Tuesday, 11 August 2026

*‌सीख

 *‌‌सीख : डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

"ऐसे जियो जैसे कल ही मरना हो।
ऐसे सीखो जैसे हमेशा जीना हो।"
गाँधी जी के ये वचन, हमें अमल में लाना चाहिए। 
सीखने की उम्र नहीं होती, 
याद रखना चाहिए।
सीखना एक सतत प्रक्रिया है,
मृत्यु पर्यंत चलता है। 
नित-नित जो नए सीख लेता,
उसका व्यक्तित्व निखरता है।
एक बच्चे से भी हम कभी कुछ सीख लेते, कभी परिस्थितियाँ हमें सिखाती हैं।
सीखने से मानव की, 
याद्दाश्त बढ़ती जाती है।
"सीखना कभी मन को  थकाता नहीं है।" लिओनार्डो द विंची ने बताया।
"अज्ञानी होना इतनी शर्म की बात नहीं है, जितना सीखने की इच्छा न रखना।" बेंजामिन फ्रैंकलिन ने समझाया। 
"सीखने की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे आपसे कोई छीन नहीं सकता।" बी.बी. किंग के वचन।
अच्छी बातें सदा सीखो, लगाकर तन और मन।
प्रभु श्री राम से,
मर्यादा और धीरज सीखो,
रामानुज भरत से सीखो भ्रातृत्व प्रेम और त्याग। 
हनुमान जी ने अशोक वाटिका उजाड़ा, सोने की लंका में लगा दी आग।
प्रभु हनुमान सिखाए हमें, 
निश्छल भक्ति और पूर्ण समर्पण।
माता सीता ने हर हाल पति का साथ निभाया, हम सबके लिए बनीं उदाहरण।
रावण की कहानी सिखलाती, 
अहंकार से किसी का भला नहीं होता। 
दुर्योधन यह सीख दे गया, 
गलत कर्म का परिणाम सदा गलत ही होता।
सीखना है तो राजा हरिश्चंद्र से सीखो, सत्य का राह कभी मत छोड़ो। 
परिवार में फूट न होने दो,
प्रेम का रिश्ता सबसे जोड़ो।
सच्चा प्रेम किया मीरा जी ने, समाज के तानों का परवाह नहीं किया। 
सच्चा प्रेम निस्वार्थ होता है, 
मीरा जी ने यह सीख दिया।
सीखने से मस्तिष्क 
स्वस्थ रहता, आनंद की अनुभूति होती।
सीखने से मन सक्रिय रहता है, उदासी महसूस नहीं होती।
हर स्थिति में अडिग रहना, कर्तव्य से न विचलित होना,
पर्वत हमें सिखलाता। 
पतंग को खुद के कटने का डर रहता है, फिर भी आसमान में उड़ता जाता।
चाँद और चकोर की लोक कथा, सच्चा प्यार दर्शाती है। 
प्रेम में कोई छल न करना,
हमें सीख दे जाती है।
धरती से धीरज सीखो, और सीखो क्षमाशीलता।
नित नित जो नए हूनर सिखता, उसका व्यक्तित्व निखरता।
फूल को कोई तोड़े, उसे परवाह नहीं रहता।
भेदभाव कभी मत करना, 
यहीं सीख हमें फूल से मिलता।
कछुआ और खरगोश की कहानी 
सिखलाती, बच्चों, अहंकार कभी मत करना।
कितनी भी बाधाएं आयें, कदम सदा आगे ही रखना।
सीखने के लिए अनेकों उदाहरण है, बस हमें अच्छी बातें सीखना होगा। 
अपने भीतर की बुराइयों को त्याग, अच्छे कर्म करना होगा।

जिन्दगी


अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 

       जिन्दगी  : महाकवि डा अनन्तराम चौबे

जीवन और मृत्यु के बीच 
जिन्दगी इम्तिहान लेती है ।
सुख दुख भी आते जाते हैं
ग़म और खुशी भी मिलती है ।

