Saturday, 10 January 2026

परिचय - अनीता चमोली


धरा की गोद में पर्वत
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परिचय - अनीता चमोली
 उत्तराखंड ( देहरादून )

धरा की गोद शान से खड़े
ऊंचे नीचे पर्वत
असंख्य नदियों, झरनों नामालूम
कितने दरख्त़ों, वन्य प्राणियों
कलरव करते पंछियों को 
पनाह देते हैं
यही बसे हैं केदारनाथ, बद्री विशाल, यमुनोत्री
गंगोत्री, पंचप्रयाग, कर्णप्रयाग, विष्णुप्रयाग और
हरिव्दार, ऋषिकेश, जागेश्वरधाम
कटारमल सूर्य मंदिर, हेमकुंड आदि असंख्य!
यह देवभूमि है और हैं
यही ’पर्वत पिता’ के अंग प्रत्यंग
जहां मंदिरों की घंटियां दसों
दिशाओं में गूंजती हैं
मंत्रोच्चार सातों आसमान को पारकर
अंनंत आकाश में 
हलचल मचाने की सामथ्र्य रखते हैं

पिता हैं पर्वत ऐसे तमाम वैभव के  
जिनके मजबूत कांधे पर सर्द, नरम, गरम 
हवाएँ मचलती बल खाती बहती हैं

हजारों लोगों को रोजी-रोटी देते हैं
पर्वत नहीं यह पिता हैं 
और दुनियादारी का कड़वा सच भी
दिखाते रहे यह पिता दुनिया को  
यही कि दरक रहा 
पर्वत नहीं पिता का तन-मन
लहू लुहान छिन्न भिन्न हो रहा 
विनाश विध्वंस के कुचक्र में
तार-तार हो रहे ’’पर्वत पिता’’ के अंग वस्त्र
लाखों युवा पापी पेट की
आग बुझाने मैदानों की ओर जा चुके हैं
पीछे छोड़कर मकानों के
उजाड़ खंडहर
जहां भूतहा परछांई डोलती हैं  

और बारिश की बूंदें मत कहो 
यह पर्वत पिता के आंसुओं की धार हैं
हो सके तो बचा लो
अभी भी समय है

समय अभी भी है! 

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच साप्ताहिक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टि
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’’हमारी वाणी’’ और सारा सच (मीडिया) राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र व्दारा साप्ताहिक प्रतियोगिता  ’’मेरी कलम मेरी पहचान’’  के अंतर्गत प्रविष्टि प्रेषित की जा रही है।
आपके व्दारा निर्धारित विषय में से मैं ’’पर्वत’’ के तहत अपनी मौलिक कविता प्रेषित कर रही हूं।

(परिचय)
मैं अनीता चमोली देहरादून (उत्तराखंड) में निवासरत, शिक्षा एमए हिंदी साहित्य, स्वयं का व्यवसाय। मैं 15 सेमिनार और 35 काव्यमंचों से रचनापाठ कर चुकी हूँ, अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन होता रहा है। कविता संकलन ’’सृजन’’ तथा कहानी संकलन ’’गुलमोहर’’ प्रकाशनाधीन हंै।
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