Tuesday, 14 July 2026

सेवा : मानवता का सर्वोच्च धर्म - उजमा तरनुमा

 


सेवा : मानवता का सर्वोच्च धर्म - उजमा तरनुमा

सेवा मानव जीवन का एक महान गुण है। यह केवल किसी की सहायता करने का कार्य नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व का प्रतीक है। सेवा का भाव व्यक्ति को स्वार्थ से ऊपर उठाकर समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए प्रेरित करता है।

हमारे भारतीय संस्कारों में सेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है। माता-पिता की सेवा, गुरुजनों का सम्मान, रोगियों की सहायता तथा जरूरतमंदों की मदद करना सेवा के ही विभिन्न रूप हैं। सेवा के लिए धन का होना आवश्यक नहीं है। मधुर वचन, सहानुभूति, समय और श्रम का योगदान भी सेवा का महत्वपूर्ण रूप है।

आज के व्यस्त और प्रतिस्पर्धी युग में लोगों के पास एक-दूसरे के लिए समय कम होता जा रहा है। ऐसे समय में सेवा का महत्व और भी बढ़ जाता है। किसी भूखे को भोजन देना, वृद्ध व्यक्ति को सड़क पार कराने में मदद करना, रक्तदान करना, पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण करना तथा शिक्षा से वंचित बच्चों को पढ़ाना समाज सेवा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

सेवा का लाभ केवल समाज को ही नहीं मिलता, बल्कि सेवा करने वाले व्यक्ति को भी आत्मिक संतोष और मानसिक शांति प्राप्त होती है। सेवा मनुष्य के भीतर करुणा, दया और प्रेम जैसे गुणों का विकास करती है। यही गुण एक आदर्श समाज की नींव रखते हैं।

अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सेवा के भाव को अपनाना चाहिए। यदि हम सभी अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों की सहायता करें, तो समाज में सुख, शांति और सद्भाव का वातावरण स्थापित हो सकता है। वास्तव में, निःस्वार्थ सेवा ही मानव जीवन को सार्थक और महान बनाती है।

Uzma Taranum 

Karnataka 

दान - अनीता चमोली "अनू"

 

दान - अनीता चमोली "अनू"
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मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे मे देते है सब दान।
खंबो पर अपना नाम लिखाकर बन जाते है छोटे भी महान।
लेकिन जो है दिल के बडे उनको है सच्चा ज्ञान। 
रोटी कपडा और औषधि से  बडा न कोई दान।
पैसे मत दो मंदिर मस्जिद ईश्वर ने दिये दो हाथ।
थोडा समय का दान मिलाकर करो नयी शुरुआत।
गरीब बच्चों को पढा लिखा कर उनका जीवन सवांर दो।
गरीब बिटियो की शादी मे पहुंच कर  आशीर्वाद और प्यार दो।
वन्य जीवों पर दया करो तुम उनको जीवन दान दो।
धरती को रखो हरा भरा अर प्रकृति को सौन्दर्य दान दो।
दान नही जो धन से होता लूट उसकी हो जाती है।
चोर लूटेरे भरे पडे है हकदार को कब रोटी मिल पाती है।
नही मुझे सम्मान की लालसा नही मेरा कोई नाम हो।
इतनी सी है इच्छा मेरी इन हाथो से कर्म सारे मेरे निष्काम हो।

       अनीता चमोली "अनू"
        उत्तराखंड
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दान का धर्म - डॉ. वै. कस्तूरी बाई

 


