राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी की
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु
विषय... पूजा - डा अनन्तराम चौबे अनन्त
पूजा
कण-कण में भगवान है
रोम रोम में भगवान है ।
मंदिर तो पूजा घर होता है
वहां पर रहते भगवान हैं ।
भगवान के मंदिर में सभी
श्रद्धा विश्वास से जाते हैं
छोटा बड़ा जो भी मंदिर हो
भगवान वहां पर रहते हैं ।
प्रसाद के लड्डू में मिलावट
कोई अधर्मी ही करता है ।
जाति धर्म बदनाम करने को
साजिश ऐसी कोई करता है ।
धर्म में श्रद्धा आस्था जो रखता है
मंदिर से भी वो जुड़ा रहता है ।
गृहस्थ जीवन को जीकर भी
जीवन अपना सफल बनाता है ।
मंदिर में ईश्वर की पूजा करना
समय मिले ध्यान लगाना ।
मनुष्य का तन मिला है तो
पूजा भक्ति भी करते रहना।
सुखमय जीवन जीना है
तो परोपकार भी करना है ।
सारा सच है जैसी सामर्थ हो
परोपकार भी, वैसा करना है ।
मंदिर में पूजा पुण्य का काम है
पुण्य का फल मीठा मिलता है ।
आज नहीं तो कल मिलता है
जीवन भी सुख मय रहता है ।
धर्म पूजा में श्रद्धा जो रखता है
फल भी उसको मिलता है ।
परोपकार करने वाला ही
सबकी दुआएं पाता रहता है ।
तुलसी, आंवला, पीपल के
वृक्षों की पूजा भी करते हैं ।
हिन्दू धर्म में मान्यता है कि
इन वृक्षों में ईश्वर वास करते हैं।
माता पिता की सेवा करना
कभी दुखी न उनको रखना ।
माता पिता की सच्ची सेवा ही
ईश्वर की जैसे पूजा करना है ।
सच्ची राह किसी को दिखाना
सारा सच पुण्य का काम होता है।
छोटा छोटा श्रम दान करो तो
वो भी परोपकार ही होता है ।
प्यासे को पानी पिला दो
भूखे को दो रोटी खिला दो ।
पक्षियों को दाना खिला दो
मंदिर में पूजा जैसा होता है ।
महिलाएं अक्सर ही मंदिर में
भजन कीर्तन करती रहती है ।
घर परिवार में खुशियां रहें
मंदिर में यही कामना करती है
पूजा, भक्ति ,धर्म कर्म भी
श्रद्धा से जीवन में करना है ।
सारा सच है मोक्ष मिलेगा
जीवन जो सार्थक करना है ।
महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
जबलपुर म प्र
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