Sunday, 4 October 2026

UPI भुगतान का नया दौर - डॉ.नेहा बागड़ी

UPI-भुगतान का नया दौर - डॉ.नेहा बागड़ी

न नोटों का झंझट, न सिक्कों का शोर,
एक छोटे से फोन ने बदल दिया, लेन-देन का दौर।

पहले जेब टटोलते थे, खुले पैसों के लिए,
अब एक क्लिक में काम होता, सेकंडों के लिए।

ठेले वाले भैया के पास भी, अब QR लगा है,
रिक्शे वाले से लेकर, मॉल तक यही नशा है।

सब्जी लेनी हो या, चाय का उधार,
"भैया PhonePe कर दिया" खत्म हुई  तकरार।

माँ गाँव से बेटे को, पल में पैसे भेजती है,
बेटी की फीस भरने में, अब देर नहीं लगती है।

न बैंक की लंबी लाइन, न किसी का इंतजार,
अपने ही फोन में है, अपना पूरा बाजार।

पाँच रुपए हो, या  फिर हो पाँच हजार, 
पेमेंट हो गया है , जी भईया आपका बहुत-बहुत आभार।
 
युवा हो या फिर हो बुजुर्ग,
इसका भुगतान करते है सब यूजर्स।  

गाँव-गाँव तक  पहुंचा  है, डिजिटल का  ये प्रकाश ,
भारत के लोगों को पेमेंट करने का, नया हुआ एहसास ।

ये है UPI, ये  नयी रीत है,
इसी ने दिलाई समय पर जीत। 

ये सिर्फ पैसा नहीं है, ये वक्त की पहचान है,
ये भरोसे का नाम है, ये हिंदुस्तान की शान है

UPI नहीं, ये तो अपनेपन का एहसास है,
जेब में इसे रखे हुए , भारत देश का हर शख्स  है।

डॉ.नेहा बागड़ी, भिवानी (हरियाणा) (Dr.Neha Bagri)

लोकतंत्र की स्याही - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

लोकतंत्र की स्याही - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"

कलम मेरी पहचान बने,
सच की सदा आवाज़ बने,
लोकतंत्र के इस पर्व में,
हर मतदाता सरताज बने।
चुनाव नहीं बस नामांकन,
यह जनमन का अधिकार है,
हर एक मत की अपनी कीमत,
हर मत में जन-आधार है।
निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी,
निष्पक्ष रहे हर निर्णय,
आदर्श आचार संहिता बोले—
सबके लिए हो एक नियम।
न धन का लोभ, न झूठे वादे,
न भय का कोई राज रहे,
जनता अपने विवेक से चुने,
सच्चाई का ही ताज रहे।
मतदान केंद्र तक कदम बढ़ें,
उंगली पर स्याही मुस्काए,
जाति-धर्म से ऊपर उठकर,
भारत अपना मत दे पाए।
मतगणना जब निष्पक्ष होगी,
विश्वास तभी मजबूत बने,
पारदर्शिता के उजले दीपक
हर संशय को दूर करें।
धांधली की हर राह रुके,
ईमानदारी पहरेदार बने,
मुख्य निर्वाचन आयुक्त से लेकर
हर कर्मी जिम्मेदार बने।
न कोई वोट व्यर्थ हो जाए,
न कोई अधिकार छिन पाए,
लोकतंत्र की पावन धरती पर
जन-विश्वास सदा खिलखिलाए।
मेरी कलम यही लिखती है—
मत की गरिमा कम न हो,
भारत के लोकतंत्र की लौ
कभी किसी मौसम में नम न हो।
स्याही छोटी-सी उंगली पर,
अधिकार बहुत महान,
एक-एक मत से बनता है
भारत का भविष्य और विधान।
मेरी कलम मेरी पहचान,
मेरा मत मेरी आवाज़—
जागरूक मतदाता ही रखता,
लोकतंत्र का मान-सम्मान।

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab 

Saturday, 3 October 2026

आन लाइन - श्रीमती राज फौजदार

आन लाइन - श्रीमती राज फौजदार 

“आन लाइन एक नई दुनियाँ ,एक नया अहसास “आन लाइन होना, अर्थात दूरियों का का आभास न होकर हम आमने -सामने बैठ कर बात कर सकते हैं,।
           आज सभी आन लाइन हैं,एक क्लिक पर दुनियां मुट्ठी में हैं।क्या सचमुच हम जुड़ें हुए हैं?? नहीं!ई!ई!ई?
अब तो सुबह का शाम तक याद नहीं रहता कि हमारी बात भी हुई थी। पहले चिट्ठियों का जमाना था डाकिया की साइकिल की टन् -टन् सुनकर सारा मुहल्ला दरवाज़ों पर खड़ा मिलता और —---भैया हमारी है बड़े सोच विचार के साथ डाकिया जवाब देता कि -सीमा पर गये बूँढी माँ का या नई नवेली दुल्हन की आस न टूट जाय।
          उस इंतजार में कितना प्यार और एहसास हुआ करते थे।एक पत्र लिखने में पूरा जमाना और गुजरे हुए दृश्य आँखो में उतर आते थे।इसी प्रकार पढ़ने में भी एक बार पढ़कर जी नहीं भरता तो बार बार पढ़ते थे तब दूर हो कर भी कितने पास थे हम।
     माना कि आंन लाइन ने हमें बहुत कुछ दिया है, ज्ञान, दूरभाष, संदेश पल भर में,पैसा पै टी एम,फौन पे,यूं पी आई आदि जरूरत पड़ने पर तुरंत मिल जाता है, महीनों का काम दिनों में और दिनों का घंटे मिनट में हो जाता है।
   (१) आनलाइन के फायदे:-
               रोज़गार:घर बैठे मिल जाता है,घर बैठे इंटरव्यू,घर बैठे काम करना,घर बैठे घर का सामान मंगा लेना समय की बचत भीड़ भाड़ से बचाव आनलाइन आवेदन। 
बरिष्ठ नागरिकों को घर बैठे बैंकिंग सुविधाएं जरुरत की दवाइयां और आवश्यकता की बस्तुऐं मिल जातीं हैं ।
  आनलाइन के नुकसान:--
          इसने इंसान को आलसी और पंगु बना दिया है। आनलाइन साधन है साध्य नहीं साध्य तो आज भी प्रेम ही है परिवार के पास बैठना उनसे बातें करना साथ -साथ चाय पीना और भोजन साथ करना जिससे खाने बाला भी और बनाने बाला भी खिला कर खुश। इससे घर के बुजुर्गों को सबसे ज्यादा तकलीफ़ होती है।
      कहते हैं कि जब तक किसी चीज़ का एक सीमा तक उपयोग करें तब ही बह ठीक और फायदे की होती है अन्यथा घातक।
            कबीर दास जी का दोहा है:-
      “अति का भला न बोलना,अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना,अति की भली न धूप।।”

