Friday, 30 January 2026

विमोचन पत्थर - भगवती सक्सेना गौड़

विमोचन पत्थर -  भगवती सक्सेना गौड़
अपनी कहानियों की पुस्तक "कलम की ताकत" का विमोचन के प्रोग्राम के बाद कोमल चतुर्वेदी घर वापस आ गयी थी। सम्मानित अतिथियों से वृहद रूप में आदर पाने के बाद मन बहुत प्रसन्न था। एकाएक विचार आया, कहाँ थी, कहाँ पहुँच गयी। और विचार उसे ले गए...एक परिवार में।
कोमल ने हिंदी साहित्य में एम.ए पास किया था, घर मे सब भाई बहन साइंस वाले ही थी। पापा ने जल्दी से कोमल के लिए संयुक्त परिवार में सरकारी नौकरी वाला लड़का देखा, और बिना कोमल की इच्छा जाने उसका विवाह कर दिया।
फिर बहू नामक पोस्ट की चौबीसों घंटे की नौकरी शुरू हो गयी, कभी कभी सबका प्यार बोनस के रूप में मिलता रहा।

पर उंसकी इच्छा हमेशा लिखने पढ़ने की होती, जिसका वो समय नहीं निकाल पाती, कोमल अपने नाम के अनुरूप न बन सकी तो वो पत्थर बन गयी, रोबोट बनकर ड्यूटी ही निभाती रहती।

उस पत्थर को कोई भी इधर उधर सरकाता रहा, सबकी इच्छा पूरी करने में कामयाब पत्थर था। उसके अंतर्निहित मन मे एक गठरी थी जिसमे संवेदनाये, भावनाये भरी थी।

घर मे सबको राह का रोड़ा प्रतीत होता था। क्योंकि उस पत्थर के नैनो में अंतर्ज्योति थी, गलत कार्य मे लाल होने की और खुशी में झर झर बहने की।

अचानक एक दिन उस पत्थर बनी कोमल के दिल के हालात समझकर उंसके बेटे ने कलम और डायरी का तोहफा दिया। और चुम्बकीय आकर्षण हुआ, पत्थर ने कलम को आलिंगन में लिया। उस कलम ने संवेदनाओं को झरने का रुप दे दिया। फिर तो कलम चल पड़ी, गति जेट से भी तेज थी, जीवन भर की गति विधियां जो सामाजिक भी थी, घरेलू भी थी, पन्नो में चित्रित हो गयी। बेटा ही माँ को पहचान सकता है, आज उसी बेटे ने माँ को लेखिका के रूप में प्रसिद्ध कर दिया था। विमोचन पुस्तक का करवा दिया।

और वो फिर से अपनी पुस्तक निहारने लगी।

स्वरचित
भगवती सक्सेना गौड़

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