Friday, 28 August 2026

आज के युग की सच्चाई / Neha

आज के युग की सच्चाई / Neha 

आज के युग की यही है सच्चाई,
तुम कौन हो भाई ?
जब तक स्वार्थ है, तब तक अपनापन,
फिर चेहरे पर नकली भाईचारा और  दिखावटी अपनापन।

तुम अच्छे हो तब तक ही,
जब तक मेरी कमियाँ तुमने छिपाई,
सच कहा तो रुठ गए सब,
झूठ बोलो तो सब मुस्कुराई।

रिश्ते अब नाप-तोल में बँटते हैं,
सच्चाई सुनकर सब तिलमिलाते हैं,
जो आईना दिखाए, वो दुश्मन कहलाए,
जो झूठ सजाए, वही दोस्त कहाए।

मतलब की डोर से बँधे हैं रिश्ते,
सच्चाई का वजन अब कौन उठाए?
आज का जमाना चाहता है चापलूसी,
सच्चे शब्दों से तो सब कतराए।

Neha 
Delhi 

राजनीति: नेता व जनता कैसे हों / डा मंजु चावला

 राजनीति: नेता व जनता कैसे हों / डा मंजु चावला

हमारे नेता कैसे हों, ऐसे हों या वैसे हों,
देश का भला समझें जो, मेरे ख्याल से वैसे हों ।

दूसरे को नीचा दिखाना , ही ना जिनका मकसद हो,
सुनने की खूब क्षमता, पर बोलने की कुछ हद हो,
वही कहें कि देश का नाम , हो दुनिया में रोशन, ऐसे हों,
देश का भला समझें जो, मेरे ख्याल से वैसे हों ।

सबकी ख्वाहिश पूरा करना, किसी के लिए भी मुश्किल है,
मूल ज़रूरतें पूरी हो जाएं, इतना करना मुमकिन है,
कोशिश करके ज्यादा से ज्यादा, जनता को समझें , ऐसे हों,
देश का भला समझें जो, मेरे ख्याल से वैसे हों।

रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा , सेहत, यात्रा रोज़गार मिले,
जनता अपने नेता का, चुनाव सोच समझ के करे,
काबिलियत  ईमानदारी हो, ना मांगो फ्री के पैसे हों,
देश का भला समझें जो, सब नेता जनता ऐसे हों,

चाणक्य जैसी सूझ बूझ से राजनीति स्वच्छ करें, ऐसे हों,
कीमती वोट अवश्य डालें, ताकि जनता के नेता ऐसे हों,
देश का भला समझें जो , जनता और नेता ऐसे हों ।

           ' ज़रिया ' डा मंजु चावला
Chandigarh 

कुर्सी का खेल / डॉ अनुपमा वर्मा

 कुर्सी का खेल / डॉ अनुपमा वर्मा

राजनीति की बिसात बिछी,
हर मोहरा तैयार है,
कुर्सी जिसकी हाथ लगी,
वही आज सरदार है।
कल तक थे जो साथ-साथ,
आज बने बागी हैं,
इस्तीफे की चिट्ठी लेकर,
सबकी आँखों में आँधी है।
आदेश आया—“शांत रहो”,
सूचना आई—“बवाल है”,
नेता बोले—“सब नियंत्रण में”,
जनता बोली—“क्या कमाल है!”
कहीं भगदड़, कहीं हंगामा,
कहीं भाषणों की भरमार,
एक-दूजे पर आरोप लगाकर,
सब करते अपना प्रचार।
जो कल तक थे मंच के साथी,
आज वही गिरफ्तार हैं,
सियासत के इस खेल में,
कितने चेहरे बेकरार हैं।
बोखलाहट जब बढ़ जाती है,
शब्दों की तलवार चले,
जनता पूछे—“काम बताओ”,
नेता फिर समाचार बने।
कुर्सी बोले—“मुझको बचाओ”,
नेता बोले—“मैं तैयार”,
देश खड़ा है चुपचाप मगर,
पूछ रहा है बारंबार—
“इस्तीफा हो या बगावत हो,
बवाल हो या गिरफ्तार,
जनता के हित में कौन खड़ा है
कौन निभाएगा अपना किरदार?”
राजनीति का खेल रहे,
पर मर्यादा मत हारो,
सत्ता आए, सत्ता जाए,
जनता को मत भूलो यारो!
कुर्सी केवल कुर्सी है,
जनसेवा ही सम्मान,
लोकतंत्र तभी मजबूत बने,
जब जागे हर इंसान।

