Monday, 18 May 2026

बंगभूमि का अमर स्वर - Dr. Pro. Y. Kasturi Bai

बंगभूमि का अमर स्वर - Dr. Pro. Y. Kasturi Bai
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बंगभूमि केवल एक प्रदेश नहीं,
वह इतिहास की जागृत चेतना है।
यह वही धरा है जहाँ स्वाधीनता का प्रथम स्वर गूँजा,
जहाँ जनमानस ने अन्याय के विरुद्ध विद्रोह सीखा।

कभी विभाजन की वेदना ने इसे अश्रुपूरित किया,
कभी स्वदेशी आंदोलन ने इसे अग्निमय बना दिया।
क्रांतिकारियों के चरणों से यह भूमि पावन हुई,
और संघर्षों की ज्वाला से युगों तक आलोकित रही।

यहाँ परिवर्तन केवल शासन परिवर्तन नहीं रहा,
बल्कि विचारों का महासंग्राम बनकर उभरा।
कभी किसान आंदोलनों ने नई दिशा दी,
कभी छात्र चेतना ने व्यवस्था को चुनौती दी।

बंगाल की राजनीति सदैव प्रखर रही है।
यहाँ शब्द भी शस्त्र बन जाते हैं,
और भाषण जनभावनाओं का ज्वार बन उठते हैं।
शासन बदलते रहे,
किन्तु संघर्षों की धारा कभी नहीं रुकी।

दुर्भाग्यवश अनेक बार हिंसा ने भी इस भूमि को आहत किया।
चुनाव लोकतंत्र का पर्व होने के स्थान पर
कभी-कभी भय और टकराव का रूप ले बैठे।
रक्तरंजित मार्गों ने मानवता को प्रश्नों के सम्मुख खड़ा किया।

किन्तु यही बंगभूमि संगीत की मधुर सरिता भी है।
रवीन्द्र-संगीत की स्वर लहरियाँ यहाँ के आकाश में गूँजती हैं।
साहित्य यहाँ केवल पठन नहीं, जीवन का आलोक है।
संस्कृति यहाँ की श्वासों में बसती है,
और आहार-विहार में भी आत्मीयता की सुगंध मिलती है।

माटी की सौंधी गंध, मछली-भात की सरलता,
दुर्गोत्सव की दिव्यता,
और मानवीय संवेदनाओं की कोमलता—
इन सबने बंगाल को अद्वितीय बना दिया है।

बंगाल आज भी भारत की चेतना में
परिवर्तन, साहित्य, संस्कृति और अदम्य साहस का अमिट प्रतीक बना हुआ है॥
Dr. Pro. Y. Kasturi Bai 
Bengaluru 
Karnataka

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