Sunday, 19 July 2026

अर्थ व्यवस्था - संजय जैन "बीना"

अर्थ व्यवस्था - संजय जैन "बीना" 

माली हालत तुम देखो तो
कैसे सबकी बुरी हो गई। 
कर्जा के बोझ तले देखो
कैसे लोग अब फस गये।। 

आये के साधन सीमित है
इसलिए तो बेरोजगारी है। 
शिक्षा का स्तर तो ऊँचा है
पर उनको रोजगार नही।। 

मंहगाई की मार से देखो
सब की हालत पतली है। 
रुपये का अवमूल्यन है
इसलिए मंहगाई चुभ रही।। 

कामगारों को काम नहीं है
क्योंकि लघु उधोग बंद पड़े। 
अर्थ व्यवस्था जो चलाते थे
वो छोटे-छोटे धन्धे बंद हुए।। 

मध्यमवर्गी लोग ही देखो
बाजारों को चलाते है। 
इनके पैसों से ही देखो
बाजारों में रोनक रहती है।। 

एक सेठ दस लोगों को
जो रोजगार देता था। 
बड़े-बड़े माल खुल जाने से
सेठों का व्यपार बंद हुआ।। 

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई 

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