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab 

Thursday, 27 August 2026

आदेश / उषा पांडे शुभांगी

 आदेश / उषा पांडे शुभांगी

( दोहे )


चलो सत्य के मार्ग पर, मानो पितु आदेश।
कृपा करेंगे देवता, मिट जाएगा क्लेश।।

जग के पालक तीन हैं, ब्रह्मा विष्णु महेश।
वेदों के हर वाक्य को, मानो तुम आदेश।।

गुरु जी देते ज्ञान हैं, दो उनको सम्मान।
देते वे आदेश जो, 
देना उस पर ध्यान।।

दशरथ नंदन राम ने, माना गुरु आदेश। 
सबका तुम इज्जत करो,
दिया हमें संदेश।।

 माता की हर बात को, मानो तुम आदेश।
विजयी होंगे तुम सदा, करें भला सर्वेश।।

करो नहीं अवहेलना, जो माँ  दे आदेश।
मात-पिता सेवा करो, दें आशीष गणेश।।

कष्ट बड़ों को जो दिया, मान
नहीं आदेश। 
भला नहीं उसका हुआ, कहते हैं शैलेश।।

नहीं फैसला लो कभी, जब आवे आवेश।
शांत चित्त आगे बढ़ो, रहे साथ देवेश।।

गौरा जी ने तप किया,  मिले उन्हें महेश।
माना जो आदेश प्रभु, कृपा किये योगेश।।

हरिश्चंद्र ने त्याग दी, सब ऐशो आराम।
माने हर आदेश ऋषि, लिए ईश
निज धाम।।

रहना माता संग ही, जाना नहीं विदेश। 
मान मात आदेश तुम, करना सदा निवेश।।

वेदों का है सार यह, मानो गुरु आदेश। 
पूरे होंगे काम तव, दया करें अखिलेश।।

डॉ० उषा पांडे शुभांगी 
स्वरचित
वैस्ट बंगाल 

राजनीति / संजय वर्मा

 राजनीति / संजय वर्मा

ओ ऊपर वाले

बंद करवाओ ये मुफ्त की रेवड़ी बाटने की राजनीति

ये सहायता गरीबपन को दर्शाती

देश-विदेश में छवि पिछड़ापन लाती है।

राजनीति मुफ्त का माल देती

कर वृद्धि  से बह जाती गरीब की नाव

उत्पादन कोख उजाड़ती जाती राजनीति

इसमें उलझने आए भूखे मरने की नोबत आती

राजनीति मेहनती इन्सान को आलसी बनाती

इससे ही से तो विकास की गाड़ी पिछड़ जाती

खुद और सरकारों को कर्ज में दफ़नाती है।

अर्थव्यवस्था में सुधार के सपने देखना हो तो

मुफ्तखोरी की राजनीति बंद करो

मुपतखोरी की लत लग जाए तो

विकास पर लग जायेगा जंग

कल्याणकारी योजनाएं तमाशा देख कर

राजनीति के संग हो जाएगी दंग।

संजय वर्मा "दृष्टि"

राजनीति / गोरक्ष जाधव

 राजनीति / गोरक्ष जाधव


कहीं तोड़ कहीं जोड़,
गठबंधन है लालच का,
नेता लगे भले अपने,
जिम्मेदार बुरी हालत का।

वादे पे वादे इनके खूनी इरादे,
गठजोड़ है शैतानों का,
वोट की करे राजनीति,
देशभक्ति मुद्दा चुनाव का।

नौटंकी कर चुनकर आए,
परमभक्त बने जनता का,
विनम्रता का बनकर पुतला,
पैसा लुटे फिर जनता का।

सत्ता की बड़ी लालसा,
षड़यंत्र रचे बग़ावत का,
पद की चाह में निरंतर,
शक्ति प्रदर्शन चेलों का।

वादों को सारे भूल जाएं,
यह पैंतरा है बेशर्मों का,
पाँच साल बाद ही देखे,
मुख जनता की हाल का।

कहीं तोड़ कहीं जोड़,
गठबंधन है लालच का।
नेता लगे भले अपने,
जिम्मेदार बुरी हालत का।

गोरक्ष जाधव©®
मंगळवेढा,महाराष्ट्र.

स्वास्थ्य / अनन्तराम चौबे

 राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 

साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
विषय ...स्वास्थ्य 
दिनांक... 30/6/2026
नाम.. महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर 
कविता...

