परिवर्तन-दोहे
परिवर्तन हर क्षेत्र में , दिखता चारों ओर।
कहीं रंग बदरंग है, कहीं रंग चितचोर।।
रिश्तों में है घट रहा , अपनापन विश्वास।
परिवर्तन व्यवहार में , बदले सब अहसास।।
परिवर्तन की चाह में, भूल गए संस्कार।
खेले जिसकी गोद में,करें उन्हीं पर वार।।
परिवर्तन कर सोच में, सबसे करते मेल।
जीवन के संग्राम में, सफल रहेंगे खेल।।
दुनिया में है लग रहा, परिवर्तन का जोर।
साथ चला तो जीत है, पिछड़ा तो कमजोर।।
स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
फरीदाबाद -हरियाणा
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