युद्ध - गोरक्ष जाधव
न भूलो की तुम युद्ध का हिस्सा हो,
तुम भी इस शांति की प्रयास में अशांत किस्सा हो।
युद्ध विफलता का आखरी परिणाम है,
युद्ध लोभ, अहंकार और स्वार्थ का नाम है।
युद्ध अनियंत्रित सत्ता का घिनौना अंग है,
युद्ध सीमाओं के विस्तार का खूनी रंग है।
युद्ध नफरत के विस्फोट से शुरू होता है,
युद्ध चींटियों की तरह सबको मसलता है।
युद्ध लाता है लाशों के अंबार और बर्बरता,
युद्ध लाता है हतप्रभ जीवन की आकुलता।
बस बम, मिसाइल चलती है अनगिनत गोलियाँ,
मासूमों के खून से खेली जाती है रक्त रंजित होलियाँ।
धु-धुकर जलते है सजाए हुए सपने और आशियाने,
पेड़, पशु और पंछी भूल जाते है अपने गाने।
मिलते है आंसू,भूख,दर्द,विलाप और विनाश,
रहती है बाज के पंजों में फँसी मासूम चिड़िया को जीने की आस।
युद्ध केवल युध्द है जीवन का अंत,
मानवीय संवेदना का निर्मम आकांत।
युद्ध नहीं हमें केवल बुद्ध चाहिए।
शांति से समृद्ध हमें विश्व चाहिए।
न भूलो की तुम युद्ध का हिस्सा हो.....
गोरक्ष जाधव©®
मंगलवेढा, महाराष्ट्र.

No comments:
Post a Comment