Monday, 15 December 2025

देश - डॉ ० अशोक

देश - डॉ ० अशोक

सुबह का उजास
फूलों की सरगोशी
देश जागे हल्का

नर्म सी हवा
पत्तों की फुसफुसाहट
दिल में उतरती

नदी का रेशम
धूप की चोटियों पर
चाँदी चमकती

पीली पगडंडी
बच्चों के नन्हे पाँव
हँसी उड़ेलें

सांझ की धुन
कानों में घुलती हुई
शांत भरोसा

रात का चाँद
मिट्टी की धीमी महक
देश मुसकाए

कच्ची गलियों में
दीपक की कोमल लौ
घर लौटता मन

धान की खुशबू
हवा में तैरती हुई
माँ-सी लोरी

दूर पहाड़ों पर
सूरज का लाल घेरा
आँखें गरमाए

चिड़ियों की तान
सुबह के नीले काँच पर
मधुर लकीरें

छोटे से सपने
बड़े आसमान के संग
ऊपर उठते

चलते कदमों में
मिट्टी की धड़कनें
देश बोलता है

डॉ ० अशोक, पटना, बिहार

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