स्वास्थ्य 

स्वास्थ्य शरीर निरोगी काया 
स्वास्थ्य शरीर जीवन आधार ।
सुख शांति परिवार  में होगी 
स्वास्थ्य सुखी रहेगा घर परिवार ।

ईश्वर ने सभी का शरीर बनाया 
शरीर में अंग बहुत होते हैं  ।
हाथ पैर  नाक आंख कान 
और भी अंग शरीर में होते हैं ।

पुरुष और महिला के शरीर भी 
कुछ अंग अलग अलग होते हैं ।
अलग अंगों की पहचान से ही
महिला पुरुष अलग होते हैं ।

शरीर का कोई अंग दुखता है
दैनिक कार्य मुश्किल होता है।
पैरों के घुटनों में जब दर्द होता है
बहुत ही मुश्किल हो जाता है ।

स्वास्थ्य शरीर पावन धाम है
तन मन भी सुखमय रहता है ।
जीवन में सुख चैन जब रहता
पावन धाम सा बन जाता  है ।

मन प्रसन्न निरोगी काया हो
स्वास्थ्य जरूरी है आधार ।
सुख शांति और भाईचारे से
भरा पूरा हर घर परिवार  ।

तन मन स्वास्थ्य रहेगा जब 
सुखी जीवन भी रहेगा उसका ।
आपस में जो मिलकर रहेगा
निरोगी जीवन होगा उसका ।

सारा सच काम क्रोध मोह माया 
का लालच जब मन में रहता है ।
सारा सच मन अशांत हो जाता है
स्वास्थ्य पर असर भी पड़ता है ।

शारीरिक मेहनत जो नही करता
शरीर शिथिल भी हो जाता है ।
सारा सच शरीर दुर्बल रहता है
मेहनत का काम नही होता है ।

स्वास्थ्य जरूरी पावन धाम है 
शारीरिक मेहनत करना होगा ।
काम नही कुछ करना है तो
सुबह शाम घूमना जरूरी होगा।

घर के आसपास में हमेशा
स्वच्छता, सफाई जरूरी है ।
शुद्ध हवा स्वास्थ्य के लिए 
सभी के लिए भी जरूरी है ।

घर के आसपास पेड़ पौधे हों
जो स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं।
सारा सच शरीर स्वास्थ्य रखने 
में शुद्ध पर्यावरण भी जरूरी है।

जहां रहो साफ सफाई से रहना 
वातावरण भी शुद्ध साफ रहेगा।
प्रदूषण भी आसपास नही रहेगा 
सभी का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा 

स्वास्थ्य शरीर सुखी जीवन
सुख शांति का आधार है ।
स्वास्थ्य जरूरी रहेगा तभी 
तो सुखी होगा घर परिवार है ।

 महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
    जबलपुर म प्र /8265/
लंदन. यू एस ए. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड 

आज़ाद हिन्द - एक गीत / ललित कुमार शर्मा

आज़ाद  हिन्द - एक गीत / ललित कुमार शर्मा


देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

पहले मुगलों  ने मिलकर हम सब पर अत्याचार किए 
फ़िर अंग्रेज़ो ने कर गुलाम छीन सब अधिकार लिए 
फूट डाल और  राज करो इक ये ही ध्येय अपनाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

देकर  लालच भाई को अपने भाई से  ही लड़वाते थे
लड़वाकर आपस में हमको हर प्रांत यहाँ हथियाने थे
धीरे धीरे फिर भारत पर कुछ यूँ अधिकार जमाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

1857 में पहला आज़ादी उदघोष हुआ
कारतूसों में चर्बी से सेना में भारी रोष हुआ
विद्रोही कह मंगल पांडे को फिर फाँसी लटकाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था


फ़िर तो जैसे हर दिल ने बस एक ही था पैगाम दिया
आज़ादी है अधिकार हमारा सबने नारे का नाम दिया
देश के कोने कोने में फिर यही आंदोलन अपनाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

जन जन का फिर जोश देख अंग्रेज़ी शासक घबराए थे 
विद्रोही स्वर उठते ही खूब लाठी डंडे चलाए थे
जबरन बंदी बना सबको, जेलों में पहुँचाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

एक तरफ गाँधी अहिंसा से लड़ने को बोला करते थे
दूजे थे वो क्रांतिवीर जो जान हथेली पे रखते  थे
कुचलने आवाज़ सभी की सत्ता ने हर रस्ता अपनाया था 
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

