Monday, 24 November 2025

हार और जीत - अपर्णा गर्ग 'शिव'

 
हार और जीत - अपर्णा गर्ग 'शिव'


जिंदगी का फ़लसफा हमेशा एक नई कहानी को जन्म देता है, और यह कहानी कभी हार से शुरू होती है तो कभी जीत से। कभी रास्ते में फूल बिछे मिलते हैं तो कभी उन फूलों में छिपे कांटे आपको लहू- लुहान कर देते हैं। प्रकृति की नियमावली आपको पल भर में बहुत कुछ सिखा जाती है।
  जिंदगी हमेशा घड़ी के पेंडुलम की तरह दाएं बाएं घूमती रहती है। कभी व्यक्ति सफलता का जश्न मनाता है तो कभी हार का मातम…  कामयाबी जब दिल को खुशियों से भरती है, तब केवल आंखों में चमक ही नहीं देती बल्कि कदमों को एक नई रफ्तार, एक नई ऊर्जा भी देती है। वहीं कुछ पल ऐसे भी आते हैं जब लगता है कि वक्त थम गया है। कदमों की रफ्तार स्वतः ही रुक गई है, उम्मीद थमती हुई सी महसूस होती है। एक चुप्पी, जो आपके शब्दों को मौन का रास्ता दिखाती है। मन में संवेदनाएं ज्वार भाटे की तरह उठती और गिरती तो है, किंतु जीवन में कोई हलचल नहीं होती।
     यही जीवन का कटु सत्य है।  जीत और हार दोनों ही अस्थाई हैं। 
चंदन, घिसने के बाद ही ईश्वर के माथे पर सुशोभित होता हैं। हमें हार या जीत के चक्र में न उलझकर संतुलन बनाकर रहना चाहिए।
 
 अपर्णा गर्ग 'शिव'
उत्तर प्रदेश

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