Saturday, 10 January 2026

पर्यावरण - डॉ कौशल किशोर

पर्यावरण  - डॉ कौशल किशोर 

पहले तो हम पर्यावरण के शाब्दिक अर्थ से परिचित होंगे। परि+आवरण- पर्यावरण।परि का मतलब चारो ओर और आवरण का मतलब होता है घेरा,ढंकना। सही कहा जाए तो चारों ओर का वातावरण। हमारे चारों ओर के वातावरण को जीवन के अनुकूल बनाए रखना हम सभी का परम कर्तव्य है। सभी जीव जंतुओं का जीवन पूरी तरह से प्रकृति जल एवं वायु पर निर्भर करता है। इसके अलावा जरूरत की बहुत सारी आवश्यकताएं हमें प्रकृति से मिलती है। मनुष्य के लिए मूल रूप से भोजन, वस्त्र और आवास बहुत जरूरी है। ए भी हमें प्रकृति से प्राप्त होती है। इसके लिए हमें पर्यावरण की सरंक्षण बहुत जरूरी है। 
        पेड़ पौधे द्वारा छोड़ी जा रही आक्सीजन के कारण प्राणी जीवित है। लेकिन आज मनुष्य द्वारा और फैक्ट्री द्वारा इसे प्रदूषित किया जा रहा है। इसके चलते पर्यावरण असुरक्षित हो गया है। हम सभी का कर्तव्य होना चाहिए की पर्यावरण को सुरक्षित रखें जिससे प्राणी वर्ग का अस्तित्व बना रहे। आज मानव ने प्रकृति पर पूर्णतः विजय पा लिया है। यह विकास की दृष्टि से तो ठीक है। ऐसा करके मानव ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार लिया है। विज्ञान की मदद से मानव चॉंद की शैर कर आया। अणु और परमाणु बम का आविष्कार हो गया। एक्स-रे का आविष्कार हो गया और बहुत सारी चीज़ें विज्ञान की मदद से पा लिया गया।  लेकिन हमें प्रकृति से खिलवाड़ ज्यादा नहीं करना चाहिए। 
       पर्यावरण की संरक्षण का ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। हमें पेड़ लगाने चाहिए। सरकारी आदेशानुसार विद्यालय में एक आदेश आया कि बच्चों द्वारा "एक पेड़ मां के नाम" लगवाया जाए। इको क्लब की शुरुआत भी हर विद्यालय का एक अंग है जो पर्यावरण का ही एक अंग है। स्वच्छ भारत मिशन भी पर्यावरण का ही एक अंग है। पेड़ से हमें भरपूर आक्सीजन मिलता है। पेड़ धरती को ठंडा रखने का काम करता है। 
      अतः हमें जल, उर्जा और प्लास्टिक का सही उपयोग कर पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। जनसंख्या नियंत्रण कर भूमि और जल संसाधन को बचाया जा सकता है। योग्यता पूरी किए बिना पेड़ों की कटाई पर रोक, सड़कों और नालियों की सफाई। यह सब सामुदायिक सहयोग से संभव है ‌। "हम स्वच्छ रहें मेरा संसार स्वच्छ रहें" इस नारे के साथ बढ़ें।

डॉ कौशल किशोर 
साहित्यकार, लेखक सह शिक्षक।

, बिहार

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