Thursday, 9 April 2026

वक्त - शिक्षक सर्वोत्तम - डॉक्टर सलोनी चावला

वक्त - शिक्षक सर्वोत्तम - डॉक्टर सलोनी चावला


वक्त दिखता नहीं,लेकिन सब कुछ दिखाता है,
होता नहीं महसूस, पर महसूस कराता है।

वक्त परीक्षा भी है, वक्त परिणाम भी,
वक्त में है सवेरा, वक्त में शाम भी।

वक्त खोलता राज़ कई, कई राज़ छुपाता है,
आने वाले कल को गुज़रा कल बनाता है। 

वक्त हालात का दर्पण, वक्त शिक्षक सर्वोत्तम, 
वक्त कमाल चिकित्सक, वक्त ज़ख़्मों की मरहम।

वक्त का अपना भाग्य नहीं, पर भाग्य बनाता है, 
राह भटकाता कभी, कभी मंज़िल दिखाता है।

वक्त प्रश्नों का उत्तर, वक्त है न्यायाधीश,
वक्त देता सज़ाएं, वक्त देता आशीश।

वक्त कोई लेखक नहीं, पर ग्रंथ बनाता है,
कर्म सभी के, जाने कहां पर लिखता जाता है।

वक्त के हर लम्हे पर, लिखे मिलन - जुदाई,
कोई ताकत सृष्टि की, वक्त से जीत न पाई।

वक्त वह वाहन है जो आगे बढ़ता जाता है, 
ज़िंदगी को मौत के दर तक पहुंचाता है।

हर होनी - अनहोनी पर, वक्त का ही अधिकार, 
वक्त की फिरकी पर ही, चलता सारा संसार। 

ठोकर खाता है, जो वक्त की कद्र न पाता है,
वक्त ही जन्मों - जन्मों तक साथ निभाता है।

न लौटता, न रुकता, न करता है इंतज़ार,
युग बदलें, पर वक्त नहीं बदले अपनी रफ़्तार। 

अंत को अनंत, अनंत को अंत बनाता है,
पूरी सृष्टि को अपना बंधक बनाता है।

वक्त दिखता नहीं, लेकिन सब कुछ दिखाता है, 
होता नहीं महसूस, पर महसूस कराता है।

रचयिता - डॉक्टर सलोनी चावला
(प्रमाणित मौलिक रचना)
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*प्रतिभागी का नाम  -

*डॉक्टर सलोनी चावला, 
फरीदाबाद, हरियाणा,


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