Monday, 12 January 2026

ये कलयुग का रामराज है - रशीद अकेला

ये कलयुग का रामराज है - रशीद अकेला

औरतों के हिजाब खींचना, उनका दुपट्टा खींचना यही काम काज है 
    ये सतयुग नहीं कलयुग का रामराज है 

हिजाब को हाथ लगाया तो ये हाल है कहीं और लगते तो क्या होता 
    ये है राजनैतिक बयान ये संजय निषाद है 

किसी ने की तुलना के गहलोत ने भी महिला का दुपट्टा खींचा था 
  वाह बेशर्म निर्लज बिकुल संस्कार विहीन समाज है

दिया नारा बेटी बचाओ पर ये बताना भूल गए के किससे 
    कुर्सी पर विराजमान सब  दुशासन आज है 

बेटी को सुरक्षा बेटी को न्याय पर कब और किससे 
ग़रीब मजलूमों की सुनने वाला कौन आज है

तुम बस धर्म मजहब जात पात में बंटते रहो 
      बता दो के ये नपुंसकों का समाज है

बहू बेटी की इज्जत व आबरू बचाने को बनना पड़े बनो रावण रशीद 
ये सतयुग नहीं कलयुग का रामराज है

रशीद अकेला ,झारखंड(लेखक एवं समाजसेवी )

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