दान का धर्म - डॉ. वै. कस्तूरी बाई 

चंदा यदि छल की चादर ओढ़े, तो वह धर्म नहीं, व्यापार बने,
 योगदान तभी पावन होता, जब निस्वार्थ भाव का द्वार खुले।
मदद वही, जो मौन करुणा बन, पीड़ित के आँसू पी जाए,
 भेंट वही, जो अहंकार त्यागकर, मानवता के चरण चढ़ जाए।
सेवा केवल कर्म नहीं है, यह जीवन का दिव्य विधान,
 जहाँ परहित ही परम आराध्य, वहीं बसता सच्चा भगवान।
पुण्य कभी सिक्कों से नहीं, निर्मल अंतःकरण से मिलता है,
 जो भूखे के अधरों पर मुस्कान धर दे, वही अमृतफल खिलता है।
पर जहाँ चोरी विश्वास चुराए, और घोटाला जनधन हर ले,
 वहाँ सभ्यता की आँखें रोतीं, न्याय स्वयं भी मौन ठहर ले।
धन का वैभव क्षणभंगुर होता, चरित्र सदा अमर कहलाता,
 लोभ की ज्वाला अंततः मानव का ही अस्तित्व जलाती जाती।
सहयोग वह दीपक है, जो अनेक हृदयों को आलोकित करता है,
 एकता का प्रत्येक संकल्प राष्ट्र का भाग्य प्रकाशित करता है।
दान न केवल वस्तु का अर्पण, अपितु मन का पावन विस्तार है,
 जहाँ समर्पण की गंगा बहती, वहीं सच्चा जीवन साकार है।
आओ ऐसा युग फिर रचें, जहाँ सत्य ही सर्वोच्च प्रमाण बने,
 न छल, न प्रपंच, न लोभ का विष, केवल मानवता का गान बने।
करुणा हो पूँजी, सेवा हो साधना, सहयोग हमारा सम्मान बने,
 और प्रत्येक दान, प्रत्येक योगदान, भारत की उज्ज्वल पहचान बने।

डॉ. वै. कस्तूरी बाई 
कर्नाटक

दान की ओट - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"

 


दान की ओट - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"

चंदे की थाली लेकर जब,

कुछ चेहरे मुस्काते हैं,

सेवा के मीठे नारों से,

सपनों को बहलाते हैं।

दान समझकर जो सौंपा था,

वह विश्वास का अंश था,

पर चोरी की काली छाया में,

टूट गया हर हर्ष था।

योगदान था जनता का,

आशा की हर साँस थी,

घोटालों की आग लगी तो,

जल उठी हर आस थी।

भेंट अगर ईमान की हो,

तो मंदिर भी मुस्काता है,

पुण्य तभी फलता जग में,

जब मन निर्मल हो जाता है।

सेवा का अर्थ दिखावा नहीं,

न सत्ता का व्यापार बने,

मानवता की हर धड़कन में,

करुणा का संसार बने।

आओ ऐसा युग रचें,

जहाँ विश्वास न बिक पाए,

चंदा पहुँचे ज़रूरतमंद तक,

कोई अधिकार न लुट पाए।

दान नहीं है धन का केवल,

मन का उजला व्यवहार है,

सहयोग ही वह शक्ति है,

जिससे रोशन हर परिवार है।


डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"

पंजाब 

दान ना कर सके तो क्या फायदा - जितेन्द्र टेलर (जीत)



दान ना कर सके तो क्या फायदा - जितेन्द्र टेलर (जीत) 

जिंदगी में कमायें हो लाखो मगर, दान ना कर सके तो क्या फायदा ।
जो मिला है एक दिन वो लूट जाएगा, कुदरत का रहा है यहीं कायदा ।

सीखों सागर बादल और नदियां से, पाकर जल, जल सब में बांटना ।
सीखों पर्वत शिखर भ्रंश घाटियों से, मानव के लिए स्वयं को पाटना ।
सीखों पेड़ो के फूल पत्ती और शाख से, अंग परहित उपकार में काटना ।
सीखों चोंच भरें दाना पक्षियों से, धन ज़रूरत से हो ज़्यादा तो त्यागना ।
सदियों से है समर्पित समष्टि लिए, संकुचन भाव आया न यदा कदा ।

अपने अन्न और धन का करके दान, भूख प्यास किसी मिटाओ तुम ।
अपने भूज बल के तेज प्रताप से, दुष्ट से दीन दुखी को बचाओ तुम ।
पथ अंधेरे व अज्ञान जो अग्रसर, उनके मध्य दीप ज्ञान जलाओ तुम ।
अपने श्रमकण उज्ज्वल मौक्तिक से, धरती मां को फिर सजाओं तुम ।
प्रेम करूणा शरण ज्ञान क्षमा का भी, रहो दान करते जगत में सदा ।

