मजदूर - रंजना मलिक
बना रहा है बड़ी मेहनत से
हर दीवारों को मजदूर
सजा रहा अपने पसीने की ,
एक - एक बूंदो से
हर एक कंगूरों को मजदूर
अपने श्रम की हर बूंदो से
बनाता है नींव मजबूत मजदूर
ढ़ो - ढ़ो कर वह हर बोझों को
देता शक्ति का परिचय मजदूर
कड़ी धूप हो या वर्षा में भी
थक कर कभी न बैठा मजदूर
अपनी जीविका चलाने को
किया सुखद परिश्रम मजदूर
हम रहते हैं घरों में
सिर पे हमारे छत दिया मजदूर
ख़ुद बेघर होकर भी
घरों में हमें बसाता है मजदूर
तुम्हारे इसलिए त्याग और श्रम को
करते हैं हम नमन मजदूर
रंजना मलिक
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश )
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