छंदमुक्त कविता
विषय- आस्था - सुधा बसोर सौम्या
होती है यदि मन में आस्था तो
जीवन में बनते हैं सारे काम
बढ़े चलो जीवन के पथ पर
होगा सदैव ही ऊॅंचा नाम।।
भरी सभा में दुष्टों ने यूं
द्रौपदी का अपमान कराया
हरि के प्रति सच्ची आस्था ने
द्रौपदी का था चीर बढ़ाया।।
भर निज तन मन आस्था
मीरा कृष्ण दिवानी हो जाती है
विष का प्याला जो राणा ने भेजा
हॅंसते हॅंसते पीकर जी जा जाती है।।
माटी की मूरत में अपने गुरुदेव की
एकलव्य ने भाव आस्था ही जताया
और गुरु दक्षिणा रूप में अपना ही
अंगूठा खुशी खुशी था कटवाया।।
हर सफल रिश्ते की नींव में होता है
बस और बस दो चीजों का ही वास
महापुरुष दुनिया के कहते जिनको
आस्था और आस्था में विश्वास।।
मौलिक व स्वरचित
सुधा बसोर सौम्या
गाजियाबाद से
Utter Pradesh
#HamariVani #हमारीवाणी #SaraScah #सारासच
#Kavita #कविता #Sahitye #साहित्य #Poet #काव्य
.jpg)
No comments:
Post a Comment