राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु
विषय... पुस्तक - अनन्तराम चौबे अनन्त
नाम.. महाकवि आचार्य डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर मध्यप्रदेश
कविता...पुस्तक
शिक्षा जीवन की राह दिखाती
शिक्षा के बिन राह अधूरी ।
पढ़ना लिखना बहुत जरूरी
पुस्तक बिन शिक्षा अधूरी ।
पुस्तक प्रेम रखा जिसने भी
उसका जीवन सफल हुआ ।
बंद किताब खोलकर देखो
भंडार ज्ञान का भरा हुआ ।
माता पिता सिखाते हैं जो
वह भी ज्ञान की पुस्तक होती
मां बचपन की पहली गुरू है
पहली शिक्षा वही सिखलाती ।
स्नेह प्यार मां की ममता का
पहला पाठ मां ही सिखलाती है ।
पापा मम्मी दादा दादी भाई बहिन
इन सब रिश्तों का पाठ पढ़ाती है ।
फल सब्जी पशु-पक्षियों की
माता पिता पहचान कराते हैं ।
जय श्रीराम जय श्रीकृष्ण भी
बच्चों को प्रतिदिन सिखातें हैं ।
माता पिता की बात मानना
सभी बड़ों का आदर करना ।
ईश्वर सबसे बड़ा ज्ञानी होता है
उसके सामने सिर को झुकाना ।
स्कूल कालेज में शिक्षा लेते
पुस्तक से प्रेम हमेशा करना ।
जीवन की मंजिल को पाने में
शिक्षक गुरू से ज्ञान सीखना ।
मन से ज्ञान पुस्तक से सीखना
रटकर पुस्तक कभी न पढना ।
जो भी पढ़ो पर अच्छा पढ़ना
सारा सच पढ़ कर आगे बढ़ना ।
सारा सच पुस्तक से शिक्षा
पाकर डाक्टर, इंजीनियरिंग,
और कलेक्टर भी बनते हैं ।
जो बच्चे मन से पुस्तक पढ़ते हैं।
पुस्तक में सब ज्ञान होता है
ज्ञान विज्ञान भी भरा होता है ।
सच्चा ज्ञान पुस्तक से मिलता
सारा सच ज्ञान पुस्तक में होता है ।
महाकवि अनन्तराम चौबे अनन्त
जबलपुर म प्र
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