भगत, सुखदेव और  राजगुरु सब फांसी पे झूल गए 
करने आज़ाद भारत माँ को , अपनी माँ को भूल गए 
जान दे आज़ाद ने अपनी आज़ादी का अलख जगाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

लेने को स्वराज सुभाष ने आज़ाद हिन्द फौज बनाई थी
आज़ादी  की भीषण अग्नि ने ब्रिटिश सत्ता जलाई थी
जन जन के संघर्षों ने यह देश आज़ाद कराया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

आओ हम सब उन वीरों को हाथ जोड़कर याद करें
देश का स्वर्णिम काल लौटा, नव जीवन आबाद करें
जाति,भाषा,धर्म भूलकर,जिस भारत का स्वप्न सजाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

स्वरचित एवं मौलिक रचना 
ललित कुमार 
नई दिल्ली

Wednesday, 26 August 2026

सफलता की पहली सीढ़ी / Uzmataranum


संघर्ष : सफलता की पहली सीढ़ी

संघर्ष जीवन का वह सत्य है, जिससे कोई भी व्यक्ति पूरी तरह बच नहीं सकता। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिस्थितियों, असफलताओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। संघर्ष हमें केवल कठिनाइयों से लड़ना नहीं सिखाता, बल्कि हमारे व्यक्तित्व को मजबूत और आत्मनिर्भर भी बनाता है।
मनुष्य के जीवन में संघर्ष का आरंभ बचपन से ही हो जाता है। एक विद्यार्थी अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए मेहनत करता है, एक किसान अच्छी फसल के लिए दिन-रात परिश्रम करता है और एक कर्मचारी अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करता है। इन सभी के पीछे संघर्ष और धैर्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बिना मेहनत के प्राप्त सफलता लंबे समय तक टिक नहीं सकती।
संघर्ष के समय व्यक्ति को अनेक बार असफलताओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में निराश होना स्वाभाविक है, लेकिन असफलता को अंत मान लेना उचित नहीं है। वास्तव में असफलता हमें अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें सुधारने का अवसर देती है। जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होता, वही आगे चलकर सफलता प्राप्त करता है।
संघर्ष हमें धैर्य, साहस, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। यह हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, निरंतर प्रयास से उन्हें बदला जा सकता है। इतिहास में ऐसे अनेक महान व्यक्तियों के उदाहरण मिलते हैं जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य को प्राप्त किया।
अतः संघर्ष को जीवन का बोझ नहीं, बल्कि सफलता की पहली सीढ़ी समझना चाहिए। कठिन रास्ते ही हमें मंजिल की वास्तविक कीमत समझाते हैं। यदि हमारे भीतर दृढ़ इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास करने का साहस है, तो कोई भी संघर्ष हमें हमारी मंजिल तक पहुँचने से रोक नहीं सकता।

