राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु
विषय.. मकर संक्रांति
नाम.. महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर
कविता... मकर संक्रांति
माघ और जनवरी महीने में
मकर संक्रांति पर्व आता है ।
गुड और तिल को खाने का
इस दिन बहुत महत्व होता है ।
तिली लगाकर स्नान करने का
इस दिन महत्व भी बताया है ।
पवित्र नदियों में स्नान करना भी
मकर संक्रांति पर्व में बताया है ।
मकर संक्रांति पर्व ऐसा है
नये साल का त्योहार आया है ।
पवित्र स्नान सभी करते है
मकर संक्रांति पर्व जो आया है।
शहर गांव की नदियों में जाकर
लाखो नर नारी स्नान करते है ।
सूर्यदेव जब उत्तरायण में आते
सुख शांति समृद्धि लाते है ।
प्रति वर्ष 14 जनवरी को
मकर संक्रांति सभी मनाते है ।
तिली का उप टन करते है
और नदियों में सभी नहाते है ।
गुड, तिली के लड्डू बनते है
दान भी उसका करते है।
खिचड़ी का भी दान करने से
पर्व का भी पुण्य कमाते है ।
गंगा, जमुना, सरस्वती नर्मदा जैसी
पवित्र नदियों में स्नान करते है ।
हरिद्वार प्रयागराज नासिक के
तीर्थो में जाकर डुबकी लगाते है ।
प्रयागराज, हरिद्वार में श्रद्धालु
एक एक महीने वहां रहते हैं ।
गंगा मैया में स्थान को करके
धर्म-कर्म सब अपना करते हैं ।
मां नर्मदा मैया के तटों पर भी
पूरे माघ महीने पर्व रहते हैं ।
मां नर्मदा मैया में डुबकी लगाने
से कहते हैं पाप सभी धुल जाते हैं।
संक्रांति के चार दिन पहले से ही
मां कई प्रकार के लड्डू बनाती थी ।
संक्रांति के दिन मोहल्ले में सबको
देती थी वो यादें अब भी याद आती है।
अलग अलग प्रांतों में
इसका अलग महत्व है।
कहीं पोंगल के रूप में
कहीं पर पतंग उड़ाते है ।
पंजाब और हरियाणा में
नये वर्ष की नई फसल
को काटकर सब मिलकर
इस दिन खुशियां मनाते है ।
मकर संक्रांति का त्योहार है
नये साल का पहला त्योहार है ।
क देखकर मन ललचाए
खाकर खुशियां खूब मनाएं ।
महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
जबलपुर म प्र
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