Saturday, 10 October 2026

शांति : मानव जीवन की आधारशिला - Uzma Taranum

शांति : मानव जीवन की आधारशिला - Uzma Taranum

शांति मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है। जिस प्रकार स्वस्थ शरीर के लिए भोजन और स्वच्छ हवा आवश्यक है, उसी प्रकार सुखी और संतुलित जीवन के लिए शांति आवश्यक है। शांति केवल युद्ध या संघर्ष की अनुपस्थिति का नाम नहीं है, बल्कि यह मन, समाज और राष्ट्र में सौहार्द, सहयोग, सहिष्णुता और सुरक्षा की भावना का प्रतीक है।

आज का मनुष्य भौतिक सुविधाओं और तकनीकी प्रगति के बावजूद अनेक प्रकार के तनाव, चिंता और असंतोष से घिरा हुआ है। प्रतिस्पर्धा, आर्थिक दबाव, पारिवारिक समस्याएँ और सामाजिक मतभेद व्यक्ति के मानसिक संतुलन को प्रभावित करते हैं। ऐसे समय में आंतरिक शांति का महत्व और भी बढ़ जाता है। यदि मन शांत हो, तो कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति विवेकपूर्ण निर्णय ले सकता है।

शांति की शुरुआत व्यक्ति के भीतर से होती है। सकारात्मक सोच, संयम, क्षमा, आत्मविश्वास और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे गुण व्यक्ति के जीवन में शांति स्थापित करने में सहायता करते हैं। हमें छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित होने के बजाय संवाद और समझदारी का मार्ग अपनाना चाहिए। परिवार में प्रेम और आपसी सम्मान का वातावरण हो, तो बच्चों और बड़ों दोनों के जीवन में सकारात्मकता आती है।

सामाजिक जीवन में भी शांति का विशेष महत्व है। जाति, भाषा, धर्म और विचारों की विविधता समाज की शक्ति है, लेकिन जब इन विविधताओं के कारण भेदभाव और संघर्ष उत्पन्न होता है, तब सामाजिक शांति प्रभावित होती है। इसलिए हमें एक-दूसरे के विचारों और अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मतभेदों को हिंसा में बदलने के बजाय संवाद द्वारा सुलझाना ही सभ्य समाज की पहचान है।

राष्ट्रों के बीच शांति विश्व के विकास के लिए आवश्यक है। युद्ध से केवल जन-धन की हानि नहीं होती, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत शांतिपूर्ण वातावरण में देश विकास, विज्ञान, शिक्षा और मानव कल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। विश्व शांति के लिए सहयोग, कूटनीति, सह-अस्तित्व और मानवाधिकारों का सम्मान आवश्यक है।

महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्य के माध्यम से शांति का संदेश दिया। उनका विचार था कि हिंसा किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। आज भी उनके विचार मानवता को शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में प्रेरित करते हैं।

अंततः कहा जा सकता है कि शांति केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। यदि हम अपने व्यवहार में प्रेम, सहिष्णुता, करुणा और संवाद को स्थान दें, तो परिवार से लेकर पूरे विश्व तक शांति का वातावरण बनाया जा सकता है। शांति ही मानव सभ्यता की वास्तविक प्रगति और समृद्धि की आधारशिला है।

Uzma Taranum 
Karnataka 

यमराज से नोंक-झोंक - माया मेहता

यमराज से नोंक-झोंक - माया मेहता

चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो
अकाल मौत द्वार पर यमराज खड़े हो
स्तब्ध तन - मन मेरा क्यूं चले आए हो
शुभ दिन है मेरा अशुभ बनाने आए क्यों।।

चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो ...........

ना संकेत ना क्रंदन उन श्वान-पंछियों के 
भूल गए वृद्धा का पता मुझसे ही लिजिए
वृद्ध पड़ोसन हैं मेरी न हाड, मांस,चाम है
आज मुझे छोड़ दें उपकार उन्हीं पर कीजिए ।।

चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो ..............

क्रोधित यमराज बोले वक्त यूं बर्बाद न करें 
एक नाम एक राशि मोह माया में  क्यों फंसे 
कर्तव्यनिष्ठ  यमदूत  हैं कर्म हमारा धर्म है 
आपको ले जायेंगे कलयुग से मुक्ति दिलाएंगे।।

चाहे काल्पनिक हो हकीकत दृश्य हो।

बेटे के  ब्याह  पर अतिथियों  का झुंड हैं 
बोझ ज़िम्मेदारियों का आऊं कैसे छोड़ के
हाथ जोड़ विनती करूं भ्राता मुझे छोड़िए 
ताप्ती-यमुना मान के भ्राता का फर्ज निभाइये।।

चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो ...........

'यम' की 'यमी' बन गई कृपा या चमत्कार से  
वृद्धा की स्वांस थम गई कलयुग से वो तर गई 
स्वर्ग सा माहौल है बेटे का आज ब्याह है
स्वप्न से जब जागी मैं, काश!हकीकत होता ये ।।

चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो..................

