Thursday, 12 March 2026

हे नारी हे नारी - यज्ञसेनी साहू

हे नारी हे नारी।
कुदरत ने तुझको बनाकर की दिखाई अपनी अद्भुत कलाकारि ।

त्रेतायुग मे जनकराजा की बेटी बन गयी  नाम था  सियाकुमारी ।
दुआपर युग मे राधा बन के जिनसे प्रेम किया वो थे श्री कृष्ण मुरारी ।
हे नारी ।।

दुर्गा बनके तुने असुरो का संहार किया जो थे दानव अत्याचारी ।
लक्ष्मी बन के तुने जग को अनाज का भंडार दिया और जग को उद्धारी।
हे नारी। ।

सावित्री बन के तुने सत्यवान को यमराज से बचाया धन्य है तेरी हिम्मत और बहादुरी ।
 घर मे बहू बेटी की भूमिका निभाई दिल से सारी ।
हे नारी ।

तु जीवन मे शिक्षा का प्रचार प्रसार कर तु
 कर रही है काम बहुत समझदारी ।
अब तो जज महिला और बन रही हर कर्मचारी ।
हे नारी।।

अब तो शमशान भी जाने लगी है और निभा रही अपनी
 जिम्मेदारी।य
आज हर क्षेत्र मे निभा रही है अपनी भागीदारी।
हे नारी ।।
रचना  - कवयित्री यज्ञसेनी साहू ✍✍
जय हिन्द जय भारत 🙏
Chattisgarh 

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