क्या रोकेंगे मुझको - मोहिनी गुप्ता
विधा काव्य
शीर्षक- क्या रोकेंगे मुझको
प्रदत्त शब्द - जीवन
क्या रोकेंगे मुझको अब ,ये आंधियां और तूफ़ान ।
दिल में मेरे अंकुरित अब,हर पल उम्मीद की उड़ान।
चाहे आए कितने थपेड़े अब ,सूखा हो या अकाल।
सुन सबकी कर अपने मन की, कहना मेरा ये मान।
जीना सीखा हैं मैंने हर हाल में,है मुझको फिर जीने दो।
ये दुनिया तो पग- पग पे तैयार ,रोकने बढ़ते कदमों को।
कोई देगा साथ सिर्फ़ स्वार्थ में,साथ नहीं कोई जीवन भर।
चुन लें अपनी मंजिल स्वयं और निकल पड़ सफ़र पर।
तेरे बढ़ते कदमों में ही अब ,जीत तेरी सुनिश्चित हैं ।
नव जीवन का संचार कर, बनानी अब यही रीत हैं।
मिट जाए जो अस्तित्व तो ,फिर से प्रस्फुटित होना है।
मान प्रेरणा नव- पत्तियों को जो, देती जीने की सीख हैं।
मोहिनी गुप्ता
मध्य प्रदेश
स्वरचित और मौलिक

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