Monday, 9 March 2026

पहली मुलाकात - सोनिया सरीन

पहली मुलाकात - सोनिया सरीन

वही बादल ,वही बरखा और वो मीठी बातें तेरी ,
कैसे भूलूँ ओ रे साजन तुझ संग पहली मुलाकात मेरी?

तेरी आखों में ही बसती है इक हसीन दुनिया मेरी,
तेरी चौखट पर डले शाम ,चाहूँ बीते  राते मेरी।
कैसे भूलूँ ओ रे साजन ,तुझ संग मुलाकात मेरी?

दिल तो पहले से ही तेरे इश्क का कायल था ओ मेरे जानशी़न, 
सांसे भी अब उफनती है इक झलक देख तेरी।

कैसे भूलूँ ओ रे साजन ,तुझ संग मुलाकात मेरी? 


लिखती हूँ खत तुझे जानम,भीगे अल्फाजों से।
नही मालूम की  क्या भाएगी ,तुझे ये सौगात मेरी। 
कैसे भूलूँ ओ रे साजन ,तुझ संग मुलाकात मेरी? 

कब से खा़मोश है ये लब मेरे,क्या तुझे ये भी इल्म नहीं,
क्यों तू समझे नही शर्मो हया में लिपटे जज्बात मेरे । 
कैसे भूलूँ ओ रे साजन तुझ संग मुलाकात मेरी?

आ भी जा अब की ये आंखे सुकून से बंद करूँ,
वरना भटकेगी ये बेबस रूह हर जन्म में मेरी। 
कैसे भूलूँ ओ रे साजन तुझ संग मुलाकात मेरी। 

इश्क करना तो जहर पीने सा लगता है (साहिबा ),
दीदारे यार हो या नहीं हो गिरती है बिजलियाँ मासूम दिल पर ही ।
कैसे भूलूँ ओ रे साजन तुझ संग मुलाकात मेरी?

स्वरचित व मौलिक

सोनिया सरीन (साहिबा ) 
दिल्ली

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