Saturday, 13 June 2026

प्रकृति - प्रा.रोहिणी डावरे


   प्रकृति - प्रा.रोहिणी डावरे              

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प्रकृति से जो करे सच्चा प्यार
दुनिया उसकी रहे सदा बहार
प्रकृति से नां करे दुर्व्यवहार
देती हमें वह शुद्ध आहार।१।

हरी वादियाँ प्यारा समा
निर्मल गंगा,नीला आसमां
धरती ओढे हरी घास की चादर
मोर पपीहा पत्तों की सरसर।२।

प्रकृति की गोद में जो ले लेता शरण
दर्द मन का हो जाए हरण
शांति सुंदरता प्रकृति का गहना
सारा सच सबको सहते रहना
।३।

पर्वतों की बाँहों में मिलता चैन
बरसेंगे बादल तरसे हैं नैन
नदियों संग भरे ताल तलैया
मस्त बहार बहे पुरवैया।४।

 ऊँचे पहाड,सागर है गहरा
देश की रक्षा पर दे रहे पहरा
सारा सच की प्रकृति निराली
हरदम सबकी भर दे झोली।५।

 पाठ पढाए त्याग बलिदान
देती सदा दूसरों को दान
देकर नां कभी इठलाती
सहनशीलता का धर्म निभाती।६।

प्रकृति से जो करे खिलवाड
टूट जाएगा उसपर पहाड
खुल जाए अगर तीसरी आँख
पलभर में होगा सबकुछ राख ।७।

  अगम्य अद्भूत प्रकृति का ज्ञान
सत्व रज तम गुणों की खाण
प्रकृति में ये गुण है भारी
संयम नियम से संतुलन जारी
।८।

  किताब नहीं, है किताबों का ज्ञान
अब तक पढ न सका इन्सान
गाए झरना मधुरतम गीत
प्रकृति की सुंदरता से लगाओ प्रीत।९।
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     🙏🏻सकृतज्ञ धन्यवाद🙏🏻

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