वेलेंटाइन डे
लाज शर्म छोड़कर सब,
वैलेंटाइन डे मनाने लगे।
दे लेकर उपहार,
स्वारथ को प्रेम जनाने लगे।।
भूल कर अपनी सभ्यता,
मर्यादा का न रखते ध्यान,
प्रेम नहीं तो दिवस किस काम का,
बात यह सब भूल जाने लगे। १
प्रेम तू त्याग समर्पण है,
राम ने शबरी के बेरों को खाया
गोपियों ने छाछ पर,
श्री कृष्ण को नाच नचाया।।
प्रेम संबंध है आत्मा का,
नहीं है यह व्यापार।
जताते जो प्रेम एक दिन,
क्या यही वैलेंटाइन डे का आधार।।
कुत्सित भावना और को,
लोग प्रेम बताने लगे।
आदान-प्रदान का बाजार,
हम वैलेंटाइन मनाने लगे
@पदमा ओजेंद्र तिवारी दमोह मध्य प्रदेश

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