Sunday, 22 March 2026

युद्ध - रजनीश कुमार "गौरव"

मेरी कलम मेरी पहचान 
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              *युद्ध*

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*मानवता की रक्षा हो*
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प्रेम और शांति के साथ मिलजुल कर रहने की हमारी एक समृद्ध परम्परा रही है और दूसरी ओर एक सभ्य समाज, आपस में एक दूसरे से तनावपूर्ण जिंदगी जीने की इजाज़त भी नहीं देता है । हां,इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि लोगों को आपस में मतभेद भी होते है, मगर फ़िर बातचीत के माध्यम से पुनः मोहब्बत क़ायम करने का हमारे पास हजारों विकल्प भी खुले रहते है,पर इन दिनों हम उस विकल्प को थोड़ा नजरअंदाज करते जा रहे है,और अंततः उस युद्ध को ही हम अपनी शान समझने लगे है ।जो मानवता के लिये ख़तरा है और इस मंडराती हुई ख़तरा के जद में आज संभावित तौर पर हम सब है ।
   यह वक्त निस्संदेह इस गंभीर माहौल पर सोचने का है कि आखिर जो हमारी पहचान है उसे कैसे ससम्मान बरकरार रखा जाए ताकि अमन चैन के साथ दुनिया के हर नागरिक चिंतामुक्त होकर खुशहाल जीवन व्यतीत कर सके।इस विषय पर सामुहिक चिंतन करने का समय है। इसलिए आम आवाम की फ़िक्र को केंद्र में रखकर ही हर हाल में लड़ाई के निर्णय पर विचार न्यायोचित होगा।
हम वाक़िफ है अपनी मजबूती से,हम अवगत है अपनी वीरता से , हमें गर्व है अपने सेनाओं पर और हम जानते है अपनी अदम्य साहस को; मगर सबसे  पहले आदमी है और इस लिहाज़ से हमारे अंदर एक करुणा भी मौजूद है।
जरूरत है सिर्फ़ उसे जगाने की ताकि  निर्दोष आम आदमी एवं दुनिया के मासूम बच्चों की रक्षा हो सके।

         - रजनीश कुमार "गौरव"
            (स्वतंत्र रचनाकार)
कुतुबपुर, सारण, बिहार

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