Thursday, 15 January 2026

मकर संक्रांति - डॉ कौशल किशोर

मकर संक्रांति - डॉ कौशल किशोर 

भगवान भास्कर को समर्पित यह मकर संक्रांति का त्योहार हिन्दू धर्म का एक पावन पर्व है।यह त्योहार सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। यह उत्तरायण में सूर्य के प्रवेश पर मनाया जाता है।भारत की सांस्कृतिक विविधता दिखाई पड़ती है इस त्योहार में।मकर संक्रांति एक त्योहार नहीं बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य ,  कृतज्ञता,दान, परोपकार और  नयी शुरुआत का  संदेश हमें सिखाता है कि जैसे भगवान भास्कर उतर दिशा में बढ़ते हैं उसी तरह अपने -अपने जीवन में सकारात्मकता, मेहनत और सद्भावना 
 की ओर बढ़ना चाहिए।
          धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति स्नान दान का सबसे बड़ा पर्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन गंगा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी तथा संगम में स्नान कर भगवान सूर्य को जल अर्पित करने से अक्षय प्राप्त होता है। इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी,क़बंल का दान कर यश प्राप्त करते हैं। २०२६ में मकर संक्रांति चौदह जनवरी को मनाया जाएगा। इस त्योहार को खिचड़ी, पोंगल, उतरायण ,माघी, लोहड़ी यादि नाम से जाना जाता है। अनाज की फ़सल अच्छी होने पर आभार व्यक्त करने के लिए सूर्य की अराधना करते हैं। भारत त्योहारों का देश है। अनेकता में एकता का संदेश देता है। इस दिन गंगा सागर में विशाल मेला लगता है और लोग वहां जाकर स्नान करते हैं। कहा जाता है कि "सब तीर्थ बार बार, गंगा सागर एक बार।" 
       यह त्योहार भारत में अलग-अलग नाम से भी मनाए जाते हैं। गुजरात में उतरायण , रंग बिरंगी पतंगे उड़ाई जाती है, पतंगवाजी मुख्य रूप से होता है। पंजाब हरियाणा में लोहड़ी तेरह जनवरी को मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल चार दिन का उत्सव होता है। आंध्रप्रदेश में संक्रांति। उत्तर भारत में खिचड़ी। हर जगह तिल गुड़ का विशेष महत्व रहता है। तिल पापों को जलाता है और गुड़ जीवन में मिठास लाता है।


डॉ कौशल किशोर 
साहित्यकार लेखक सह शिक्षक।
पटना, बिहार
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