ईश्वर का है आशीष तुम पर की, दान का मिला तुमको अधिकार है ।
सुख के सागर से तुम हीरे मोती लिए, धन वैभव भरा एक संसार है ।
धन संचित तेरे कर्मफल से जो है, वह किसी की खुशी का आधार है ।
दान दो मानव को समझ मानव, न बढ़े जिससे फिर मन अहंकार है ।
ग्रंथ वेद पुराणों में लिखा यही, दान से दाता की बढ़ती सुख संपदा ।

दान भाव मानव के अतंस में, विश्व कल्याण का है सशक्त प्रमाण ।
दान के पात्र अपेक्षित जन की, दानी को रखनी होगी कोई पहचान ।
ध्येय हो दान से दीन और देश का, नितप्रति ही रहे होता कल्याण ।
न की बंद आंखों से लुटाकर धन, कर दो शैतान को महा बलवान ।
दान अमृत बूंद सा बन दे जीवन, दान से है हो जाती खड़ी आपदा ।

जितेन्द्र टेलर (जीत) 

राजस्थान 

अकेला व्यक्ति - संगीता अहलावत



अकेला व्यक्ति - संगीता अहलावत

किसी का किसी का साथ देना सहयोग होता है l कोई भी व्यक्ति इस समाज में अकेले जीवन निर्वाह नहीं कर सकता है l सभी को एक दूसरे की आवश्यकता है, एक दूसरे के बिना वह बिल्कुल अकेला है l समाज में अधिकतर कार्य मिल- जुलकर ही पूरा कर सकते हैं l अकेला व्यक्ति किसी भी इमारत को अकेला नहीं बना सकता है l कोई भी कंपनी अकेले के दम पर नहीं चल सकती है और तो और कोई भी सरकार बिना सहयोग के राष्ट्र के लिए जन हित कार्य नहीं कर सकती है l सहयोग को प्राथमिकता इसलिए दी जाती है क्योंकि सहयोग से हर कार्य सरल हो जाता है l 
सहयोग की भावना परिवार में ही सबसे पहले  विकसित होती है l परिवार में सभी एक दूसरे के कार्यों में हाथ बंटाते हैं l 
घर के कार्यों को सभी मिलजुलकर पूरा करते हैं l ऐसे ही विद्यालय में बच्चे एक दूसरे की पढ़ाई में मदद करते हैं l सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेलकूद , प्रतियोगिताओं, अन्य गतिविधियों को मिलकर करते हैं l नौकरी हो या व्यवसाय हो सभी में एक दूसरे के सहयोग से कार्य पूरे होते हैं l सामाजिकता, राजनीति, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण, कृषि , सड़क बनाना, मकान बनाना, पुल बनाना, देश की सीमा पर फौजी भाइयों का योगदान सभी केवल सहयोग से संभव है l 
सहयोग से जीवन में हर सफलता आसानी से मिल जाती है l सहयोग से शांति मिलती है, उन्नति होती है l सहयोग ही राष्ट्र की समृद्धि है l 
स्वामी विवेकानंद ने भी सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया है l
अंत में सहयोग से ही किसी भी कार्य की सफलता संभव है l

