आनलाइन संसार -- नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
आनलाइन जैसा शब्द ठीक वैसा ही व्यवहार आन लाइन आज कल समाज कि जरूरत बन गई है!
जीवन कि छोटी से छोटी बड़ी से बड़ी जरूरतों के लिए आन लाइन समाज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा किस्सा बन गया है!
सुई से लेकर सम्भवत हवाई जहाज तक आन लाइन मगाया जा सकता है भुगतान आन लाइन ही किया जा सकता है स्पष्ट है कि
जीवन समाज आन लाइन होकर एक कमरे बंद होकर ऱह गया है!
संचार एवं मिडिया क्रांति के युग में समाचार से लेकर मनोरंजन तथा अध्ययन को भी आन लाइन कर दिया है!
पुस्तक कोई खरीदता नहीं सब कुछ सुलभ है एक मोबाइल के
मध्यम से आन लाइन गोष्ठी सम्मेलन, वर्क फ्रॉम होम आदि कि नव संस्कृति को जन्म दिया है!
आन लाइन से कोई भी व्यवहारिक कार्य करने के लिए दो आवश्यक श्रोत का होना आवश्यक है एक बैंक मे खाता हो दूसरा मोबाइल, कंप्यूटर, या टेबलेट्स,मोबाईल का होना आन लाइन संस्कृति के उद्भव विकास से सुविधाएं बढ़ी है जैसा कि हर नए वैज्ञानिक अविष्कार कि लाभ हानियाँ होती है ठीक उसी प्रकार आन लाइन का प्रयोग भी हानि लाभ के सैद्धांतिक दोष से मुक्त नहीं है!
सोसल मिडिया के प्रयोग मे आन लाइन गेम, आन लाइन रिश्ते का निर्माण बिना कि ठोस आधार के सिर्फ आन लाइन से वैवाहिक सम्बन्ध समाज को अक्सर पीड़ा और दर्द ही देते है!
आन लाइन सुविधाएं भागम भाग के जीवन मे समय कि बचत करता है तो आपके पसंद को सीमित करता है, आन लाइन अपराध को भी जन्म देता है साईबर ठगी इसका ज्वलंत उदाहरण है!
आन लाइन अनाप सनाप सूचनाओं एवं संदेशो से समाज को भ्रमित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है!
आनलाइन से समाज और संसार को लाभ भी बहुत है किसी के अंदर यदि कोई प्रतिभा है तो आनलाइन युग पूर्व उसे अपनी प्रतिभा समय समाज मे स्थापित करने मे संघर्ष करते करते कभी कभी जिंदगी बीत जाती थी आन लाइन युग मे अपनी प्रतिभा को विडिओ द्वारा, इंस्टाग्राम द्वारा, फेसबुक द्वारा सोसल मिडिया पर प्रस्तुत कर अल्प समय मे ही लोक प्रिय बनने का असीमित अवसर उपलब्ध है स्थिति यहां तक है कि बच्चे बूढ़े जवान युवा किशोर महिलाए बेटियां सभी अपनी प्रतिभा हुनर को सोसल मिडिया पर आन लाइन प्रेषित कर लोकप्रिय तो हो रहे रही है आय भी अर्जित कर रहे!
आनलाइन संस्कृति का नकारात्मक पक्ष यह है कि समाज कि बौद्धिक क्षमता शारीरिक क्षमता का ह्रास हो रहा है जिसके कारण भावी पीढ़ियों के मनसिक एवं शारीरिक स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ने कि सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है!
आनलाइन जैसा शब्द ठीक वैसा ही व्यवहार आन लाइन आज कल समाज कि जरूरत बन गई है!
जीवन कि छोटी से छोटी बड़ी से बड़ी जरूरतों के लिए आन लाइन समाज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा किस्सा बन गया है!
सुई से लेकर सम्भवत हवाई जहाज तक आन लाइन मगाया जा सकता है भुगतान आन लाइन ही किया जा सकता है स्पष्ट है कि
जीवन समाज आन लाइन होकर एक कमरे बंद होकर ऱह गया है!
संचार एवं मिडिया क्रांति के युग में समाचार से लेकर मनोरंजन तथा अध्ययन को भी आन लाइन कर दिया है!
पुस्तक कोई खरीदता नहीं सब कुछ सुलभ है एक मोबाइल के
मध्यम से आन लाइन गोष्ठी सम्मेलन, वर्क फ्रॉम होम आदि कि नव संस्कृति को जन्म दिया है!
आन लाइन से कोई भी व्यवहारिक कार्य करने के लिए दो आवश्यक श्रोत का होना आवश्यक है एक बैंक मे खाता हो दूसरा मोबाइल, कंप्यूटर, या टेबलेट्स,मोबाईल का होना आन लाइन संस्कृति के उद्भव विकास से सुविधाएं बढ़ी है जैसा कि हर नए वैज्ञानिक अविष्कार कि लाभ हानियाँ होती है ठीक उसी प्रकार आन लाइन का प्रयोग भी हानि लाभ के सैद्धांतिक दोष से मुक्त नहीं है!
सोसल मिडिया के प्रयोग मे आन लाइन गेम, आन लाइन रिश्ते का निर्माण बिना कि ठोस आधार के सिर्फ आन लाइन से वैवाहिक सम्बन्ध समाज को अक्सर पीड़ा और दर्द ही देते है!
आन लाइन सुविधाएं भागम भाग के जीवन मे समय कि बचत करता है तो आपके पसंद को सीमित करता है, आन लाइन अपराध को भी जन्म देता है साईबर ठगी इसका ज्वलंत उदाहरण है!
आन लाइन अनाप सनाप सूचनाओं एवं संदेशो से समाज को भ्रमित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है!
आनलाइन से समाज और संसार को लाभ भी बहुत है किसी के अंदर यदि कोई प्रतिभा है तो आनलाइन युग पूर्व उसे अपनी प्रतिभा समय समाज मे स्थापित करने मे संघर्ष करते करते कभी कभी जिंदगी बीत जाती थी आन लाइन युग मे अपनी प्रतिभा को विडिओ द्वारा, इंस्टाग्राम द्वारा, फेसबुक द्वारा सोसल मिडिया पर प्रस्तुत कर अल्प समय मे ही लोक प्रिय बनने का असीमित अवसर उपलब्ध है स्थिति यहां तक है कि बच्चे बूढ़े जवान युवा किशोर महिलाए बेटियां सभी अपनी प्रतिभा हुनर को सोसल मिडिया पर आन लाइन प्रेषित कर लोकप्रिय तो हो रहे रही है आय भी अर्जित कर रहे!
आनलाइन संस्कृति का नकारात्मक पक्ष यह है कि समाज कि बौद्धिक क्षमता शारीरिक क्षमता का ह्रास हो रहा है जिसके कारण भावी पीढ़ियों के मनसिक एवं शारीरिक स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ने कि सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है!
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!




