गुरु - डॉ पी सी कौंडल
गुरु शिष्यों को गुरु भक्ति का मार्ग बताता है
गुरु शिष्यों को सही दिशा की ओर ले जाता है।
गुरु अपने शिष्यों का भाग्य बना देता है
तभी तो गुरु पृथ्वी पर भाग्यविधाता कहलाता है।
गुरु बिन शिष्य का कभी उधार नहीं हो पाता है
गुरु- शिष्य के प्यार जैसा और प्यार नहीं हो पाता है
गुरु बिन भवसागर से कोई पार नहीं जा पाता है
सर पर गुरु का हाथ न हो,अंधकार नहीं मिट पाता है।
गुरु अज्ञानता के अंधकार को जड़ से मिटा देता है
गुरु शिष्य के भीतर ज्ञान का प्रकाश जगा देता है
गुरु की महिमा का गुणगान अवश्य हमें करना चाहिए
गुरु का मान सम्मान,अवश्य हमें करना चाहिए।
गुरु ज्ञान का सागर और शान्ति का पुजारी होता है
गुरु सेवा का पुंज,शिष्य का हितकारी होता है।
गुरु से बड़ा संसार में और कोई नहीं होता है
क्यों कि गुरु ही शिष्य में,ज्ञान का बीज बोता है।
गुरु ही वो शक्ति है,जो भगवान से मिला देता है
गुरु के बिन सतलोक में,कोई पहुंच नहीं पाता है।
"""""""""
डॉ पी सी कौंडल, हिमाचल प्रदेश,

No comments:
Post a Comment