पहली मुलाकात - सोनिया सरीन
वही बादल ,वही बरखा और वो मीठी बातें तेरी ,
कैसे भूलूँ ओ रे साजन तुझ संग पहली मुलाकात मेरी?
तेरी आखों में ही बसती है इक हसीन दुनिया मेरी,
तेरी चौखट पर डले शाम ,चाहूँ बीते राते मेरी।
कैसे भूलूँ ओ रे साजन ,तुझ संग मुलाकात मेरी?
दिल तो पहले से ही तेरे इश्क का कायल था ओ मेरे जानशी़न,
सांसे भी अब उफनती है इक झलक देख तेरी।
कैसे भूलूँ ओ रे साजन ,तुझ संग मुलाकात मेरी?
लिखती हूँ खत तुझे जानम,भीगे अल्फाजों से।
नही मालूम की क्या भाएगी ,तुझे ये सौगात मेरी।
कैसे भूलूँ ओ रे साजन ,तुझ संग मुलाकात मेरी?
कब से खा़मोश है ये लब मेरे,क्या तुझे ये भी इल्म नहीं,
क्यों तू समझे नही शर्मो हया में लिपटे जज्बात मेरे ।
कैसे भूलूँ ओ रे साजन तुझ संग मुलाकात मेरी?
आ भी जा अब की ये आंखे सुकून से बंद करूँ,
वरना भटकेगी ये बेबस रूह हर जन्म में मेरी।
कैसे भूलूँ ओ रे साजन तुझ संग मुलाकात मेरी।
इश्क करना तो जहर पीने सा लगता है (साहिबा ),
दीदारे यार हो या नहीं हो गिरती है बिजलियाँ मासूम दिल पर ही ।
कैसे भूलूँ ओ रे साजन तुझ संग मुलाकात मेरी?
स्वरचित व मौलिक
सोनिया सरीन (साहिबा )
दिल्ली

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