Tuesday, 21 April 2026

दूर कहीं सूरज डूबा तो - बृजेश तिवारी


दूर कहीं सूरज डूबा तो  - बृजेश तिवारी 

दूर कहीं सूरज डूबा तो रजिया का मन धड़के धक धक

रात में जो बारिश आई तो छत से पानी टपके टप-टप ।
तो फिर सवेरे जगना मुश्किल क्योंकि नींद न पूरी होगी
आधा काम करुँगी दिन का आधी ही मजदूरी होगी।
कबतक काम चलेगा ऐसे अपनी तो हालत खराब है,
बीरवा भी चुप मार के बैठा क्या सवाल है क्या जवाब है !
झोपड़पट्टी के इस कमरे में जब से रजिया ब्याह के आई
शादी के जोड़े में लगभग एक वर्ष का समय बिताई ।
सोच रही थी, रजिया मुश्किल घटे कोई संदेशा लाए
बड़ी सड़क से पगड़ी बांधे लालवस्त्र पंडित जी आए ।
कहा ज्योतिषी जानता हूँ विद्वान हूँ ,मैं जो कह डालूंगा
वही बने तेरा भविष्य तकदीर की रेखा पढ़ डालूंगा।
बोले बच्ची हाथ दिखाओ जो कुछ संभव हो दे देना.
पर यदि वाणी सच्ची निकली तो चुप होके मत रह लेना ।
तेरी किस्मत सच्चा सोना धन-दौलत से भरा हुआ है..
कठिन परिश्रम करना होगा राह में रोड़ा, अड़ा हुआ है।
कुछ रूपयों का हो जुगाड़ अपने शौहर से बोली खाश
खाना-पीना बना के बेचो बैठो उस पीपल के पास ।
आया बीरवा रजिया बोली साधु ऐसा बोल गए हैं
सच्ची वाणी वह कहते हैं हमको तुमको तौल गए हैं।
फिर क्या था कल-परसों में ही खुल गया रजिया -बिरवा होटल
पहले दिन सोलह रोटी सब्जी बिका हो गया तीन प्लेट टोटल ।
बृजेश तिवारी
दिल्ली

युद्ध - प्रीति अरोरा

 युद्ध - प्रीति अरोरा 

सो गई कई जिंदगियां मौत की गोद में
अब तो हिंसक युद्ध को विराम दो 
बह गए कई सिंदूर रक्त के प्रवाह संग 
अब तो विध्वंसक,संहारी रण को आराम दो 

गोद सूनी कर गया कई ममताओं की युद्ध 
पिता का साया मासूम बच्चों से उठ गया 
बुझ गया चूल्हा कई घरों का सदा के लिए 
छोड़ दो युद्ध अब धरती अंतस भी कहर उठा

धूए का उठता गुबार इंतजार धूमिल कर गया 
प्रतीक्षा करती राहे अब दम तोड़ चुकी है 
पूछ रहे बच्चे बार-बार पापा कब आएंगे 
मां की चुप्पी अब सदा  मौन हो चुकी है

रहने का आसरा, रोटी का निवाला और संबल 
सब कुछ त्रास-त्रास,मृत्यु गरल हो चुका है 
अमन,शांति का पताका फहरा दो अब मनुज 
शेष भी कगारी की दहलीज पार कर चुका है

प्रीति अरोरा 
बदायूं,उत्तर प्रदेश 

Thursday, 9 April 2026

वक्त - शिक्षक सर्वोत्तम - डॉक्टर सलोनी चावला

वक्त - शिक्षक सर्वोत्तम - डॉक्टर सलोनी चावला


वक्त दिखता नहीं,लेकिन सब कुछ दिखाता है,
होता नहीं महसूस, पर महसूस कराता है।

वक्त परीक्षा भी है, वक्त परिणाम भी,
वक्त में है सवेरा, वक्त में शाम भी।

वक्त खोलता राज़ कई, कई राज़ छुपाता है,
आने वाले कल को गुज़रा कल बनाता है। 

वक्त हालात का दर्पण, वक्त शिक्षक सर्वोत्तम, 
वक्त कमाल चिकित्सक, वक्त ज़ख़्मों की मरहम।

वक्त का अपना भाग्य नहीं, पर भाग्य बनाता है, 
राह भटकाता कभी, कभी मंज़िल दिखाता है।

वक्त प्रश्नों का उत्तर, वक्त है न्यायाधीश,
वक्त देता सज़ाएं, वक्त देता आशीश।

वक्त कोई लेखक नहीं, पर ग्रंथ बनाता है,
कर्म सभी के, जाने कहां पर लिखता जाता है।

वक्त के हर लम्हे पर, लिखे मिलन - जुदाई,
कोई ताकत सृष्टि की, वक्त से जीत न पाई।

वक्त वह वाहन है जो आगे बढ़ता जाता है, 
ज़िंदगी को मौत के दर तक पहुंचाता है।

हर होनी - अनहोनी पर, वक्त का ही अधिकार, 
वक्त की फिरकी पर ही, चलता सारा संसार। 

ठोकर खाता है, जो वक्त की कद्र न पाता है,
वक्त ही जन्मों - जन्मों तक साथ निभाता है।

न लौटता, न रुकता, न करता है इंतज़ार,
युग बदलें, पर वक्त नहीं बदले अपनी रफ़्तार। 

अंत को अनंत, अनंत को अंत बनाता है,
पूरी सृष्टि को अपना बंधक बनाता है।

वक्त दिखता नहीं, लेकिन सब कुछ दिखाता है, 
होता नहीं महसूस, पर महसूस कराता है।

रचयिता - डॉक्टर सलोनी चावला
(प्रमाणित मौलिक रचना)
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*प्रतिभागी का नाम  -

