कविता - आज़ादी के दीवाने / बलवान सिंह मानव
आओ करें सब नमन, हम उन जवानों को,
जो हैं श्रद्धा के पात्र, आज़ादी के दीवानों को
आओ करें सब नमन ........
यारों! जिन्होंने तोड़ी थी ग़ुलामी की दीवारें,
वे कोई गैर नहीं, थे भारत माता के प्यारे,
खेली अपने खून से, आज़ादी की होली,
गवां दी अपनी जान, बन शहीदों की टोली,
कैसे भूला सकते हैं, हम उनके बलिदानों को?
आओ करें सब नमन ...........
शिवाजी ने दिखाए, गुर छापामार के,
राणा प्रताप ने डराया, भाले के वार से,
लक्ष्मी, तात्यां, दादा फड़न ने, रचा 57 का इतिहास,
चौहान, टीपू ने किया, था गोरों का विनाश,
दिखाकर हिम्मत जलाया, आज़ादी की मसालों को,
आओ करे सब नमन........
हमारे संतों ने दिया, सदमार्ग का रास्ता,
सदा रहें तन - मन में, रहे उनमें ही आस्था,
सुखाया बुद्ध और फुले ने, मानव समानता को,
भीमराव ने भगाया था, जातिवाद की दासता को,
याद करते रहें यूँ ही, हम उन महानों को,
आओ करें सब नमन......
सुभाष ओर आज़ाद ने, छुड़ा दिए थे छक्के,
भगत - सुखदेव - राजगुरु ने, हँस कर पहने फंदे,
लाल - बाल - पाल ने, नींव हिला दी गोरों की,
बिस्मिल्ल, और उधम ने, नींद छीनी गोरों की,
धूल चटाई,चने चबवाए,उन गौरे कमीनों को,
आओ करें सब नमन.....
सावरकर - विनोवा भी, हुए संघर्ष में शामिल
पीछे नहीं हटे थे, नेहरू जैसे क़ाबिल,
गाँधी ने दिलायी आज़ादी, कार्य किया महान,
राजेंद्र प्रसाद ने पकड़ी, भविष्य की कमान,
याद रखें हम और भी, बाकी बचे नामों को,
आओ करें सब नमन......
जो हैं श्रद्धा के पात्र, आज़ादी के दीवानों को।
आओ करें सब नमन.....
कवि - बलवान सिंह मानव
(स्वरचित एवम् मौलिक रचना)
Haryana

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