Thursday, 5 March 2026

वो अकेला मर्द था - रशीद अकेला

वो अकेला मर्द था - रशीद अकेला सारे अमेरिका के तलवे चाटने वाले, ग़द्दारी का ज़रूर दर्द था 

सारे नामर्दों के बीच मगर वो अकेला मर्द था 

      बूढ़ा था मगर था वो इकलौता शेर 
      मज़लूमों का इकलौता हमदर्द था 

  सब के सब गद्दार इंसानियत के दुश्मन
अमेरिका के आगे नतमस्तक सबका सर था

बूढ़े शेर का शिकार करने आए थे झुंड में नामर्द 
शहीद हुआ मगर बता दिया वो इकलौता मर्द था

अमेरिका किसी का सागा नहीं समझोगे एक दिन 
याद करोगे इंसानियत को बचाने का एक वक्त था

इंसानियत से भी बड़ा कोई धर्म हो गया क्या ?
शिया सुन्नी भूल लड़ने वाला क्या एक ही मर्द था

भले मिट जाए आज नक्से से ईरान रशीद 
जमाना रखेगा याद के वहाँ कोई मर्द था

रशीद अकेला , हिंदुस्तान 
लेखक एवं समाजसेवी

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