चंदा चोरी - ललित कुमार शर्मा
राम भक्तों ने हाथ जोड़कर, चंदा था दिया चढाए
मन में आस्था राम की, बस भव्य मंदिर बन जाए
जोर शोर से कर निर्माण, राम मंदिर दिया बनाए
लगा सदियों बाद स्वयं, लौट रघुबर घर को आए
हुई धन्य अयोध्या नगरी, हुआ शुरु नया अध्याय
जन मानस उमड़ पड़ा, राम लला मन में बिठाए
आने लगे यही चाहत लिए, श्रीराम दर्शन हो जाए
फिर गरीब हो या अमीर, खूब चढ़ावा रहे चढ़ाए
दान पात्र से गिनने नोटों को, लोगों को दिया बिठाए
देखकर दान राम मंदिर का, कुछ अधर्मी थे ललचाए
भरने को घर की तिजोरी, राम के घर में सेंध लगाई
करने ऐसा पाप तो देखो , आत्मा ज़रा नहीं सकुचाई
लाखों रुपए अपनों में बाँटे, लाखों को दिया छिपाए
पाप के आए उन्हीं पैसों से,गाड़ी और घर भी बनाए
होती रही चोरी चंदे की, रहे मूक बैठे चंपत राय
चंपत के चतुर चेलों ने, मिलकर लाखों दिए उड़ाए
कह रहे अब चंपत जी सबको, कि वो तो हैं सीधे सादे
वो हैं निर्दोष, निष्पाप हमेशा, पहचान न पाए इरादे
चढ़ावा चोरी की जाँच हो रही, मचा रहे हैं सब शोर
कुछ बंदर हैं जेल के अंदर, बाहर नाच रहे कुछ मोर
कह रही सरकार ये सबसे, सख्त होगी कार्रवाई
देंगे सख्त सज़ा चोरों को, वसूलेंगे उनसे पाई-पाई
सज़ा से गर डरता इंसान, न बनता बलात्कारी चोर
इंसानियत रहे ज़िन्दा धरती पर, हो ऐसी उजियारी भोर
स्वरचित एवं मौलिक रचना
ललित कुमार शर्मा
नई दिल्ली

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