ठगी का सबसे बड़ा डर:-

नकली वेवसाइट, नक़ली लिंक,आपका खाता बंद साइबर क्राइम,आजकल भले भले इसके चंगुल में फंस रहे हैं और लाखों से हाथ धोना पड़ जाता है।
  फिजूलखर्ची जिसकी जरूरत नहीं वह भी खरीद जाता है 
बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर हो रहा है,आँखें कमजोर होना चिड़चिड़ापन सहनशीलता की कमी आज पैदा हुआ बच्चा एसी, टीवी, का रिमोट मोबाइल को जानने लग जाता है।

आनलाइन के सुरक्षित तरीके:-
(१) लिंक पर कभी भी क्लिक नकरें(बैंक कभी भी SMS में लिंक नहीं भेजता।
(२)COD से शुरू करें -पहली बार किसी नई साइट से सामान मंगायें तो Cash onDeliveryलें।
(३) UPI पिन किसी को न बताएं –पिन सिर्फ पैसा भेजने के लिए लगता है तो पहले एक दो रूपये भेजकर चैक करें।
(४) बड़ी रकम से पहले छोटी रकम से टैस्ट करें।
(५) एक ही फ़ोन में सब कुछ न रखें, बैंकिंग बाला फ़ोन अलग,सोसल मीडिया अलग रखें।

निष्कर्ष:-आनलाइन एक नदी की तरह है।तैरना आता है तो पार नहीं तो डूबने का खतरा रहता है।सामान मँगाना हो या पैसा भेजना हो सभी आँख खोलकर होश में रहकर करना चाहिए।।
             
आनलाइन रहना समझदारी से —----आफ लाइन रहना जीवन जीने रिश्ते बचाये रखने के लिए।

श्रीमती राज फौजदार 
बोदला रोड आगरा (उत्तरप्रदेश )

मतदाता गायब - डॉ केजे गढ़वी

मतदाता गायब - डॉ केजे गढ़वी

मतदाता गायब हो गया ज्ञानेश

कैसे ये करतब हो गया ज्ञानेश

चारों ओर शोर है चुनाव आयोग  चोर है

मत काटो ही मतलब हो गया ज्ञानेश

कुमार कठपुतली है,कैसी धांधली है..?

कैसे हुआ ये कब हो गया ज्ञानेश

मतदाता का कौन है मृत्युदाता?

कैसे और क्यों ये गजब हो गया ज्ञानेश

हो लोकशाही का हत्यारा,तलब हो?

हुक्मरान बेअदब हो गया ज्ञानेश?

संविधान की कसम खाई,रस्म किसकी निभाई?

ये रिश्ता कैसा अजायब हो गया ज्ञानेश


,,,,,,,,,,,, डॉ केजे गढ़वी

द्वारका, गुजरात 

जीवन की सीख - अंकिता जैन अवनी

जीवन की सीख - अंकिता जैन अवनी 

आज हनुमान अंश देखी,
फिल्म बहुत अच्छी है।
इस फिल्म से पांच बातें सीखने को मिलीं,
पहली आप का लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए, आपको पता होना चाहिए कि जीवन में आपको क्या करना है।
दूसरा, आप अपने स्वभाव में रहना सीखो।
तीसरी बात,अपनी ताकत को पहचानो क्योंकि आपके भीतर ही आपकी शक्ति है।
चौथी, भगवान का स्मरण सच्चे विश्वास और मन से करो।
पांचवीं और अंतिम बात,
आसक्ति से बचो क्योंकि आसक्ति केवल आपको फसाती है, मुक्त नहीं करती।
अंत में इस फिल्म को देखकर एहसास हुआ कि भगवान तो है और ये दुनिया केवल उसी की आज्ञा से चलती है।
भगवान ने सबकुछ पहले से निर्धारित करके रखा है। कौन,किससे, कब, कहां मिलेगा और बिछड़ेगा सब पूर्व तय है।
मतलब स्क्रिप्ट भगवान जी ने लिख रखी है हम सब तो केवल अभिनय कर रहे हैं।
जिसका जितना किरदार है वह उतना ही अभिनय करता है।
और सबसे मूर्खतापूर्ण बात ये है कि हम इस भ्रम में रहते हैं कि हमारा किरदार सदा रहेगा।

_ अंकिता जैन अवनी लेखिका/कवयित्री