युद्ध - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी
युद्ध से किसी का भला नहीं होता, केवल विनाश होता है।
आर्थिक मंदी होती, अपनों को मानव खोता है।
युद्ध जिसने भी किया,
खुद भी हो गया तबाह।
जीवन दुख से भर जाता,
मुख से बस निकलती आह।
जंग से कुछ हासिल न होता,
विकाश की गति ठप होती।
दिल से दिल की दूरी बढ़ती,
नफरत के बीज यह बोती।
युद्ध की विभिषिका, बस कहर ही ढाती है।
अमन की है दुश्मन यह,
केवल उत्पात मचाती है।
युद्ध जब भी होता है,
भयंकर होता है परिणाम।
निर्दोषों की जान जाती,
पीड़ादाई होता अंजाम।
ऐसी तबाही मचाती, भरपाई मुश्किल होता।
जीत चाहे जिसे मिले, नुकसान दोनों पक्षों का होता।
जान-माल की हानि होती,
शांति मन की छिन जाती।
आर्थिक संकट छा जाता,
खुशी कहीं न दिख पाती।
इतिहास गवाह है, युद्ध से केवल बर्बादी होती है।
पर्यावरण दूषित होता, अपनों से जुदाई होती है।
मासूमों की जान जाती,
घर से बेघर होते लोग।
नकारात्मकता फैल जाती,
धर दबोचता कई रोग।
युद्ध टाला जा सकता है,
थोड़ी कोशिश करनी होगी।
थोड़ा अभिमान तजना होगा,
कुछ विपक्ष की सुननी होगी।
युद्ध से बचने के लिए,
स्थापित करना होगा संवाद।
खुद पर नियंत्रण रखना होगा, नहीं करना फालतू वाद-विवाद।
प्रतिशोध की भावना त्यागो,
कोशिश करो, युद्ध को टालो।
अपनी बात कहो जरूर, पर औरों की सुनने की आदत डालो।
हथियार का उपयोग नहीं करना,
नियंत्रण रखना होगा खुद पर।
दुश्मन को भी गले लगाओ, दोनों हाथ बढ़ाकर।
बातचीत करो, आपस में सहमति बनाओ।
गलतफहमियां दूर करो, शांति की अहमियत बताओ।
कोई ऐसी समस्या नहीं,
जिसका समाधान नहीं।
हर युद्ध रोका जा सकता है,
अपनी तरफ से पहल करो तो सही।
वादा करो तुम स्वयं से, युद्ध की नौबत न आने दोगे।
दिल से दिल की दूरी कम कर,
रिपु को गले लगा लोगे।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
वैस्ट बंगाल
.jpg)
No comments:
Post a Comment