Tuesday, 21 April 2026

युद्ध - प्रीति अरोरा

 युद्ध - प्रीति अरोरा 

सो गई कई जिंदगियां मौत की गोद में
अब तो हिंसक युद्ध को विराम दो 
बह गए कई सिंदूर रक्त के प्रवाह संग 
अब तो विध्वंसक,संहारी रण को आराम दो 

गोद सूनी कर गया कई ममताओं की युद्ध 
पिता का साया मासूम बच्चों से उठ गया 
बुझ गया चूल्हा कई घरों का सदा के लिए 
छोड़ दो युद्ध अब धरती अंतस भी कहर उठा

धूए का उठता गुबार इंतजार धूमिल कर गया 
प्रतीक्षा करती राहे अब दम तोड़ चुकी है 
पूछ रहे बच्चे बार-बार पापा कब आएंगे 
मां की चुप्पी अब सदा  मौन हो चुकी है

रहने का आसरा, रोटी का निवाला और संबल 
सब कुछ त्रास-त्रास,मृत्यु गरल हो चुका है 
अमन,शांति का पताका फहरा दो अब मनुज 
शेष भी कगारी की दहलीज पार कर चुका है

प्रीति अरोरा 
बदायूं,उत्तर प्रदेश 

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