Friday, 8 May 2026

आसमान से - रशीद अकेला


 आसमान से - रशीद अकेला


टकराया हूँ हर आंधी और तूफ़ान से
ख़ौफ़ नहीं अब दरिया के उफान से

मुश्किल वक्त में अपने भी किनारा करते हैं
    आस लगा के देखा इस जहान से

ज़ख्म दिल के भरते नहीं कभी जानता हूँ
दर्द छुपाता हूँ फिर भी  झूठी मुस्कान से

     ख़ंजर से ज़्यादा ज़ख़्मी करते हैं
     निकलते हैं लफ्ज़ जो जुबान से

      होता है एहसास ईक दिन ज़रूर
      तीर छूट जाता है जब कमान से

उम्मीदें नहीं हौसला बचा के रखा हूँ मैं तो
  गुज़र जाऊँगा अब भी हर इम्तिहान से

   मेरी दरियादिली मुझे ले डूबी वरना
  कौन ? टकराता भला इस चट्टान से

    ये दर्द ओ ग़म क्या रुलाये मुझे
आँखे बस नम लेकर लौटा हूँ क़ब्रिस्तान से

आख़िर कब तक आज़माएगा मुझे वो रशीद
रहमत की बारिस होगी कभी तो आसमान से


रशीद अकेला ,झारखंड
लेखक एवं समाजसेवी

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