Thursday, 1 January 2026

सत्य - कवियत्री राजवाला पुंढीर


 सत्य - कवियत्री राजवाला पुंढीर 

सत्य ना कभी हारता है
 सदा ही जीत होती है, 
सत्य के मार्ग पर चलके
मंजिल करीब होती है।

प्रभू की सीख है ऐसी 
कभी भी राह ना भटको
प्रभू ने खींच दी रेखा
ना इसके पास भी फ़टको 
समझो पैसा ना सबकुछ
रिश्तों की कीमत होती है।

सत्य की शक्ति को समझो
बड़ी बलवान होती है
कठिन होती परीक्षा है
मान- सम्मान खोती है
कदम भी लड़खड़ाते हैं 
चल भी डगमग होती है।

भूखे पेट सोना भी तो 
पड़ जाता है जीवन में
फिर भी राह भटकने का
नाही आता है मन में 
रात की नींद उड़ जाती
बड़ी बेचैनी होती है।

सभी पहचान लो सच को
राह सच्चे पर आजाओ
पकड़लो इष्ट का दामन 
पगों के पीछे लग जाओ
रखेंगे इष्ट सर पर हाथ
भक्त से प्रीत होती है।

पाप का मार्ग है खोटा 
सच्चा साथी सतमार्ग
झूठ की राह पर चलकर
रच जाता है महाभारत 
पुराणों में भी देखा है 
झूठ की हार होती है।

बच्चों को भी देदो सीख 
होता सतमार्ग अच्छा
धागा सत का हो मजबूत
झूठ का धागा हो कच्चा
नाते भी टूट जाते हैं 
झूठ जहां नींव होती है।

हरिश्चन्द्र राजा भी थे 
इस भारत के ही वासी 
ये कभी न सच से भागे 
बनगए मरघट के वासी
कर,सुत का ले तारा से
 माटी जली मां रोती है।

 पुंढीर कहती जीना है 
सचपर विष भी पीना है
सच्चा सोना भी तपता
उसमें जड़े नगीना है
झूठ पर पेन भी रुकता
स्याही खत्म होती है।

स्वरचित
कवियत्री राजवाला पुंढीर 
एटा, उत्तरप्रदेश

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