प्रकृति - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
प्रकृति के रूप में ईश्वर ने,
हमें दिया अनमोल उपहार।
इस अनमोल उपहार के लिए,
प्रभु को धन्यवाद है बारंबार।
प्रकृति अमूल्य धरोहर है,
हमें समझना होगा।
इसकी रक्षा करने हेतु,
हमें आगे बढ़ना होगा।
प्राकृतिक सम्पदाएं,
आती हैं हमारे काम।
पूरी तरह नि:शुल्क हैं ये,
नहीं लगता कोई दाम।
हर प्राकृतिक वस्तु,
देती है हमें सीख।
परिस्थितियाँ कैसी भी हो, डरना नहीं, रहना तुम निर्भीक।
हर स्थिति में डटे रहना, सिखलाता है पहाड़।
अपने शत्रुओं का मुकाबला करो, दो उनको पछाड़।
सागर का अथाह पानी कहता,
हार कर न बैठना, रहना सदा सक्रिय।
मीठी वाणी बोलना, नहीं करना बातें अप्रिय।
पृथ्वी कहती धीरज रखना,
कर देना सबको क्षमा।
सब कुछ यहीं छोड़ जाना है, जितना भी कर लो जमा।
अंबर की विशालता, देता हमको ज्ञान।
हौसले बुलंद होंगे,
तभी भर पाओगे उड़ान।
प्यारे-प्यारे रंग बिरंगे,
फूलों की खुशबू कहती।
भेदभाव नहीं करना,
महकाओ औरों की जिंदगी।
इठलाती, बलखाती तितली,
खुश रहने का पाठ पढ़ाती।
रंग भरा जीवन जीना,
तितली हमको बतलाती।
नदियाँ निरंतरता का पाठ पढ़ातीं,
कहतीं, राह में बाधाएं आयेंगी, हार कर मत बैठना।
नये राह की तलाश करना,
मदद सदा सबकी करना।
पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड लेते, ऑक्सीजन हैं हमें देते।
पर्यावरण को स्वच्छ करते, हरियाली हमें देते।
जंगल हमारे पर्यावरण को संतुलित करतें, जलवायु नियंत्रण करते।
अनेक औषधियाँ हमें मिलतीं,
पशु-पक्षियों को आश्रय मिलते।
गंगा माता सिखलाती हैं, चलते रहो, नहीं रुकना।
क्षमा कर देना सभी को, पावनता बनाए रखना।
ऐसी अमूल्य प्रकृति की, देखभाल करनी है हमें।
ऐसी नायाब संपदा की,
हिफाजत करनी है हमें।
प्लास्टिक का उपयोग बंद करें, खूब पेड़ लगाएंँ।
गीले, सूखे कचरे अलग करें,
पुनर्चक्रण (रीसाइकिल) की व्यवस्था कराएँ।
जल का दुरुपयोग न हो, बिजली हम बचायें।
जंगल को कटने न दे,
गंगा माँ को प्रदूषित होने से बचाएं।
जानकारों का कहना है, हमें थ्री आर का नियम अपनाना चाहिए।
रिड्यूस (कम करना), रीयुज (पुन: उपयोग करना), रीसाइकिल(पुनर्चक्रण) का उपयोग कर पर्यावरण बचाना चाहिए।
बच्चों को प्रकृति का महत्व बताएं, उन्हें प्राकृतिक संपदा बचाने को करें प्रेरित।
बच्चे पेड़ लगाएं, पर्यावरण न हो दूषित।
प्रकृति के हम करीब रहे, प्रकृति का करें संरक्षण।
जीवन में हम आगे बढ़ेंगे, खुशियों को देंगे आमंत्रण।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
वैस्ट बंगाल
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