Monday, 7 September 2026

रक्षासूत्र — प्रेम का अमर बंधन / डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई

 रक्षासूत्र — प्रेम का अमर बंधन / डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई 

रक्षाबंधन आया लेकर, प्रेम-सुधा की पावन धार,
 बहन सजाए स्नेह-सुमन से, भाई का मंगल संसार।
रेशम-धागा मात्र नहीं यह, विश्वासों का दृढ़ संधान,
 इसमें बहता निर्मल स्नेह, इसमें बसता शुभ अरमान।
बहना बाँधे राखी पावन, रोली-अक्षत, मंगल गान,
 भाई देता रक्षा-वचन, बहना पाती सुख-आशीष महान।
मिष्ठान्नों की मधुर सुगंध से, महके आँगन, द्वार-द्वार,
 हँसी-खुशी के दीप जलें, मिट जाए मन का हर अंधकार।
कृष्ण-सुदामा की मित्रता में, स्नेह-समानता का संदेश,
 द्रौपदी के करुण पुकार पर, कृष्ण बने रक्षा-विशेष।
कर्णावती की राखी ने भी, इतिहासों में रचा विधान,
 हुमायूँ ने बहन के सम्मान हेतु, निभाया अपना वचन महान।
यम-यमुना का पावन संबंध, भाई-दूज तक देता ज्ञान,
 रक्त-संबंध से बढ़कर होता, हृदयों का पावन सम्मान।
सीमाओं पर प्रहरी भाई, मातृभूमि की रक्षा करते,
 बहनें घर में दीप जलाकर, उनके मंगल की कामना धरते।
भारत से लेकर विश्व-भूमि तक, गूँजे बंधुत्व का गान,
 जाति, देश और भेद मिटाकर, मानव बने परस्पर प्राण।
राखी बाँधे केवल कलाई नहीं, बाँधे मानवता का विश्वास,
 दीन-दुःखी के आँसू पोंछें, यही हो सच्चा प्रेम-विकास।
बहन बने स्नेहिल शक्ति, भाई बने भरोसे की ढाल,
 हर घर में सौहार्द खिले, हर मन हो निर्मल, निष्कलुष, विशाल।
आओ इस पावन पर्व पर, लें मानवता का दृढ़ संकल्प—
 रक्षा हो हर नारी की, प्रेम बने जीवन का विकल्प।
रक्षाबंधन केवल उत्सव नहीं, संस्कृति का उज्ज्वल सम्मान,
 राखी के इस पावन सूत्र में, बँधा रहे अखिल विश्व-परिवार महान!

डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई 
कर्नाटक

बहन -माँ का प्रतिबिंब / नेहा बागड़ी

 बहन -माँ का प्रतिबिंब / नेहा बागड़ी


 दुनिया में सबसे प्यारी मेरी बहना है,
 यही मेरे दिल का कहना है।

 वो संभालती है मुझे मेरी माँ  की तरह,
 इसलिए वह लगती है मुझे माँ  के प्रतिबिंब की तरह। 

 मेरी हंसी खुशी सब उसी से  है,
 क्योंकि वह मेरी माँ  जैसी है। 

 स्वादिष्ट भोजन बनाना, पूजा पाठ करना, है उसे सभी शास्त्रों का ज्ञान,
 पर किया नहीं उसने कभी अभिमान। 

सरल व्यवहार, सादा जीवन, शांत स्वभाव,
 बड़ी बहन ने नहीं होने दिया कभी  माँ  का अभाव। 

वो थकती नहीं कभी काम से,
 वो हर  फर्ज निभाती है, बहुत ही  आराम से। 

वों करती नहीं किसी से शिकायत,
सबका ख्याल रखना है उसकी आदत। 

बड़ी बहन ने दिया है हमेशा मेरा साथ, 
पर वों छिपा लेती है हर जज़्बात। 

सबका करती है आदर-सत्कार,
मेरी बहन करती है मुझे माँ  जैसा प्यार। 

 वो घर की रोशनी एवं घर की ज्योति है,
 मेरी बहन सुंदर माला का मोती है।


नेहा बागड़ी, भिवानी (हरियाणा)( Neha Bagri)
पता-मकान. न.-2516, बिजान पाना, गांव-बापोड़ा,भिवानी (हरियाणा)
ईमेल:nbagri527@gmail.com