Uzmataranum
Karnataka

स्वाभिमान / डॉ० उषा पाण्डेय

 स्वाभिमान / डॉ० उषा पाण्डेय

स्वाभिमान, आत्मसम्मान, खुद की नजरों में अपना मान बनाए रखना। 
अपना मूल्य पहचानना, अपनी गरिमा बनाए रखना।
समय कितना भी प्रतिकूल हो, स्वाभिमान से समझौता कभी न करना।
अपनी बात को शालीनता से रखना, अपनी आत्मा पर चोट कभी न सहना।
'आवत हिय हरषै नहीं,
नैनन नहीं सनेह। 
तुलसी तहाँ न जाइए,
कंचन बरसे मेह।।'
तुलसी दास जी के विचार।
जहाँ लोग आपको  देखकर खुश न हो वहाँ जाना नहीं, भले वहाँ हो धन का भंडार।
स्वाभिमान, आत्मसम्मान है जरूरी, निज के विकास के लिए।
आत्म निर्भर बनने के लिए, खुद में आत्मविश्वास जगाने के लिए।
"तुलसी पर घर जाइ के, दुख न कहिए रोई।
मान गुमावे आपनो, बाट न लेवे कोई।"
किसी के सामने अपना दुखड़ा  न रोइए, गिरेगा आपका 
मान- सम्मान।
आपकी गरिमा कम होगी, 
रखना है यह ध्यान।
स्वाभिमान की कीमत पर,
कोई धन नहीं चाहिए।
स्वाभिमान बना रहे, हमेशा प्रयत्न करना चाहिए।
'स्वाभिमान: सर्वोपरि अस्ति',
स्वाभिमान सबसे ऊपर है।
स्वाभिमान पर आघात, 
सहना हमें क्यों कर है?
स्वाभिमान खुद में विकसित करना पड़ता है, यह बाजार में बिकता नहीं है।
स्वाभिमानी पुरुष का  लाभ, कोई कभी उठा सकता नहीं है।
"स्वाभिमान शरीर के लिए ऑक्सीजन जैसा है। ऑक्सीजन के बिना शरीर मर जाता है और स्वाभिमान के बिना इंसान की आत्मा मर जाती है।" थॉमस साज ने हमें बताया।
"स्वाभिमान अनुशासन का फल है; खुद को ना कहने की क्षमता के साथ ही गरिमा का अहसास बढ़ाता है।"
अब्राहम जोशुआ हेशेल ने समझाया।
अपने सिद्धांतों से समझौता कभी  न करना, चाहे हो कोई मजबूरी।
नैतिकता का दामन न छोड़ना, 
मेहनत के बल पर करना, अपनी इच्छाएँ पूरी।
जिस काम को करने की तुम्हारी जमीर इजाजत न दे,
कभी मत करना।
किसी गरीब की आह न लेना,
अन्याय कभी मत करना।
सकारात्मक सोच सदा रखना, खुद पर भरोसा रखना।
स्वाभिमान के साथ जीना,
सच कहने की हिम्मत रखना।
स्वाभिमानी बनना अहंकारी नहीं, स्वाभिमान उन्नति की ओर ले जाता है। 
अहंकारी मानव का विवेक काम नहीं करता, बहुत दुख पाता है।
स्वाभिमानी पुरुष शांत चित्त रहता है, अहंकारी रहता विकल।
स्वाभिमान के साथ जीना, कमजोरों का बनना संबल।
बच्चों में हमें स्वाभिमान का भाव जगाना होगा। 
खुद पर विश्वास रखें, यह बच्चों को समझाना होगा।
स्वाभिमान से जीती हूँ, किसी का अपमान करना नहीं मेरी फितरत।
सबसे प्यार से मिलजुल कर रहती हूँ, नहीं करती किसी से कभी नफरत।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 
वैस्ट बंगाल 

आजादी / सुरेश कंठ

 शीर्षक -       “ आजादी “ 

                     *****
हिंदी हमारी सुलभ भाषा है 
                हिंदी  राष्ट्रभाषा  घोषित हो 
हम सब की  है यही पुकार
                इसमें तनिक नहीं विलंब हो 

हिंदी में ही करते हैं भजन
                 भजन के बिना   चैन नहीं 
 सात समुंदर पार भी जाएं
              हिंदी के बिना सुख-चैन नहीं 

बैंक ने भी घोषणा की 
                   हिंदी में भी पत्राचार करें 
हिंदी में लिखा सारा चेक 
                 खुशी से सब स्वीकार करें 

बड़े प्यार से करते राही
               हिंदी है जन जन की पुकार
बच्चे बूढ़े सब में चलन है 
            यही है पढ़ने लिखने में शुमार 

हौसला मत टूटने देना प्यारे
           हिंदी ही देश की सर्वोत्तम प्यारे 
वरना आने वाली पीढ़ी 
              कभी क्षमा नहीं करेंगी प्यारे 

देश की सुंदर भाषा है हिंदी
          बोलने में अच्छी लगती है हिंदी
मन में प्रीत बनाए हिंदी 
                  जग में प्रीत बनाए हिंदी 

हिंदी है हम वतन की भाषा 
       हिंदी में बोलने की आजादी मिले
यही है सब जन जन की पुकार
      हिंदी में लिखने की आजादी मिले

       बोलो ओम नमः शिवाय 
       बोलो ओम नमः शिवाय 
                  *****
           ***  जय हिंद  ***
 रचयिता- वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
             बथनाहा, अररिया
                   बिहार

