स्वाभिमान / डॉ० उषा पाण्डेय
स्वाभिमान, आत्मसम्मान, खुद की नजरों में अपना मान बनाए रखना।
अपना मूल्य पहचानना, अपनी गरिमा बनाए रखना।
समय कितना भी प्रतिकूल हो, स्वाभिमान से समझौता कभी न करना।
अपनी बात को शालीनता से रखना, अपनी आत्मा पर चोट कभी न सहना।
'आवत हिय हरषै नहीं,
नैनन नहीं सनेह।
तुलसी तहाँ न जाइए,
कंचन बरसे मेह।।'
तुलसी दास जी के विचार।
जहाँ लोग आपको देखकर खुश न हो वहाँ जाना नहीं, भले वहाँ हो धन का भंडार।
स्वाभिमान, आत्मसम्मान है जरूरी, निज के विकास के लिए।
आत्म निर्भर बनने के लिए, खुद में आत्मविश्वास जगाने के लिए।
"तुलसी पर घर जाइ के, दुख न कहिए रोई।
मान गुमावे आपनो, बाट न लेवे कोई।"
किसी के सामने अपना दुखड़ा न रोइए, गिरेगा आपका
मान- सम्मान।
आपकी गरिमा कम होगी,
रखना है यह ध्यान।
स्वाभिमान की कीमत पर,
कोई धन नहीं चाहिए।
स्वाभिमान बना रहे, हमेशा प्रयत्न करना चाहिए।
'स्वाभिमान: सर्वोपरि अस्ति',
स्वाभिमान सबसे ऊपर है।
स्वाभिमान पर आघात,
सहना हमें क्यों कर है?
स्वाभिमान खुद में विकसित करना पड़ता है, यह बाजार में बिकता नहीं है।
स्वाभिमानी पुरुष का लाभ, कोई कभी उठा सकता नहीं है।
"स्वाभिमान शरीर के लिए ऑक्सीजन जैसा है। ऑक्सीजन के बिना शरीर मर जाता है और स्वाभिमान के बिना इंसान की आत्मा मर जाती है।" थॉमस साज ने हमें बताया।
"स्वाभिमान अनुशासन का फल है; खुद को ना कहने की क्षमता के साथ ही गरिमा का अहसास बढ़ाता है।"
अब्राहम जोशुआ हेशेल ने समझाया।
अपने सिद्धांतों से समझौता कभी न करना, चाहे हो कोई मजबूरी।
नैतिकता का दामन न छोड़ना,
मेहनत के बल पर करना, अपनी इच्छाएँ पूरी।
जिस काम को करने की तुम्हारी जमीर इजाजत न दे,
कभी मत करना।
किसी गरीब की आह न लेना,
अन्याय कभी मत करना।
सकारात्मक सोच सदा रखना, खुद पर भरोसा रखना।
स्वाभिमान के साथ जीना,
सच कहने की हिम्मत रखना।
स्वाभिमानी बनना अहंकारी नहीं, स्वाभिमान उन्नति की ओर ले जाता है।
अहंकारी मानव का विवेक काम नहीं करता, बहुत दुख पाता है।
स्वाभिमानी पुरुष शांत चित्त रहता है, अहंकारी रहता विकल।
स्वाभिमान के साथ जीना, कमजोरों का बनना संबल।
बच्चों में हमें स्वाभिमान का भाव जगाना होगा।
खुद पर विश्वास रखें, यह बच्चों को समझाना होगा।
स्वाभिमान से जीती हूँ, किसी का अपमान करना नहीं मेरी फितरत।
सबसे प्यार से मिलजुल कर रहती हूँ, नहीं करती किसी से कभी नफरत।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
वैस्ट बंगाल

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