( एक सत्य घटना पर मैं बहुत आहत हुई और मैंने काल्पनिक रुप से यमराज से नोंक-झोंक करने की कोशिश की ।)

            *माया मेहता मुंबई*

सत्य-अहिंसा के महात्मा डॉ. वै. कस्तूरी बाई

सत्य-अहिंसा के महात्मा डॉ. वै. कस्तूरी बाई 

महात्मा गांधी भारत की शान,
 उनसे ऊँचा भारत का मान।
 सत्य बना उनका जीवन-प्राण,
 अहिंसा बनी उनकी पहचान।
स्वतंत्रता का देखा था स्वप्न,
 त्याग से किया उसे उन्होंने पूर्ण।
 सत्याग्रह की लेकर मशाल,
 जगा दिया जन-जन में उजियाल।
सत्य की शक्ति जग को बताई,
 अहिंसा की राह हमें दिखाई।
 अन्याय के आगे शीश न झुकाया,
 शांति का संदेश जग में फैलाया।
स्वदेशी का मंत्र जन-जन गाया,
 चरखा घर-घर में पहुँचाया।
 चरखा केवल सूत न काता,
 स्वाभिमान का दीप जलाता।
सेवा को जीवन का धर्म बनाया,
 त्याग से भारत को बल पहुँचाया।
 सत्याग्रह से संघर्ष किया,
 अहिंसा से जन-मन जीत लिया।
महात्मा का जीवन तप की मिसाल,
 भारत के माथे का उज्ज्वल भाल।
 गांधी का सत्य अमर कहलाया,
 गांधी ने जग को सत्य सिखाया।
राष्ट्रपिता का पावन नाम,
 भारत का गौरव, भारत की शान।
 सत्य रहे तो जीवन धन्य,
 अहिंसा से हो जग कल्याण।
शांति खिले हर मानव-द्वार,
 सेवा बने प्रेम का आधार।
 स्वदेशी से बढ़े देश का मान,
 स्वतंत्र रहे अपना हिंदुस्तान।
हे महात्मा! तेरी अमर कहानी,
 आज भी लगती सबसे सुहानी।
 त्याग, सत्य, सेवा की ज्योति,
 रहे सदा भारत की ज्योति।

डॉ. वै. कस्तूरी बाई 
बेंगलूरु 
कर्नाटक

सत्य की मशाल - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

सत्य की मशाल - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

न तलवार उठाई, न कोई हथियार,
फिर भी हिला दिया था साम्राज्य का संसार।
हाथों में सत्य था, हृदय में अहिंसा,
भारत की मिट्टी ने रचा नया इतिहास।
धोती थी सादी, मगर विचार महान,
आँखों में सपने, होंठों पर हिंदुस्तान।
चल पड़े अकेले तो कारवाँ बन गया,
एक साधारण मानव—जन-जन की आवाज़ बन गया।
“सत्य ही शक्ति है”—जीवन ने समझाया,
अहिंसा के पथ पर जन-जन को चलाया।
अन्याय के आगे झुके नहीं कभी,
सत्याग्रह से जगा दी सोई हुई सभी।
चरखे की धुन में स्वाभिमान जगाया,
स्वदेशी का दीप हर घर में जलाया।
कहा—अपने श्रम पर विश्वास करो,
अपने हाथों से भारत का विकास करो।
नफरत की आँधी में प्रेम का दीप जलाया,
टूटे हुए दिलों को मानवता से मिलाया।
धर्म अलग हों, फिर भी इंसान एक है,
यही तो भारत की आत्मा का नेक संदेश है।
त्याग था जीवन, सेवा थी साधना,
राष्ट्रप्रेम ही उनकी सच्ची आराधना।
मिट्टी से उठकर मिट्टी में मिल गए,
पर विचार उनके अमर दीप बन गए।
आज भी जब दुनिया में हिंसा छा जाती है,
जब मानवता कहीं घायल हो जाती है,
तब याद आती है वह शांत-सी पुकार—
“सत्य और अहिंसा ही हैं जीवन का आधार।”
हे बापू! तुम्हारी राह कठिन सही,
पर मानवता के लिए इससे सुंदर राह नहीं।
जब तक सत्य की लौ दिलों में जलती रहेगी,
तब तक तुम्हारी गाथा दुनिया में चलती रहेगी।
नमन उस संत को, नमन उस विचार को,
नमन भारत के उस महान संस्कार को।
जिसने सिखाया—जीतना हो संसार,
तो पहले जीत लो अपने भीतर का अंधकार।
सत्य रहे, अहिंसा रहे, मानवता का मान रहे,
भारत की पावन धरती पर सदा शांति का गान रहे।

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी - डॉ. अशोक कुमार जाटव

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी - डॉ. अशोक कुमार जाटव

जब था देश पराधीन,
चारों ओर था हाहाकार,
फैल रही थी असहनीय चीत्कार,
जहाँ देखो, वहीं अत्याचार ही अत्याचार।
जुल्म ढा रहे थे फिरंगी,
क्योंकि देश था उनके अधीन,
जब राष्ट्र ने लगाई पुकार,
गांधी जी का हुआ अवतार।
किया संघर्ष, राह पकड़ी,
देश ने पकड़ी उत्कर्ष की डगर,
त्याग, तपस्या और बलिदान,
गांधी जी का रहा देश को अवदान।
राह थी सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह,
सभी संचालित रहते थे शांति से,
अंग्रेज हार मानते जाते,
गांधी जी के मार्ग से।
होली जलाई विदेशी सामानों की,
नारा था—स्वदेशी अपनाओ,
देश को स्वतंत्र कराओ,
चरखा था आधार-स्तंभ।
स्वदेशी का महत्वपूर्ण प्रकल्प,
सेवा था गांधी जी का मूलमंत्र,
नारा था—तभी आएगा प्रजातंत्र,
गांधी जी के हर कार्य ही उनकी पहचान।
राष्ट्रपिता गांधी जी हैं भारत की जान,
आज उनके कार्यों से भारत महान।

डॉ. अशोक कुमार जाटव
व्याख्याता, भोपाल, मध्यप्रदेश