युवा - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
युवा, तुम नवभारत के निर्माता हो, देश के हो कर्णधार।
जांबाज हो तुम, गुणों की तुममें है भरमार।
उज्जवल भविष्य भारत का,
है तुम्हारे हाथ।
उठो, जागो, आगे बढ़ो,
हिम्मत और धीरज के साथ।
अपनी शक्ति को पहचानो,
सकारात्मक बदलाव लाओ।
जागरूक रहो सदा,
राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाओ।
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाओ, कुरीतियों का करो सफाया।
गहरे समंदर में जो उतरा,
उसने ही तो मोती पाया।
हौसले बुलंद हो, जोश में कमी न रखना।
उर्जावान बने रहो, बाधाओं से कभी न डरना।
लक्ष्य स्पष्ट हो, राह मिल जाएगा।
लगन और मेहनत से,
निशाना सध जाएगा।
हार से नहीं घबराना,
हार से ही जीत का रास्ता मिलेगा।
अपनी पराजय का कारण जानो, उसका निवारण करो,
विजय पताका फहरेगा।
बुजुर्गों का सम्मान करो, रिश्तो की समझो कीमत।
प्रभु की मिलेगी, तुम्हें सदा रहमत।
नीयत साफ हो, कर्म सही हो, नियति बदलती देर नहीं लगती।
ईमानदारी से जो काम करता,
सफलता उसके कदम चूमती।
दूर तक दृष्टि सदा रखना, अपनी क्षमता का उपयोग करो भरपूर।
भले थोड़ी देरी हो,
मंजिल मिलती हैजरूर।
लालच से दूर रहो, क्रोध पर करो नियंत्रण।
अपने भारत देश पर,
तन मन धन करो समर्पण।
हार यदि तुम जाओ, गलत रास्ता कभी न अपनाना।
नशे से दूर रहना, अच्छे कर्म करना, जीवन को सार्थक बनाना।
आगे ही बढ़ते जाना, अभी बहुत कुछ है हासिल करना।
विनम्र बने रहना, दृष्टिकोण सकारात्मक रखना।
जीतता वही है जो, चुनौतियों का सामना डटकर करता।
सोना आग में तप कर,
कुंदन है बनता।
इस धरती पर आए हो,
कुछ तो ऐसा कर जाओ।
माता-पिता का नाम रोशन हो,
मर कर भी, अमर हो जाओ।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
वैस्ट बंगाल
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