Thursday, 27 August 2026

आज़ाद हिन्द - एक गीत / ललित कुमार शर्मा

आज़ाद  हिन्द - एक गीत / ललित कुमार शर्मा


देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

पहले मुगलों  ने मिलकर हम सब पर अत्याचार किए 
फ़िर अंग्रेज़ो ने कर गुलाम छीन सब अधिकार लिए 
फूट डाल और  राज करो इक ये ही ध्येय अपनाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

देकर  लालच भाई को अपने भाई से  ही लड़वाते थे
लड़वाकर आपस में हमको हर प्रांत यहाँ हथियाने थे
धीरे धीरे फिर भारत पर कुछ यूँ अधिकार जमाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

1857 में पहला आज़ादी उदघोष हुआ
कारतूसों में चर्बी से सेना में भारी रोष हुआ
विद्रोही कह मंगल पांडे को फिर फाँसी लटकाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था


फ़िर तो जैसे हर दिल ने बस एक ही था पैगाम दिया
आज़ादी है अधिकार हमारा सबने नारे का नाम दिया
देश के कोने कोने में फिर यही आंदोलन अपनाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

जन जन का फिर जोश देख अंग्रेज़ी शासक घबराए थे 
विद्रोही स्वर उठते ही खूब लाठी डंडे चलाए थे
जबरन बंदी बना सबको, जेलों में पहुँचाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

एक तरफ गाँधी अहिंसा से लड़ने को बोला करते थे
दूजे थे वो क्रांतिवीर जो जान हथेली पे रखते  थे
कुचलने आवाज़ सभी की सत्ता ने हर रस्ता अपनाया था 
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

भगत, सुखदेव और  राजगुरु सब फांसी पे झूल गए 
करने आज़ाद भारत माँ को , अपनी माँ को भूल गए 
जान दे आज़ाद ने अपनी आज़ादी का अलख जगाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

लेने को स्वराज सुभाष ने आज़ाद हिन्द फौज बनाई थी
आज़ादी  की भीषण अग्नि ने ब्रिटिश सत्ता जलाई थी
जन जन के संघर्षों ने यह देश आज़ाद कराया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

आओ हम सब उन वीरों को हाथ जोड़कर याद करें
देश का स्वर्णिम काल लौटा, नव जीवन आबाद करें
जाति,भाषा,धर्म भूलकर,जिस भारत का स्वप्न सजाया था
देश की खातिर जब वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था
तब जाकर भारत माँ  ने आज़ाद  हिन्द  ये पाया था

स्वरचित एवं मौलिक रचना 
ललित कुमार 
नई दिल्ली

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