*डॉक्टर सलोनी चावला, 
फरीदाबाद, हरियाणा,


मेरी नीतियों की नींव पर, यह सारा विश्व बना है, - तनवी निश्चल

मेरी नीतियों की नींव पर, यह सारा विश्व बना है,

मैंने ही राजधर्म का, पावन ताना-बाना बुना है।

तर्क के पैने बाणों ने, कुरीतियों के सीने चीरे हैं,

मेरे पोषित शिष्य सदा ही, बनकर लौटे वीर हैं।

शास्त्रों में 'अर्थ' को समझाकर, लाभ-हानि का भेद बताया,

नियम रचे ऐसे कि कोई, मनमानी न कर पाया।

किन्तु आज के वर्तमान में, मैं अत्यंत उदास हूँ,

तर्कहीन, निरुद्देश्य खड़ा, मैं केवल रिक्त आभास हूँ।

यह भयावह दृश्य देख, मन मेरा सदा डराता है,

समाज की संकीर्णता से, साक्षात्कार करवाता है।

'कानन-न्याय' से चलती सत्ता, आज यहाँ जंगल राज है,

शक्ति के नखों से नोच रहा, निर्बल को लोभी बाज़ है।

किस 'हरि' का अब कहाँ यहाँ, कोई बस चलता है?

अंधेरे को निगलने वाला बालक, आज रोशनी को तरसता है।

विद्या पर प्रश्न उठते ही, पग मेरे डगमगाते हैं,

अज्ञानी भी गर्व से खुद को, मेरा वंशज बताते हैं।

सुनो शिक्षकों! मंथन करके, क्या तुम उत्तर दे पाओगे?

छैनी और हथौड़े से, क्या नया नायक गढ़ पाओगे?

अज्ञानता के पर्वतों को काटकर, ज्ञान का रण बनाना है,

स्वयं उतरकर कीचड़ में, तुम्हें 'राजीव' खिलाना है।

वरना इन बाल-मस्तिष्कों को, स्वार्थ की दीमक लग जाएगी,

शून्यता का भोजन पाकर, यह पीढ़ी पंगु हो जाएगी।

दर्पण में क्या तुम अपनी, असली सीरत पहचानोगे?

मिथ्या मान-प्रतिष्ठा के, पर्दे कब तुम त्यागोगे?

अब भी बने रहे 'धृतराष्ट्र', तो घनघोर पाप करोगे,

जब लेखा होगा कर्मों का, तब कहाँ पश्चाताप करोगे?

'विद्यासागर' होने का, व्यर्थ न तुम अहंकार करो,

बनकर मेरे सच्चे वंशज, युवाओं में वैचारिक हुंकार भरो।

तुम सखा बनो, तुम पिता बनो, तुम मार्गदर्शक मीत बनो,

शंकाओं का जो दहन करे, तुम वो प्रज्वलित अग्नि-गीत बनो।

तुम्हारे कौशल से सिंचित, हर नर और नारी हो,

आत्मविश्वास से पूर्ण रहें, न लेशमात्र लाचारी हो।

तुम 'वशिष्ठ' बन मानव को, 'पुरुषोत्तम' बना सकते हो,

'परशुराम' बन शून्य को भी, 'शतकोटि' कर सकते हो।

अब यह चाणक्य विदा लेकर, तुमसे एक प्रण लेता है,

जाने से पूर्व अंतिम वचन, तुम शिक्षकों से कहता है—

यदि अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य को, तुम व्यर्थ जाने दोगे,

तो भीषण अपराध करोगे, अनर्थ को अर्थ बनने दोगे!

कलम को अपनी शस्त्र बनाओ, नया इतिहास रचा देना,

उठो कि राष्ट्र के माथे पर, तुम ज्ञान का तिलक लगा देना।

तनवी निश्चल 
दिल्ली 

गुरु - डॉ पी सी कौंडल

गुरु - डॉ पी सी कौंडल

गुरु शिष्यों को गुरु भक्ति का मार्ग बताता है
गुरु शिष्यों को सही दिशा की ओर ले जाता है।

गुरु अपने शिष्यों का भाग्य बना देता है 
तभी तो गुरु पृथ्वी पर भाग्यविधाता कहलाता है।

गुरु बिन शिष्य का कभी उधार नहीं हो पाता है 
गुरु- शिष्य के प्यार जैसा और प्यार नहीं हो पाता है 

गुरु बिन भवसागर से कोई पार नहीं जा पाता है 
सर पर गुरु का हाथ न हो,अंधकार नहीं मिट पाता है।

गुरु अज्ञानता के अंधकार को जड़ से मिटा देता है 
गुरु शिष्य के भीतर ज्ञान का प्रकाश जगा देता है 

गुरु की महिमा का गुणगान अवश्य हमें करना चाहिए 
गुरु का मान सम्मान,अवश्य हमें करना चाहिए।

गुरु ज्ञान का सागर और शान्ति का पुजारी होता है 
गुरु सेवा का पुंज,शिष्य का हितकारी होता है।

गुरु से बड़ा संसार में और कोई नहीं होता है 
क्यों कि गुरु ही शिष्य में,ज्ञान का बीज बोता है।

गुरु ही वो शक्ति है,जो भगवान से मिला  देता है
गुरु के बिन सतलोक में,कोई पहुंच नहीं पाता है।
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डॉ पी सी कौंडल, हिमाचल प्रदेश,