शिक्षक - उमेश नाग
शिक्षक नहीं ये तो हमारे,
ज्ञान के देवनारायण हैं।जीवन जितना सजता है
माता पिता के प्यार से,
उतना ही महकता है,
गुरू के दिये ज्ञान एवं -
शिक्षा से।
मानव को पशुवत होने से,
बचाती है शिक्षा;
होते हैं शिक्षक ज्ञान के स्त्रोत।
बिन शिक्षक के नही होता,
ज्ञान का संचार।
शिक्षक होते ज्ञान का भंडार,
देते हमें विषयों के माध्यम से;
ज्ञान का प्रकाश।
शिक्षक नहीं होते तो सर्वत्र होता,
अज्ञानता का अंधकार।
गुरू शिक्षक देते दिव्य दृष्टि दान
तभी होते हमें सूक्ष्म व वृहद ज्ञान,
आसान ।
शिक्षक मानव को दानव से,
देव बनाते इंसान को।
सही शिक्षा मानव को गलत-
राह पर जाने से है रोकती।
सही शिक्षित इंसान को रोकती ,
गलत एवं व्यभिचार के राह से।
सही शिक्षित व्यक्ति का कभी,
नही होता है हश्र।
नर हों या नारी सकल हैं गुरु,
क्षिक्षक के हैं ऋणी।
पाते इनसे हम विद्या एवं,
शुभ संस्कारों का दान।
ऐसे शिक्षक व गुरुओं की मैं,
बलीहारी ,बलीहारी,बलीहारी।
श्रीमती उमेश नाग जयपुर राजस्थान

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