Saturday, 13 June 2026

हरियाली - सुरेश कंठ

हरियाली - सुरेश कंठ

है पवित्र देखने में 
यह मुझे अब आया 
अति सुंदर तो जरूर है 
मुझे तो यह मन से भाया 
       ( 1 )
प्रकृति की रीति यही है 
छटा दिखती है निराली 
मनमोहक है दिखने में 
लगता है  “ हरियाली “
       ( 2 )
यही है परम सत्य अभी
सौभाग्य है इसमें हमारी 
स्पष्ट है कितना भला 
देखने  में  है  न्यारी 
         ( 3 )
 भारत की यह अनुपम छटा 
 धरती की सुंदरता भाया
 दिखने में सुंदर  होगी 
किसान को सभी ने बताया 
         ( 4 )
 हमने बहुत देखा है, सुना है 
 आकाश में  चहुं ओर 
  लगता बहुत अनंत है
  देखकर यह सब विभोर 
           ( 5 )
 कवि की कल्पना है अपरंपार
 होती है बड़ी विशाल 
 नहीं इसका कोई जवाब है 
 रह जाता है मन में मलाल 
            ( 6 )
 थोड़ा सा धैर्य रखें 
 समय को पनपने दें 
 निकलेगी कुछ निष्कर्ष 
आगे पीछे समझने दें 
             ( 7 )
 प्रकृति को रहने दें, समतुल्य 
       इसे समझना चाहिए 
पेड़ - पौधे अत्यधिक लगाएं 
इसे नहीं भूलना चाहिए 
            ( 8 )
इससे वर्षाजल समय पर होगी 
धरती पर “ हरियाली “ रहेगी 
तभी पैदावार अनुकूल होगी 
किसान खुशी से शांति मनाएगी 
             ( 9 )
कहते हैं “ कवि सुरेश कंठ “
जनता जनार्दन को परखने  दें 
मामला समझो अति गंभीर है 
 हमें भी कुछ संभलने दें 
             ( 10 )
            जयहिंद 
            “ सुरेश कंठ “
 Bihar 

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