Monday, 18 May 2026

राजनीति - अमिता मराठे

राजनीति - अमिता मराठे 

राजनीति एक खेल है,
खेले जो चतुर सुजान।
पीढ़ी दर पीढ़ी समझे,
जिसने लिया इसे पहचान।

पर्वत जैसे विघ्न घिरें,
चाहे डगमग हो हालात।
राजनीति की चाल निराली,
खींचातानी दिन और रात।

कोई गाता, कोई नाचता,
दल के युवा, नर और नारी।
दूजे दल को नीचा दिखाने,
चलती रहती होड़ हमारी।

चुनावी मौसम में देखो,
भाषण कितने लुभावन होते।
मतदान होते ही लेकिन,
सबके स्वर फिर मौन होते।

राजनीति बुरी नहीं होती,
दाग़ उसे इंसाँ लगाते।
समझदार सँभलकर चलते,
नासमझ अक्सर भरमाते।

राजनीति एक खेल है,
खेले जो चतुर सुजान।
जनहित जिसका लक्ष्य बने,
वही बने सच्चा इंसान।

राजनीति बुरी नहीं होती
यदि नीयत हो ईमानदार।
जन सेवा जिसका उद्देश्य 
‌वही नेता होता स्वीकार।

राजनीति सेवा का पथ हो,
ना हो केवल स्वार्थ प्रधान।
जनता जागरूक जब होगी,
तब बनेगा देश महान।

अमिता मराठे 
इंदौर मध्य-प्रदेश 

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