Sunday, 19 July 2026

माँगें - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' स्वरचित

 

माँगें - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' स्वरचित 

'हमारी माँगे पूरी हो, 
चाहे जो मजबूरी हो।'
यह पंक्ति हमें अक्सर सुनने को मिलती है।
कुछ माँगे सही होतीं, कुछ गलत भी हो सकती हैं।
किसी से कुछ तभी मांगो, 
जब मांगना हो अनिवार्य।
माँगे बिना जब काम न चले, स्थितियां हो अपरिहार्य।
'रहिमन वे नर मर चुके, जो कछु मांँगन जाहि।
उनते पहिले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहि।।'
रहीम जी के कथन।
जरूरतमंद की सहायता करना, लगाना अपना तन,मन,धन।
'हमारी माँगें पूरी हो,'
समाज की भलाई के लिए यह नारा लगाना। 
गलत मांग के लिए जिद न करना, वरना पड़ेगा पछताना।
मांगना और देना, एक दूसरे के पूरक हैं।
कुछ मांगना, मानव की आवश्यकता का सूचक है।
'बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न‌ भीख।'
कबीर दास जी की यह पंक्ति, देती हमको सीख।
कहते हैं,
'भगवान जब देते हैं, 
देतेँ छप्पर फाड़।'
बिन मांगे प्रभु समझ जाते,
करते जो वे अपने भक्तों से लाड़।
दहेज लोलुप दहेज माँगते,
देतें अपनी बहुओं को कष्ट।
मानवता के दुश्मन होते ये, 
बुद्धि इनकी होती भ्रष्ट। 
कोई भूखा दिखे जब, 
बिन माँगे उसको भोजन देना।
पेट जब उसका भरेगा, उसकी
दुआएँ लेना।
घर से बाहर निकलो, माँगने वाले दिखेंगे।
माँगने वाले हर मोड़ पर, खड़े मिलेंगे। 
कुछ लोगों की मांँगने की, आदत बन जाती है।
बिना माँगे इन्हें, चैन की नींद नहीं आती है। 
'देनहार कोई और है, भेंजत जो दिन रैन।
लोग भरम हम पर करैं, तासो नीचे नैन।'
उपरोक्त पंक्तियाँ हमने पढ़ा है। 
मांगना छोड़ जो अर्जित किया, वही इतिहास गढ़ा है।
उपर वाले से,
सब की भलाई मांँगना। 
जहां तक हो सके, 
माँगने की आदत से बचना।
माँगना यदि पड़े, शालीनता  से माँगना चाहिए।
दाता याचक का संबंध मधुर होना चाहिए।
मांगने के साथ-साथ देना भी पड़ता है। 
जीतता वही है, जो अंत तक लड़ता है।
औरों से मांगना क्यों, खुद सुयोग्य बनना होगा।
जो देंगे वही पायेंगे, 
हमें समझना होगा।
मांगने से बचो, देने की आदत डालो, 
अगली पीढ़ी को समझाना होगा।
समाज में बदलाव, 
हमें ही तो लाना होगा।


डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 
स्वरचित
West Bengal 

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