भागती इस जिन्दगी का 
ठिकाना कहां पर होता है ।
इंसान का जीवन यों ही 
चंचल चलायमान होता है । 

जीवन और मृत्यु के बीच 
कठपुतली सा जीवन चलता ।
मोह माया के जाल में फंसकर 
जीवन सभी का चलता रहता है ।

जिन्दगी मिली है जीने को
खुशियों से हंसकर जीलो।
जीवन मिला है जीने को
सभी  से हिल मिलकर जीलो ।

खुशी और गम आते जाते हैं
पल पल में समय बदलते हैं ।
कल कब ये किसने देखा है
कल होगा उससे भी मिलते हैं ।

जन्म और मृत्यु के बीच में
जीवन सभी का चलता हैं ।
गम, खुशियां साथ में चलती 
जीवन भी साथ में चलता है ।

माता पिता भाई बहिन से
एक घर परिवार बनता है ।
जिन्दगी की राहें चलने को
इनसे मिलकर ही चलता है ।

माता पिता की शिक्षा पाकर
जीवन की राहें संभलती है ।
बच्चों की खुशियों से माता,
पिता को खुशियां मिलती है ।

हंसी खुशी से जी लो जिन्दगी
हर पल खुशियां मिलती हैं ।
तन मन को भी खुश रखना है
जिन्दगी में खुशियां मिलती हैं ।

भागती जिंदगी का ठिकाना 
जीवन मृत्यु के बीच में होता है।
हर इंसान का जीवन  देखो
भ्रमजाल में भटकता रहता है। 

इन नरिश्तो के भंवर जाल 
यहां वहां भटकता रहता है ।
घर द्वार के ऐशो आराम में
सब कुछ ही भूला रहता है ।

माता पिता की सेवा कर लो
दुखी कभी न उनको करना ।
माता पिता से जो मिला है
उसी से जिन्दगी में खुश रहना 

ज़िन्दगी के इस सफर में
दान पुण्य भी कुछ कर लो ।
समय निकाल कर  अपना
भगवान भजन भी कुछ कर लो  

न कुछ तेरा न कुछ मेरा
बस चिड़िया रेन बसेरा है ।
पिंजड़े से पंछी उड़ जायेगा
ये तो मोह माया का डेरा है ।

शीर्षक - जिंदगी कठिन है ।

 शीर्षक - जिंदगी कठिन है ।

जिसके मन मंदिर बसे 
                 वह कितना सुंदर होगा 
जो सवेरे योग करे
                वह कितना निर्मल होगा 

मन में कुछ भ्रम रहे 
                   उसे मन से त्याग करें 
सुबह सवेरे ध्यान से ही 
                    शरीर को स्वस्थ करें 

बड़े-बड़े ऋषि मुनि कहते हैं 
              हृदय से इसे स्वीकार करें 
दिल बिल्कुल निर्मल रहे 
          सभी से प्यार - मोहब्बत करें 

बड़े-बड़े योगी का भी कहना 
                    परम ज्ञान इसी में है 
करें योग मस्त रहें
                   परम त्याग इसी में है

 समय प्रति दिन व्यस्त रहेगा 
                  इसमें कोई संदेह नहीं
 फिर भी कुछ समय निकालें
           योग करने से पीछे हटें नहीं 

कहते हैं कवि "  सुरेश कंठ "
          जिंदगी बहुत कठिन है प्यारे 
ईश्वर को कभी भूलें नहीं 
                  यही मूल मंत्र है हमारे
 
          —--   समाप्त   —--
 रचयिता - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
       कोशी शिविर बथनाहा अररिया, 

Monday, 10 August 2026

जिन्दगी

जिन्दगी  : गोरक्ष जाधव

जिंदगी का फलसफा न समझ सका कोई...