त्यौहार / कमल धमीजा

त्यौहार / कमल धमीजा


हर तरफ है रौनकें महका हुआ बाजार है, 
हाल-ए-दिल जी सुनो सब लग रहा बेकार है। 

हो रहीं पलकें मिरी गीली तुम्हारी याद में, 
लौट आ भैया तुम्हारे संग में त्यौहार है। 

चूम लेती हाथ हैं ये रंग बिरंगी राखियां,
हो जहाँ भी लौट आओ रो रहा परिवार है। 

ओढ़ कर खामोशियों को दूर इतना हो गए,
माँ तुम्हारी याद में भैया बहुत बीमार है ‌। 

याद को दिल में समेटे जी रही हूँ बस "कमल", 
सामने भगवान के क्यों हम सभी लाचार है। 

स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
- हरियाणा

रिश्तों की डोर—राखी का त्योहार / डॉ अनुपमा वर्मा

 रिश्तों की डोर—राखी का त्योहार

कलाई पर सजे धागे में,
बहन का सारा प्यार है,
भाई की हर मुस्कान में,
बहन का ही संसार है।
राखी केवल धागा नहीं,
विश्वासों का बंधन है,
सुख-दुःख में साथ निभाने का,
पावन-सा आश्वासन है।
बचपन की वो मीठी यादें,
वो लड़ना और मनाना,
छोटी-छोटी बातों पर रूठना,
फिर हँसकर गले लगाना।
मिठाई की खुशबू घर भर दे,
खुशियों से आँगन महके,
बहन की दुआएँ साथ रहें,
भाई के सपने चमके।
न हो कोई स्वार्थ जहाँ पर,
न कोई हिसाब-किताब,
भाई-बहन के प्रेम से बढ़कर,
नहीं कोई रिश्ता लाजवाब।
ईश्वर से बस यही प्रार्थना—
सदा रहे यह प्यार,
हर जन्म मिले भाई-बहन का,
और अटूट रहे यह संसार।
राखी का यह पावन पर्व,
लाए खुशियाँ अपार,
भाई की कलाई पर सजे,
बहन का स्नेहिल प्यार।
धागा छोटा हो सकता है,
पर भाव बहुत महान—
राखी में बंध जाता है,
दो दिलों का पूरा जहान।

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab 

Thursday, 3 September 2026

रक्षाबंधन / संगीता पीयूष सहज

 रक्षाबंधन / संगीता पीयूष सहज

भाई की कलाई पर जब राखी सजती है,
बहना के चेहरे पर इक खुशी खिलती है।
बचपन की वो बातें फिर याद आती हैं,
आँगन में हँसी जैसे फिर से उतरती है।

वो रूठना, मनाना और लड़ना-झगड़ना,
फिर प्यार से मिलने की चाहत जगती है।
मिठाई की खुशबू, तिलक की वो थाली,
हर ओर प्रेम की खुशबू महकती है।

बहना की दुआओं में भाई की खुशियाँ,
भाई के प्यार से बहना सँवरती है।
रिश्ता ये केवल धागे का नहीं है,
ये दिल से दिलों की डोर जुड़ती है।

दूरियाँ भले ही कितनी बढ़ जाएँ,
रिश्तों में कहाँ कभी दूरी रहती है।
भाई हो परेशां तो बहना भी रोती है,
बहना के आँसू से भाई की आँख भरती है।

हर मुश्किल में भाई ढाल बन जाए,
बहना भी हिम्मत बन साथ चलती है।
ईश्वर से यही है दुआ आज मेरी,
हर भाई की बहना सदा मुस्कुराती रहे,
हर बहन के सिर पर भाई का साया,
और प्रेम की खुशियाँ सदा बरसती रहें।

राखी का ये पावन त्योहार हर वर्ष आए,
हर घर में खुशियों की फुहार लाए,
न टूटे कभी ये पवित्र प्रेम-बंधन,
हर जन्म भाई-बहन का प्यार लाए।

संगीता पीयूष सहज 
(sangeeta piyush sahaj)
वसुंधरा, गाजियाबाद
Vadundhra, ghaziabad