मेरा सपना - बलवान सिंह मानव
रात को एक सपना आया, सपने में था मैने पाया।
अपने डियर गुरु के सामने, जाकर मैने शीश नवाया।
वे मुस्काए और बोले - 'अरे! कैसा है तेरा हाल?,
घूमता ही रहता है या फिर, पेपरों का भी है ख्याल।'
कुछ तो तैयारी होगी तेरी, आ! मै थोड़ा समझा दूँ? ,
परीक्षा पास करने के, तुझको नुस्खे बतला दूं।'
मैने कहा - ' डियर गुरु! मुझे आपका ही है सहारा,
किताबों से अच्छा मुझे, लगता आपका चेहरा प्यारा,
जब इतना है मेल आपसे, तो तैयारी में क्या रखा है?,
बस एक आशीर्वाद आपका, मेरी तैयारी से अच्छा है।'
तैयारी - व्यारी कुछ की नहीं है?, बस रहता हूँ आपके ख्यालों में,
बसे हुए हो आप ही, मेरे नैनों के प्यालों में।'
वे बोले- ' अच्छा ! फिर आराम कर, बस पेपर देने आ जाना,
हाज़िरी लगवा कर अपनी, बस कर्तव्य पूरा कर जाना।
मेरा है अब फ़र्ज़ यह, तुम्हे अवश्य पास कराना,
रिजल्ट के दिन मिठाई देकर, पास प्रमाण - पत्र ले जाना।'
जब ऐसे गुरु और चेले, मिल जाएंगे हमें जगह सभी,
क्या मिलन होगा सच में?, "मानव" का मानव से तभी।।
बलवान सिंह मानव
पंचकूला हरियाणा

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