-संगीता अहलावत
उत्तर प्रदेश 

Wednesday, 1 July 2026

मेल मिलाप - नेहा बागड़ी

मेल मिलाप - नेहा बागड़ी 
 दो शब्दों का मेल नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे खूबसूरत परिभाषा है। जिसका  अर्थ है दिलों के बीच की दूरी को मिटाना, और गिले-शिकवे भुलाकर नए रिश्ते बनाना। यह वह धागा है जो अलग-अलग रंग, धर्म, भाषा और सोच वाले लोगों को एक माला में पिरो देता है।  
 परिवार के  सदस्यों में अगर यह भाव मौजूद  हो तो छोटी-छोटी बातें बड़ी नहीं बनतीं। तीज-त्योहार पर सबका साथ बैठना, एक-दूसरे की सुनना  यही घर को घर बनाता है।   गाँव में चौपाल, शहर में मोहल्ला समिति, स्कूल में दोस्तों का समूह  ये सब इसी भाव  की छोटी पाठशालाएँ हैं।   भारत जैसे विविधता भरे देश में 140 करोड़ लोग सिर्फ इसी  भावना से ही एक साथ खड़े हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, हर बोली-हर रिवाज को अपनाना ही हमारी असली ताकत  है। वैर-भाव पालने से मन अशांत रहता है। माफ करना, गले लगाना, पुरानी बात भूल जाना बेहतर  है। इससे हम  रिश्तों को टूटने से  बचा सकते  हैं।
 ईद की सेवई हो या दिवाली की मिठाई, जब हम एक-दूसरे के घर जाकर त्योहार मनाते हैं तो ‘अपना-पराया’ का फर्क मिट जाता है।  हमें अपने बच्चों को दूसरों के साथ मिलकर रहना, अच्छा व्यवहार, बड़ों का आदर करना सीखाना चाहिए क्योंकि  ये  बच्चें ही  समाज को जोड़ने का कार्य करेंगे।  
मेल-मिलाप  वो प्रेम का धागा है जो हमारे परिवारों को, समाज को, देश के लोगों को बांध कर रखे हुए है अतः  इसे सँभाल कर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। आओ, मेल मिलाप को अपना स्वभाव बनाएँ — क्योंकि जुड़ने में ही जीत है।


नेहा बागड़ी 
भिवानी (हरियाणा)

स्वाभिमान - अश्विनी देशपांडे

स्वाभिमान - अश्विनी देशपांडे

“साहब–साहब, बचा लो, साहब।”आदिवासी महिला जमुना, घायल हिरनी–सी, गिरती– पड़ती पुलिस स्टेशन में दाखिल हुई।
“ अरे,क्या हुआ? कहां घुसी चली आ रही है?”  हवलदार बोला.
 “साहब, मुझ पर अत्याचार हुआ है.”
रोटी–बिलखती जमुना अपनी फटी साड़ी से तन ढकने की कोशिश करती है।
“ किसने किया है?”हवलदार ने कड़क आवाज में पूछा.
“ गांव के दबंगों ने.” हिचकियां लेती जमुना ने कहा।
“ क्या? पागल हो गई है! कुछ भी बोले चले जा रही है.”
“ साहब,मैं सच कह रही हूं .”
“तू रुक.” कह कर हवलदार फोन करता है।
“ सर जी, जमुना यहां आई है. क्या करना है?”
“ जी.”
“ सुन जमुना, मेरी सर जी से बात हुई है। बात का बतंगड़ न बना। चुपचाप समझौता कर ले।”
 जमुना तड़ाक से खड़ी हुई ।लाल जलती आंखों से हवलदार की तरफ देखा और कहा “भले ही मेरा सब दांव पर लग जाए, अपमान का बदला समझौता हरगिज नहीं होगा।” और लंबे-लंबे डग भरती बाहर निकल गई।

अश्विनी देशपांडे
Haryana 

पिताजी के जन्मदिन पर एक छोटा सा प्रयास - Anikit C

पिताजी के जन्मदिन पर एक छोटा सा प्रयास - Anikit C

सभी का सिर्फ भला ही सोचा 
खुदको बुरा करार कर,
वार दू सो सो चाँद सितारे 
आपकी एक मुस्कान पर।
मुझे जन्म देने वाले 
आज आपका जन्म दिन आया है।
यह तो खुशकिस्मती मेरी है 
जो पिता के रूप में मैंने आपको पाया है। 

पाया आपसे प्यार अपार 
जीवन के इस दौर में।
पर समझ नहीं पाया आपको 
मैं किसी भी मोड़ पे।
यह तो खुशकिस्मती मेरी है 
जो पिता के रूप में मैंने आपको पाया है,
माफ़ कर देना हर उन गलतियों के लिए 
जिनसे मैंने आपका दिल दुखाया है।

मन में तो है बातें हजार 
जो शब्दों में बयान नहीं कर पाता हूँ 
आप हँसते रहे, मुस्कुराते रहे
इससे ज़्यादा और कुछ नहीं चाहता हूँ।
कहने को तो है बहुत कुछ है लेकिन 
अभी के लिए सिर्फ यही कहना चाहता हूँ - के 
मैं आपसे बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत प्यार करता हूँ!