कभी ढलान तो कभी चढ़ाव है ज़िंदगी,
कुछ ही दिनों का पड़ाव हैं जिंदगी,
अक्सर हम जीने  की कवायत में रहते है,
कभी मिलन तो कभी जुदाई है जिंदगी।

एक आँख में आँसू,एक आँख में हँसी हैं जिंदगी,
कभी खुशी तो कभी गम है जिंदगी,
एक सिक्के के दो पहलू है जीवन के,
कभी चित है तो कभी पट है जिंदगी।

कभी शक तो कभी यकीन है जिंदगी,
कभी शिकवा तो कभी खुशामद है जिंदगी,
प्रेम का वह खट्टा-मीठा स्वाद है जीवन का,
कभी बेरंग तो कभी उमंग है जिंदगी,

कभी आसान तो कभी कठिन है जिंदगी,
फूलों की ख्वाइश में काँटों पर चलना है जिंदगी,
ग्रीष्म की लू, तो कभी सुहानी पवन है,
कभी धूप तो कभी छाँव है जिंदगी।

कभी सजा तो कभी मजा है जिंदगी,
कभी सुनहरी सुबह तो कभी अतरंगी शाम है जिंदगी,
रेत-सी फिसलती है,अधूरी ख्वाइशें,
कभी तृष्णा तो कभी तृप्ति है जिंदगी।

लेकिन अपनों के साथ हसीन है जिंदगी ,
सपनों के साथ आसान है जिंदगी,
मौत से पहले जी लो हँसते-मुस्कुराते यारों,
बस इक बार ही इनायत करम है जिंदगी।

ज़िंदगी : एक अनवरत यात्रा

 ज़िंदगी : एक अनवरत यात्रा : Uzmataranum

ज़िंदगी केवल सांसों के चलने का नाम नहीं, बल्कि अनुभवों, संघर्षों, संबंधों और संवेदनाओं से निर्मित एक ऐसी यात्रा है, जिसका प्रत्येक पड़ाव हमें कुछ नया सिखाता है। मनुष्य जीवन में अनेक परिस्थितियों से गुजरता है—कभी सफलता उसका स्वागत करती है तो कभी असफलता उसे आत्ममंथन के लिए विवश करती है। वास्तव में, जीवन की सार्थकता इन्हीं विरोधाभासी अनुभवों के बीच स्वयं को पहचानने में निहित है।

आज का मनुष्य भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उसके पास सुविधाएँ तो बढ़ी हैं, किंतु मानसिक शांति और आत्मसंतोष का अभाव दिखाई देता है। दूसरों की सफलता से अपने जीवन की तुलना करने की प्रवृत्ति ने व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों का आनंद लेने से भी दूर कर दिया है। हमें यह समझना होगा कि प्रत्येक व्यक्ति की जीवन-यात्रा अलग होती है। किसी की गति को अपनी गति का मानक बनाना स्वयं के अस्तित्व के साथ अन्याय है।

ज़िंदगी का वास्तविक सौंदर्य छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करने में है। परिवार का स्नेह, मित्रों का साथ, प्रकृति की सुंदरता, अपने कार्य के प्रति ईमानदारी और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने की क्षमता—ये वे अनुभव हैं जो जीवन को भीतर से समृद्ध करते हैं। कठिनाइयाँ भी जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। वे हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक शक्ति को पहचानने के लिए आती हैं।

समय जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है। बीता हुआ कल हमारी स्मृति है और आने वाला कल हमारी कल्पना; हमारे पास वास्तव में केवल वर्तमान है। इसलिए वर्तमान को सार्थक बनाना ही जीवन की सबसे बड़ी समझदारी है।

अंततः ज़िंदगी किसी निश्चित मंज़िल का नाम नहीं, बल्कि निरंतर चलने, सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की प्रक्रिया है। जीवन की सफलता इस बात से नहीं आँकी जानी चाहिए कि हमने कितना पाया, बल्कि इससे कि हमने अपने जीवन को कितनी संवेदना, ईमानदारी और मानवीयता के साथ जिया।

*‌सीख