैं ।

नेता चुनाव में भले लड़ते हैं
हार जीत भी होती रहती है ।
छींटा कसी आपस में करते
नेताओं की मजबूरी होती है ।

सत्ता में जो भी पार्टी आती है
अपने हिसाब से कानून बनाते हैं ।
सारा सच है नेता बनने में इनको
शिक्षा के मापदंड क्यों नहीं होते हैं ।

अनपढ़ भी सांसद, विधायक हैं
मंत्री में शिक्षा का मापदंड नही है ।
शिक्षा से कोई अवरोध न आये
ऐसा कानून भी बनाते ही नही हैं ।

किसी प्रदेश का चुनाव हो देश में
राजनीति सब आपस में करते हैं ।
हाथ जोड़ कर बोट मांगते हैं
जाति धर्म की राजनीति करते हैं।

सांसद विधायक मंत्री बनने में
बी ए की शिक्षा होना जरूरी है ।
सारे सच की बात कहूं चुनाव में
उच्च शिक्षा का मापदंड जरूरी है ।

खानदानी राजनीति चलती है
पिता के बाद पुत्र नेता बनते है ।
कोई कोई तो पति-पत्नी पुत्र बहू
पूरा परिवार चुनाव में खड़े होते हैं।

चुनाव जो पार्टी हार जाती है
बोट चोरी का इल्ज़ाम लगाते हैं ।
कुछ पार्टियां ए टी एम मशीन में
छेड़ छाड़  का आरोप लगाते हैं ।

संसद में जो कानून बने उसमें
जनता का बहुमत होना चाहिए।
आरक्षण एस सी एस टी एक्ट 
यूजीसी कानून खत्म होना चाहिए।

एस सी एस टी एक्ट लगाकर 
लाखों रुपया सरकार देती है ।
दलालों के माध्यम से ही तो
आपस में राशि बंट जाती है ।

एम सी एस टी एक्ट यूजीसी 
कानून से सरकार का विरोध है ।
सवर्ण का पूरे देश आन्दोलन 
और जमकर विरोध हो रहा है ।

आरक्षण एस सी एस टी एक्ट 
यूजीसी कानून समाप्त होना चाहिए।
ये कानून समाप्त हुए नहीं तो सवर्णों  
के विरोध से सरकार बदल जायेगी 

महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
    जबलपुर म प्र

विश्व पर्यटन दिवस - सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह

विश्व पर्यटन दिवस - सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह

           (27 सितंबर को हर साल) 
           (कविता/काव्य तरंग)

विश्व पर्यटन दिवस के शुभ अवसर पर हमारी ओर से सभी पर्यटकों को ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं एवं अशेष बधाइयां।
           
27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है हरेक साल,
पर्यटन स्थल आय का बड़ा स्रोत है,  कई देश होते हैं मालामाल।
देश विदेश से पर्यटक आते जाते रहते हैं, घूमने फिरने के लिए,
सर्दियों में गर्म इलाके और गर्मियों में लोग घूमते हैं नैनीताल।
27 सितंबर को...........

जिस देश में पर्यटकों को मिलती सुरक्षा और अधिक सुविधा,
वहां आने जाने को लेकर नहीं होती मन में कोई भी दुविधा।
लोग सैर सपाटे और अपनी छुट्टियां बिताने के लिए आते हैं,
प्रकृति प्रेमियों के मन में आता है पर्यटन का सुंदर ख्याल।
27 सितंबर को...........

पर्यटन से मानव जीवन में आता है बहुत ही बड़ा बदलाव,
तन मन से दूर होता है तनाव, सकारात्मक होता स्वभाव।
जिंदगी में एक नई उमंग आ जाती, खुशियां बढ़ जाती हैं ,
मन में जन्म नहीं लेते हैं जल्दी कभी उल्टे सीधे सवाल।
27 सितंबर को..........

इसके लिए लोग बहुधा पर्वतीय क्षेत्रों को पसंद करते हैं,
अवसर मिलने पर, योजना बनाकर घर से निकलते हैं।
पर्यटन मंत्रालय के ऊपर बहुत जिम्मेवारी रहती इसकी,
पर्यटन विभाग करता, सारे पर्यटकों की पूरी देखभाल।
27 सितंबर को............