कविता - आज़ादी के दीवाने / बलवान सिंह मानव

कविता - आज़ादी के दीवाने / बलवान सिंह मानव 

आओ करें सब नमन, हम उन जवानों को, 
जो हैं श्रद्धा के पात्र, आज़ादी के दीवानों को 
      आओ करें सब नमन ........ 
यारों! जिन्होंने तोड़ी थी ग़ुलामी की दीवारें, 
वे कोई गैर नहीं, थे भारत माता के प्यारे, 
खेली अपने खून से, आज़ादी की होली, 
गवां दी अपनी जान, बन शहीदों की टोली, 
कैसे भूला सकते हैं, हम उनके बलिदानों को?
       आओ करें सब नमन ........... 
शिवाजी ने दिखाए, गुर छापामार के,
राणा प्रताप ने डराया, भाले के वार से,
लक्ष्मी, तात्यां, दादा फड़न ने, रचा 57 का इतिहास,
 चौहान, टीपू ने किया, था गोरों का विनाश,
दिखाकर हिम्मत जलाया, आज़ादी की मसालों को,
     आओ करे सब नमन........
हमारे संतों ने दिया, सदमार्ग का रास्ता, 
सदा रहें तन - मन में, रहे उनमें ही आस्था, 
सुखाया बुद्ध और फुले ने, मानव समानता को, 
भीमराव ने भगाया था, जातिवाद की दासता को, 
याद करते रहें यूँ ही, हम उन महानों को, 
       आओ करें सब नमन......
सुभाष ओर आज़ाद ने, छुड़ा दिए थे छक्के, 
भगत - सुखदेव - राजगुरु ने, हँस कर पहने फंदे, 
लाल - बाल - पाल ने, नींव हिला दी गोरों की,
बिस्मिल्ल, और उधम ने, नींद छीनी गोरों की,
धूल चटाई,चने चबवाए,उन गौरे कमीनों को,
     आओ करें सब नमन.....
सावरकर - विनोवा भी, हुए संघर्ष में शामिल 
 पीछे नहीं हटे थे, नेहरू जैसे क़ाबिल, 
गाँधी ने दिलायी आज़ादी, कार्य किया महान, 
राजेंद्र प्रसाद ने पकड़ी, भविष्य की कमान, 
याद रखें हम और भी, बाकी बचे नामों को, 
   आओ करें सब नमन...... 
जो हैं श्रद्धा के पात्र, आज़ादी के दीवानों को।
 आओ करें सब नमन..... 
       कवि - बलवान सिंह मानव 
  (स्वरचित एवम् मौलिक रचना)
Haryana 

हमारा संविधान / कादरभाई एन. मनसुरी

हमारा संविधान / कादरभाई एन. मनसुरी   

 
'विभिन्नता में एकता' की खुशनुमा खुशबू से महकता खुशहाल हिन्दुस्तान है। 

विश्व में सबसे लम्बा हस्तलिखित संविधान भारत देश की अनूठी शान है।

संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकरजी को कोटि-कोटि नमन है।

'भारत के हम लोग' प्रस्तावना से प्रारंभ संविधान देश का सर्वोच्च कानून है।

हिन्दी-अंग्रेजी भाषा में लिखित संविधान उन्नत राष्ट्र की अनोखी पहचान है।

शांतिनिकेतन के चित्रकारों का संविधान कलाकृति में विशिष्ट योगदान है।
 
भारतीय सर्वेक्षण विभाग-देहरादून में ऐतिहासिक प्रकाशन का निर्वहन है। 
 
26 नवम्बर 1949 को अपनाया गया भव्यतम भारत का अनुशासन है।
 
26 जनवरी 1950 को लागू किया गया भारत का मनोहर संविधान है।

2 वर्ष 11 माह 18 दिन की अवधि में परिपूर्णता की खुशी मनभावन है।

समान अवसर-समान अधिकार-कल्याणकारी सद्भावना का परिपालन है।

संप्रभु-समाजवादी-धर्मनिरपेक्ष स्वतंत्रता में घोषित गणराज्य का जीवनदर्शन है।

सार्वजनिक वयस्क मताधिकार में अतुलनीय आनंद से भरा अपनापन है।

नारी सम्मान-शिक्षा-संस्कृति-बंधुत्व-समरसता में  जगमगाता जीवन है।

'सर्व धर्म समभाव' की स्वतंत्रता में सुखद-सुहावना सौहार्दपूर्ण संवेदन है। 

मौलिक अधिकार-संवैधानिक उपचारों में पूर्णतया सुनिश्चित प्रावधान है।

भारतीय संविधान में लोकतांत्रिक गणराज्य का प्रतिबद्ध आश्वासन है।

सुरम्यता-सौम्यता से सुशोभित संविधान भारत की आन-बान-शान है।