कर संक्रांति - पदमा ओजेंद्र तिवारी
सूर्य देव हुए उत्तरायण,
पहनाये प्रकृति माला।
रीत सनातन पावन,
मकर संक्रांति पर्व निराला।।
मकर संक्रांति पर्व पर,
करते सब दान स्नान,
अर्घ्य देते सूर्य को,
तिल गुड़ खिचड़ी दान।।
पर्व मकर संक्रांति,
है हर्षोल्लास वाला।
करें सूर्य विष्णु कृपा,
छूटे जगत जंजाला।।
विभिन्न रंगों की पतंगे,
उड़ती अंबर में चहुं ओर।
इंद्रधनुष सी दिखती है,
बच्चे मचाते हैंशोर।।
दान पुण्य का त्यौहार,
गुड़ तिल की मिठास वाला।
लड्डू पकवान का आनंद,
मकर संक्रांति पर्व निराला।।
भागीरथ लाए थे गंगा,
आज के दिन धरा धाम में।
सगर पुत्रों का हुआ उद्धार,
मकर संक्रांति के पुण्य काल में।
सनातन संस्कृति का दिन,
आज लोहणीं पोंगल वाला।
प्रीत रीत का है संगम,
मकर संक्रांति पर्व निराला।।
@पदमा ओजेंद्र तिवारी
दमोह
मध्य प्रदेश
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