Monday, 15 December 2025

सीमाओं से परे भारत - सीमा प्रजापति


सीमाओं से परे भारत - सीमा प्रजापति


नक्शों में बँटा हुआ है संसार,
पर भारत की सोच—सीमाओं से बहुत आगे है।
दूरी चाहे हजारों मील की हो,
रिश्तों का सेतु एक हैंडशेक से भी बन जाता है।

कूटनीति अब सिर्फ बातचीत नहीं,
यह एक कला है—
जिसमें शब्द तलवार से तेज
और मुस्कान किसी भी समझौते से बड़ी होती है।

प्रधानमंत्री जब विदेश जाता है,
तो सिर्फ विमान नहीं उड़ता—
उड़ता है भारत का भरोसा,
और लौटकर आता है
नई संभावनाओं का आसमान।

राष्ट्रपति के भाषण में जो ठहराव है,
वो इतिहास के पन्नों पर लिखी
उस परंपरा का मान है
जिसने हमें ‘लोकतंत्र’ को पूजा जैसा सम्मान दिया।

मंत्रालयों की फ़ाइलें सिर्फ कागज़ नहीं,
वो सपने हैं—
किसी किसान के, किसी युवा के,
किसी उद्यमी के जो कल की अर्थव्यवस्था लिख रहे हैं।

व्यापार सिर्फ मुनाफ़ा नहीं,
दो देशों के दिलों का संवाद है,
जहाँ मुद्रा बदलती है,
पर मूल्य—विश्वास का—अटल रहता है।

भारत आज एक राष्ट्र नहीं,
एक विचार है—
जो जहाँ जाता है,
वहीं अपनी पहचान की रोशनी छोड़ आता है।

क्योंकि हमारा भारत
सीमाओं में नहीं,
संभावनाओं में बसता है।

Sonam Prajapati
Utter Pradesh 

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