मेरी मॉं - मनोज कुमार कैन
माँ तुम चली गई
कहॉं.....?
माँ तुम स्वप्न में
आ जाया करो !
रोज नहीं तो
कभी-कभी अपने
इस बेटे के पास
आ जाया करो !
जो मार्ग आपने
दिखाया था !
उससे अलग हो
गए हैं तो
समझाया करो
डॉट लगाया करो
पर माँ सपनों में
आ जाया करो !
अपने खून-पसीने से
बनाया था जो उपवन
उस उपवन की
फुलवारी के फूलों
को तो दुलार जाया
करो !
माँ तुम स्वप्न में आ
जाया करो !
सुन्दर लुभावनी छवि
वात्सल्य मुस्कान
ममत्व आँखें
उदार हाथ
दो मीठे बोल
बोल जाया करो !
माँ तुम स्वप्न में
आ जाया करो !
आओगी तो मैं
रूकने के लिए जिद
नहीं करूँगा !
जैसा कहोगी वैसा
ही करूँगा !
अपनी मातृत्व वृष्टि
कर जाया करो !
माँ तुम स्वप्न में
आ जाया करो !
माँ तुम सपनों में
आ जाया करो !
माँ के श्रीचरणों में सादर नमन !
आप सभी सम्मानित साथियों को मातृ दिवस की बहुत-बहुत हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
मनोज कुमार कैन
दिल्ली

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