लोकतंत्र - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
'जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा शासन,'
अब्राहम लिंकन ने उन्नीस नवम्बर, अठारह सौ तिरसठ को 'गेटीसबर्ग संबोधन' में दी लोकतंत्र की यह परिभाषा।
जनता सदा सुखी रहे,
होती हम सबकी यह अभिलाषा।
लोकतांत्रिक सरकार का काम है,
सही व्यवस्था सुनिश्चित करना।
जनता की सुरक्षा, समाज में शांति बनाए रखना।
विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, लोकतंत्र के हैं तीन अंग।
लोकतंत्र के तीनों अंग ऐसे काम करें, देखने वाले रह जाए दंग।
देश की सरकार हो, या राज्य की हो सरकारें।
लक्ष्य सबका एक हो, सबको लेकर आगे बढ़े, फैलाएं भाईचारे।
बेरोजगारी नहीं रहे, महंगाई कम करें।
जनता की उम्मीद पर खरा उतरे, समाज उन्नति करे।
जनता और सरकार का संबंध है गहरा।
जनता ही सरकार बनाती, जनता ही इस पर रखती पहरा।
जनता खुश नहीं, सरकार बदलते देर नहीं लगती।
सरकार अपना कर्तव्य निभाये,
जनता के मुख पर खुशी झलकती।
जनता और सरकार में,
है अन्योन्याश्रित संबंध।
जनता की बात सरकार तक पहुंचे, हो ऐसा प्रबंध।
नेता अपने क्षेत्र की जनता की, खुशियों का रखें ध्यान।
जनता को न्याय मिले, जनता को हो अपने अधिकारों का ज्ञान।
सिर्फ सरकार की जवाबदेही नहीं, हमारा भी है कुछ फर्ज।
हम भी अपना कर्तव्य निभाएं, नहीं बने हम खुदगर्ज।
अपने नेता चुनते समय हम
किसी के बहकावे में न आएं, अपने विवेक का उपयोग करें।
उम्मीदवार का इतिहास देखें,
उनकी ईमानदारी, कार्य क्षमता, योग्यता के आधार पर
ही, उनको अपना वोट देना सुनिश्चित करें।
'अंधा बाँटे रेवड़ी फिर-फिर अपनों को दे,' अर्थात अधिकार मिलने पर लोग अपने ही लोगों का फायदा करते हैं, हमने पढ़ी है यह कहावत।
इसलिए नेता ऐसा चुने, जो अपने पराए में फर्क न करें,
बिना बात नहीं करें
किसी से अदावत (शत्रुता, विरोध)।
लोकतांत्रिक सरकार में, जनता के पास होती असली ताकत।
जनता भी अपने कर्तव्य सही ढंग से निभाए, सरकार की मदद करने की डाले आदत।
सरकार और जनता के बीच, अच्छा संबंध होगा।
सरकार भी टिकेगी,
देश का विकास अवश्यंभावी होगा।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
वैस्ट बंगाल
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