हमारी वाणी - सारा सच
प्रतियोगिता विषय :प्रधानमंत्री - अरुण दिव्यांश
दिवा : बुधवार
गंगा यमुना सतलज जहाॅं ,
सरस्वती जहाॅं आधार है ।
राम कृष्ण अवतरित जहाॅं ,
जिस धरती बरसे प्यार है ।।
जहाॅं की बेटियाॅं दुर्गा लक्ष्मी ,
जिनकी बरसती संस्कार है ।
जिनकी महिमा प्रधानमंत्री ,
जिन्हें पूजता यह संसार है ।।
पैदा हुए थे जहाॅं पर कौरव ,
पाण्डव भी वहीं पे आए थे ।
अन्याय न्याय युद्ध हुआ था ,
अन्याय को वे निपटाए थे ।।
उसी धरा आए प्रधानमंत्री ,
विश्व का नेतृत्व जो करते हैं ।
आज है मरना कल है मरना ,
मरने से नहीं अभी डरते हैं ।।
धन्य यह भारत देश हमारा ,
जो विश्व को बना प्यारा है ।
जो पथ से विचलित हुआ ,
उसे भारत ने धिक्कारा है ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
नाम : अरुण दिव्यांश
ग्राम : डुमरी अड्डा
जिला : छपरा ( सारण )
बिहार

No comments:
Post a Comment