प्रमाणित किया जाता है कि यह रचना स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसका सर्वाधिकार कवि/कलमकार के पास सुरक्षित है।

सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
नासिक (महाराष्ट्र)

मतदान - संजय वर्मा'दृष्टि'

मतदान - संजय वर्मा'दृष्टि'
 
मतदान करने सबको जाना है
सबके ये बातें समझाना है

मतदान हमारा मूल अधिकार है
लोकतंत्र को ये बडा त्यौहार है

पर्ची अन्य विकल्प साथ ले जाना है
मतदान करने का हक़ भी पाना है

उत्साह जागरूकता मन मे लाना है
शत प्रतिशत हो मतदान ये दिखाना है

मतदान से लोकतंत्र को मजबूत बनाना है
क्षेत्र को खुशहाली व उन्नतिशील बनाना है 

संजय वर्मा'दृष्टि'
मनावर(धार)मप्र

कसम की कसम - जौली अंकल

कसम की कसम - जौली अंकल

हमारे देश भारत में खानपान की अद्भुत विविधता है। कोई सुबह उठकर गरमा-गरम परोंठो, समोसों का शौकीन है, तो कोई दोपहर में कुरकुरे डोसे का दीवाना। लेकिन अगर थोड़ा गहराई से देखें, तो भारत में सुबह से लेकर रात तक सबसे ज़्यादा कोई चीज़ चाव से खाई जाती है, तो वह है 'कसम'। बचपन में बात-बात पर विद्या माता की कसम या मम्मी-पापा की कसम खाकर बड़े होने की यह आदत उम्र के साथ छूटती नहीं, बल्कि और ज़्यादा वीआईपी और राजसी हो जाती है। वार्ड पार्षद और विधायक से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक, जब भी कोई नई कुर्सी संभालता है, तो सबसे पहले एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह होता है। नए कड़क कपड़े पहनकर, ईश्वर और संविधान को साक्षी मानकर ऐसी कसम खाई जाती है मानो आज से ही जनता के बैंक खाते में खुशियों की लॉटरी लगने वाली है और नेता जी अपना हर पल जनहित में ही गुज़ारेंगे।

अफ़सोस की बात यह है कि कुछ नेता जी कसम का वह सरकारी कागज़ इतनी हड़बड़ी में पढ़ते हैं, मानो पीछे उनकी ट्रेन छूट रही हो। भारी-भरकम शब्दों को ठीक से बोल भी नहीं पाते। इसके बाद जो महारथी इसे शुद्ध-शुद्ध पढ़ भी लेते हैं, वे राजभवन के मुख्य द्वार से बाहर निकलते ही अपनी चमचमाती गाड़ी की एसी की ठंडी हवा खाते ही सब कुछ भूल जाते हैं। टीवी पर जो चेहरा अत्यंत मासूम और विनम्र लग रहा था, दफ़्तर पहुंचते ही बड़े और कड़क मालिक में तब्दील हो जाता है। ऐसा लगता है कि वह पवित्र कसम सिर्फ उस एक दिन मुफ्त की तालियां बटोरने के लिए थी, ज़िंदगी भर निभाने के लिए नहीं। चुनाव जीतने से पहले जो नेता जी जनता के सामने पूरी तरह झुककर हाथ जोड़ रहे थे, कुर्सी पर बैठते ही जनता को पहचानने से भी इंकार कर देते हैं। लोकतंत्र के इस रंगमंच पर कसम की गरिमा हर पाँच साल में टूटती है। जनता हर बार एक नई कसम पर भरोसा करती है और बदले में सिर्फ कोरे आश्वासन पाती है। कसम खाने को हमारे देश में ऐसा नुस्खा मान लिया गया है जिससे काम पूरा करना हो या घोटाला दबाना, हर मर्ज़ का इलाज मुमकिन है। विकसित देशों में नेताओं के वादे कानूनी दस्तावेज़ की तरह होते हैं जहाँ कसम तोड़ने पर सीधे कुर्सी गँवानी पड़ती है, लेकिन हमारे यहाँ कसम खाना एक ऐसी कला बन चुकी है जिसमें जितना बड़ा कलाकार, उसकी कुर्सी उतनी ही सुरक्षित।