कवि नहीं ...
Anikit C, 
Tamil Nadu

भगवान महावीर - दीक्षित राज बोहरा

भगवान महावीर - दीक्षित राज बोहरा

जैन धर्म की जो है शान,
कुंडलपुर है जिनका जन्म स्थान,
उत्सव जिनका मनाते हैं हम हर वर्ष,
याद रहे... तिथि है चैत्र सुदी तेरस,
पिता जिनके सिद्धार्थ राजा महान,
बाल्यकाल से जाने जाते हैं जो वर्धमान,
शासन चल रहा जिन शासनपति का,
जन्म जयंती है आज हमारे भगवान महावीर का |

माता त्रिशला के थे वह लाल दुलारे,
सिद्धार्थ राजा के थे वह आँखों के तारे,
तीस वर्ष की आयु में त्याग दिया जिसने संसार,
आत्म कल्याण के लिए लिया सन्यास का आधार,
जन्म से ही जिनको प्राप्त थे तीन ज्ञान,
सन्यास के बारह वर्षों बाद हुआ जिनको केवल ज्ञान,
लीला है यह हमारे चौबीसवें तीर्थंकर की,
जन्मजयंती है आज हमारे भगवान महावीर की |

सन्यास उपरांत उनके जीवन में आए उपसर्ग कई,
और उनके पथ पर चलने वाले बने अनुयाई कईं,
सोलह सतिया, बीस विहरमान और गणधर थे जिनके ग्यारह,
जियो और जीने दो का पूरे देश में लगाया नारा,
बहत्तर की आयु में पावापुरी से हुए जो मोक्ष को प्रस्थान,
आज भी सारा देश करता है उनका ही गुणगान,
जीवन की कविता है यह उस अतिवीर की,
जन्म जयंती है आज हमारे भगवान महावीर की |
जन्म जयंती है आज हमारे भगवान महावीर की |

 दीक्षित राज बोहरा
Tamilnadu 

समाधान - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

समाधान - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

जिंदगी और समस्या का है, चोली-दामन का साथ।
जब तक जिंदगी रहती, 
समस्या नहीं छोड़ती हाथ।
पर ऐसी कोई समस्या नहीं, जिसका समाधान नहीं।
जहांँ समस्या है, 
समाधान है वहीं।
जीवन पर्यंत समस्याएं, 
साथ नहीं छोड़तीं।
कभी-कभी कई समस्याएंँ, 
एक साथ धावा बोलतीं।
एक समस्या का समाधान होता नहीं, दूसरी समस्या मुँह बाये खड़ी मिलती है।
यह जिंदगी है यारों, चुनौतियां हमें स्वीकार करनी ही पड़ती हैं।
समस्या आने पर, रहते है दो ही विकल्प।
या तो समस्या से भागो, या समाधान खोजने का लो संकल्प।
जब समस्या विकट लगे, समाधान नहीं दिखे, थोड़ा धीरज धरो।
आँखें बंद करो, लम्बी सांँस लो, तनाव से खुद को मुक्त करो।
समस्या छोटी हो या बड़ी, 
हाथ पर हाथ धरे रहने से काम नहीं चलेगा।
दिमाग के घोड़े को, 
दौड़ाना ही पड़ेगा।
पहले समस्या की जड़ तक जाओ, 
समस्या का खोजो कारण। 
मन शांत रखकर सोचो, 
कैसे होगा इसका निवारण।
संकट में ही तो हमें, 
अपनी क्षमता का पता चलता है।
सोना तपता है, 
तभी तो कुंदन बनता है।
इतिहास साक्षी है, 
हमारे महापुरूषों ने कितनी समस्याओं का सामना किया।
मेहनत किया, समाधान खोजा,
विजय पताका फहरा दिया।
सकारात्मक सोच रखो, समाधान मिल जाएगा।
तुम्हारा अपना अनुभव आखिर, किस दिन काम आयेगा।
समस्याएं जीवन का अभिन्न अंग है, 
जिंदगी के साथ-साथ चलती हैं।
ये समस्याएं ही कभी-कभी, हमारी जिंदगी में चमत्कार भी करती हैं।
समस्या कभी कह कर नहीं आती, 
अचानक ही आती है।
आकर कभी-कभी, जोंक की तरह चिपक जाती हैं।
पर इस चिपके जोंक को, 
हमें हटाना होगा।
हर समस्या का, 
समाधान निकालना होगा। 
कठिनाइयाँ, परेशानियाँ, बाधाएँ, समस्याएँ,
साथ नहीं छोड़तीं जीवन भर।
पर दृढ़ इच्छा शक्ति, सकारात्मक सोच, मेहनत से इन पर काबू पाएंगे हम, इन्हें नहीं हावी होने देंगे हम खुद पर।
 
