Tuesday, 21 April 2026

धोखा - डा अनन्तराम चौबे अनन्त


                                                     राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी की 

साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु
विषय...  धोखा
नाम.. महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर म प्र
कविता...धोखा 

झूठ, फरेब, धोखा करना 
इसका  ही बोलबाला है ।
सच्चाई का नही जमाना
ये कैसा समय निराला है ।

सच की राह पर जो चलता है 
दर दर की ठोकरें वो खाता है ।
जीत अंत में सच्चाई की होती
मुश्किल भरा जीवन होता है ।

सभी सरकारी आफिसों हैं
बस भ्रष्टाचार फैला हुआ है ।
छोटा बड़ा कोई भी काम हो
भ्रष्टाचार का जाल बिछा है ।

झूठे फरेबी धोखेबाज लोग 
सभी काम धोखा से करते हैं ।
लोगों से लाखों रुपया लेकर
शहर छोड़कर भाग जाते हैं ।

अपना स्वार्थ सिद्धि करने में
हर ऐसा इन्सान लगा हुआ है ।
झूठ का बोलबाला रहता है
मन में फितूर ऐसा भरा हुआ है ।

सारा सच धोखा देकर ही 
बच्चों का अपहरण करते हैं ।
माता पिता से फिरौती की
रकम मांगते झूठ बोलते हैं ।

कुछ बेटे बहू ऐसे भी हैं
माता पिता को धोखा देते हैं ।
घर जमीन अपने नाम लिखाकर
माता पिता को वृद्धाश्रम छोड़ देते हैं।

झूठ फरेब और मक्कारी है
सारा सच झूठ का बोलबाला है ।
इन्सान के मन में धोखा बसा है
पर दिखने में भोला भाला है ।

सच और झूठ की दो राहें हैं
सच की राह सफल बनाती है ।
सच की राह  कठिन होती है
कदम कदम पर ठोकर लगती है ।

झूठ फरेब धोखेबाज हमेशा
ऐशो आराम से ही रहते हैं ।
लोगों को उल्लू बनाकर ही
हरदम फलते फूलते रहते हैं ।

अदालत कोर्ट कानून जहां है
सारा सच झूठ के आदेश वही हैं ।
गुनाहगार बेगुनाही के फैसले
अक्सर ही  रोज वहीं होते है ।

जज के सामने बाबू बैठकर
पेशी वालों से रुपया लेते रहते है।
ऐसे भ्रष्टाचार और धोखे को
क्या जज देख नही पाते हैं ।

वर्तमान में परिवेश में न्याय की
दिशा दशा दोनों ही खराब हैं ।
न्याय के नाम पर लड़ो लड़ाई
न्याय का मिलना एक ख्वाब है ।

कोर्ट कचहरी और अदालत
कानून के ही ये रखवाले हैं ।
बेगुनाह और गुनाहगारों के
सच झूठ के होते फैसले हैं ।

कौन सच्चा और कौन झूठा है
अदालत कोर्ट ही तय करते हैं ।
अंधे कानून के मायाजाल में
सच और झूठ के फैसले होते हैं ।

गुनाहगार बेगुनाह गारों के फैसले
अदालत कोर्ट के आदेश से होते हैं ।
गवाहों और वकीलों की दलीलें से
सारा सच क्या है पर आदेश होते हैं ।

कोर्ट कचहरी अदालतों में बस
न्याय को पाने की मुश्किल होती है ।
वकीलों की महंगी फीस होती है
कोर्ट से तारीख पर तारीख मिलती है।

कोर्ट का सच झूठ कोर्ट ही जाने
सारा सच क्या है समझ न आये ।
बेगुनाह और गुनाहगारों के कोर्ट 
के आदेश पर अंगुली कौन उठाये ।

सारा सच कोर्ट कचहरी कानून 
 से देश में  सभी दुखी रहते हैं ।
न्याय पाने की उम्मीद से ही
मजबूरी में अदालत जाते हैं ।

न्याय अन्याय तो कोर्ट ही जाने
पर प्रश्न खड़े तो होते ही हैं ।
निर्णय के खिलाफ कौन बोले
विरोध करने से सभी डरते हैं ।

महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
   जबलपुर म प्र

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