जौली अंकल के अनुसार इस भयंकर भूलने की बीमारी का एक बड़ा जादुई इलाज मौजूद है। जैसे हम अपने घरों में शादी या अवॉर्ड्स की तस्वीरें फ्रेम करवाकर लगाते हैं, वैसे ही हर मंत्री और नेता को अपने शपथ पत्र की प्रतिलिपि को एक शानदार फोटो फ्रेम में जड़वाना चाहिए। इस फ्रेम को उनके सरकारी दफ़्तर की मुख्य दीवार पर और घर के ड्राइंग रूम में सोफे के ठीक सामने टांग दिया जाए। जब भी वे मखमली सोफे पर बैठकर चाय की चुस्की लें या किसी फाइल पर दस्तखत करने के लिए पेन उठाएं, तो वह कसम सीधे उनकी आँखों में आँखें डालकर उन्हें घूर रही हो। यह चमचमाता फ्रेम उन्हें हमेशा याद दिलाता रहेगा कि कुर्सी की असली गरिमा क्या है और करोड़ों उम्मीदों से भरे वादों की वास्तविक कीमत क्या है।

इस फ्रेम के लगने से नेताओं की अंतरात्मा रोज़ सुबह एक बार ज़रूर जागेगी और उन्हें याद दिलाएगी कि वे जनता के मालिक नहीं, बल्कि चुने गए सेवक हैं। जब भी कोई वीआईपी मेहमान दफ़्तर आएगा, तो सबसे पहले उस कसम के फ्रेम को देखेगा, जिससे नेता जी पर नैतिक दबाव बना रहेगा। यह लोकतंत्र का ऐसा आईना होगा जो नेता जी को उनकी असलियत दिखाता रहेगा। राजनीति में जब तक ऐसा कड़ा और रचनात्मक बदलाव नहीं आएगा, तब तक कसम सिर्फ एक रस्म बनी रहेगी और जनता खुद को ठगा हुआ महसूस करती रहेगी।

आखिर में देश के सभी नेताओं से विनती है कि आज तक जो हुआ उसे भूलकर आज यह कसम खाओ कि पद संभालते समय जो कसम खाई थी, उस कसम की कसम कि उस कसम को आज के बाद कभी नहीं भूलेंगे। जब आप अपनी खाई हुई कसम के हर एक शब्द को अपनी मेहनत से सच करके दिखाएंगे और ईमानदारी से काम करेंगे, तभी इस देश की आम जनता के चेहरे पर सच्ची मुस्कान वापस आएगी।

- जौली अंकल

Sunday, 4 October 2026

पोषण दिवस — आइए मिलकर खुशियाँ बाँटें

पोषण दिवस — आइए, मिलकर खुशियाँ बाँटें 🌸

इस बुधवार को बादशाहपुर आंगनवाड़ी में पोषण दिवस के अवसर पर लगभग 200 महिलाओं के लिए गुड़-चना एवं केले वितरित करने की एक छोटी-सी पहल की जा रही है।

हमारा उद्देश्य केवल भोजन बाँटना नहीं, बल्कि पोषण, स्वास्थ्य और जागरूकता का संदेश हर परिवार तक पहुँचाना है।

हमारा विश्वास है कि समाज में बदलाव हमेशा बड़ी चीज़ों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सहयोग और नेक प्रयासों से शुरू होता है। 🙏

यदि आप भी इस पहल का हिस्सा बनना चाहते हैं और गुड़-चना, केले या किसी अन्य रूप में सहयोग करना चाहते हैं, तो कृपया संपर्क करें:

आपका छोटा-सा सहयोग किसी के लिए
पोषण, सम्मान और मुस्कान का कारण बन सकता है। 

आइए, इस पोषण दिवस पर मिलकर एक ऐसा संदेश दें—
“हर महिला स्वस्थ, हर परिवार सशक्त।”