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
West Bengal 

समझौता - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त -

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी 
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
समझौता  - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त - 

दो परिवारों के मिलने से
शादी का समझौता होता है ।
लड़का लड़की के समझौते से   
पति-पत्नी का रिश्ता जुड़ता है ।

शादी का अटूट बंधन ही
जीवन भर चलता रहता है ।
दो परिवारों का समझौता ही
पति-पत्नी को साथ में जोड़ता है ।

सारा सच पति-पत्नी का रिश्ता 
दोनो  का आपस में जुड़ता है ।
एक दूजे का साथ निभाते 
जीवन भर रिश्ता चलता है ।

पति पत्नी दोनो आपस में 
जीवन भर साथ निभाते हैं ।
एक साथ छोड़कर चला जाए
पहाड़ से ये दिन कैसे कटते हैं ।

सुख की कल्पना करना ही
जीवन में अछूता लगता है ।
किसी एक का साथ छूट जाए
एक दिन काटना मुश्किल होता है ।

पति पत्नी जीवन के साथी है
जीवन के सफर में मिलते हैं।
हम सफर साथी जब बनते हैं
जीवन भर साथ निभाते हैं ।

सारा सच पति पत्नीका आपस 
में जीवन का रिश्ता जुड़ता है ।
जीवन साथी बनाकर रहते हैं
कदम कदम पर साथ निभाते हैं।

पति संग पत्नी का रिश्ता
जब भी आपस में जुड़ता है।
जीवन साथी एक दूजे के होते
जीवन भर का साथ रहता है।

माता-पिता का घर छोड़कर
पति संग ससुराल जाती है ।
जीवन साथी बनने का शादी में
पति के साथ बचन निभाती है।

सारा सच पति संग सुख पाने 
को अर्धांगिनी बनकर रहती है ।
पत्नी प्रेमिका बनकर भी
तन मन को समर्पित करती है।

जीवन साथी के रिश्तों को
पत्नी बनकर ही निभाती है ।
सुख दुख की सच्ची साथी
जीवन साथी हमसफर होती है।

जीवन की अंतिम सांसों तक
आपस में साथ निभाते हैं ।
 सारा सच सुख दुख बांटकर
सच्चे जीवन साथी बनकर रहते हैैं ।

 महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
    जबलपुर म प्र/

मेल- मिलाप - कमल धमीजा

मेल- मिलाप - कमल धमीजा

प्यार की भावना
         दिल में जगाए रखें 
मेल-मिलाप का सबक  
       पढ़ाई रखें, 

भारत के संस्कृति 
       सिखाती है भाईचारा
 इसे धर्मो में न बांटो, 
      इंसानियत बनाई रखें।

इसको मारो उसको काटो 
   नफ़रत धर्म पे भारी है
 नहीं सिलसिला आज का है, 
     सदियों से तो जारी है

एक सूरज इक चाॅंद है, 
          सबका यारों
एक हवा इक पानी है
   खून लाल है सबका
         फिर भी! 
नफ़रत से भरी रवानी है

बेरुखी गद्दारी नफ़रते
   रक्खा क्या है इन  
        बातों में
बेमतलब के किस्से छोड़ो
   सब अपने हैं दोस्तों   
   मेल-मिलाप बनाई रखें! 

स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
फरीदाबाद- हरियाणा